उत्तर प्रदेश के कानपुर के करौली बाबा (Karauli Baba) सुर्खियों में हैं. दरअसल, करौली बाबा संतोष सिंह भदौरिया पर एक भक्त ने मारपीट का आरोप लगाया है. इस घटना एक वीडियो भी सामने आ चुका है. वीडियो में देखा जा सकता है कि बाबा और पीड़ित के बीच बहस हो रही है. बताया जा रहा है कि बाबा के आश्रम में हर रोज तीन से चार हजार भक्तों की भीड़ पहुंचती है. आश्रम में भक्तों को 100 रुपये की पर्ची कटानी पड़ती है.
जानकारी के अनुसार, संतोष सिंह भदौरिया उर्फ करौली बाबा तब मशहूर हुए जब कोयला निगम का चेयरमैन बनकर लाल बत्ती मिली. हालांकि यह रुतबा कुछ ही दिन रहा. बता दें कि करौली बाबा पर कई आपराधिक आरोप लग चुके हैं. बाबा के खिलाफ 1992-95 के बीच हत्या समेत कई आपराधिक मामले दर्ज हुए थे.
आश्रम बनाने के बाद शुरू किया था आयुर्वेदिक हॉस्पिटल
बाबा ने जब करौली आश्रम बनाया तो सबसे पहले शनि भगवान का मंदिर बनवाया. इसके बाद थोड़ी और जमीन खरीद कर करौली आश्रम शुरू कर दिया. इस आश्रम में आयुर्वेदिक हॉस्पिटल शुरू किया. इसके बाद कामाख्या माता का मंदिर बनवाया, फिर संतोष बाबा ने अपने तंत्र-मंत्र का प्रचार यू-ट्यूब के जरिए शुरू किया. देखते ही देखते करौली बाबा खूब फेमस हो गए.
करौली बाबा बनने के बाद धन की वर्षा शुरू हो गई. इसके बाद संतोष बाबा ने तीन साल में करोड़ों का साम्राज्य खड़ा कर लिया. उनका आश्रम 14 एकड़ में फैला हुआ है. आश्रम में प्रतिदिन 3 से 4 हजार लोग पहुंचते हैं. यहां आने वाले भक्तों को सबसे पहले 100 रुपये की रसीद कटानी पड़ती है. उसके बाद करीब 5000 रुपये से ज्यादा का खर्च आता है.
हवन कराने में आता है 50 हजार से 1 लाख तक का खर्च
इस आश्रम में हर समय हवन होता रहता है. हवन करने का मंत्र करौली बाबा संतोष भदौरिया खुद देते हैं. इस हवन का खर्चा 50 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक हो जाता है. अगर कुछ खास करना चाहे तो खर्चे की कोई सीमा नहीं है.
आश्रम में पूजा सामग्री की दुकानें भी हैं. हवन करने का सामान भी आश्रम से ही लेना पड़ता है. बागेश्वर धाम की तरह यहां भी लोग अपनी मनोकामना की अर्जी लगाते हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि बागेश्वर धाम में अर्जी लगाने का कोई पैसा नहीं पड़ता है, लेकिन यहां 100 रुपये की रसीद कटती है.
करौली बाबा से जुड़ा क्या है ताजा विवाद?
पुलिस करौली शंकर बाबा से भक्त के साथ मारपीट के मामले में पूछताछ करने तो पहुंची, लेकिन बयान दर्ज नहीं हो सके. बताया जा रहा है कि पुलिस ने कोई बयान दर्ज नहीं किया. बाबा का कहना है कि वह अपने वकील से सलाह लेने के बाद ही बयान दर्ज कराएंगे.
दरअसल, नोएडा से उपचार कराने आए डॉ. सिद्धार्थ चौधरी ने करौली शंकर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है. इसमें कहा गया है कि जब उन्होंने बाबा से चमत्कार न दिखने की बात की तो उनके बाउंसरों ने कमरे में बंद कर उन्हें लोहे की रॉड से और लात घूंसों से मारा, जिसमें वह लहूलुहान हो गए.
वकील से बात करने के बाद ही दर्ज कराएंगे बयानः करौली बाबा
इस मामले पर करौली बाबा ने कहा कि वह अपने वकील से बात करने के बाद ही अपना बयान दर्ज कराएंगे. इस पर पुलिस का कहना है कि आश्रम उन्हें लिखित में दे कि उनके पास आश्रम में लगे सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग नहीं है. इस मामले में कानपुर के डीसीपी साउथ का कहना है कि फिलहाल सिद्धार्थ चौधरी केस की पड़ताल पर पूरा ध्यान है. मामला तूल पकड़ा तो करौली बाबा की क्राइम कुंडली भी सामने आ गई.
बाबा ने कहा- मुझ पर राजनीतिकरण के तहत हुई थी कार्रवाई
पुलिस ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की थी कि बाबा का बयान दर्ज किया जाएगा. वहीं यूपी तक से बातचीत में करौली शंकर बाबा ने कहा कि पुलिस आई थी, वह उनका काम है और जांच करके चली गई. जांच होनी ही चाहिए. बाबा ने कहा कि मेरे ऊपर समाजवादी की पार्टी की सरकार में NSA लगा था. राजनीतिकरण के तहत मुकदमे लगे थे.
बीते दिनों बाबा ने दावा करते हुए यह भी कहा था कि अगर मैं चाहूं तो यूक्रेन-रशिया का युद्ध रुकवा सकता हूं. बाबा ने कहा था कि दोनों देश के प्रतिनिधियों की स्मृतियों को मिटाकर आपसी बैर दूर कर युद्ध रुकवाया जा सकता है.
पहले भी बाबा पर लग चुके हैं आपराधिक आरोप
इससे पहले भी करौली बाबा संतोष सिंह भदौरिया पर कई आपराधिक आरोप लग चुके हैं. करौली बाबा के खिलाफ 1992-95 के बीच हत्या समेत कई आपराधिक मामले दर्ज हुए थे. 14 अगस्त 1994 को तत्कालीन जिलाधिकारी दिनेश सिंह के आदेश पर संतोष भदौरिया पर रासुका की कार्रवाई की गई. जिसका नंबर 14/जे/ए एनएसए 1994 है.
चर्च की जमीन पर कब्जा करने का लगा आरोप
संतोष ने एनएसए हटाने के लिए गृह सचिव को चिट्ठी भेजी थी. चिट्ठी में संतोष ने खुद को 1989 से किसान यूनियन के साथ जुड़े होने की बात कही थी. इस बीच संतोष पर जमीनों पर अवैध कब्जा करने के आरोप लगे. संतोष पर एक चर्च की जमीन पर भी कब्जा करने का आरोप लगा था.
1992 में हुई हत्या के मामले में बाबा पर दर्ज हुआ था केस
1992 में फजलगंज थाना क्षेत्र में शास्त्रीनगर निवासी अयोध्या प्रसाद की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. राज कुमार ने मामले में संतोष भदौरिया व अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी. इसी दौरान उनका नाम सामने आया था. मामले में पुलिस ने उसे जेल भेज दिया. संतोष भदौरिया को 27 मार्च 1993 को जमानत पर रिहा किया गया था.
1994 में गाली-गलौज व मारपीट का लगा आरोप
वहीं 7 अगस्त 1994 को तत्कालीन कोतवाली प्रभारी वेद पाल सिंह ने संतोष भदौरिया व उसके साथियों के खिलाफ गाली-गलौज, मारपीट, आपराधिक धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई थी. इसके बाद 12 अगस्त 1994 को महाराजपुर थाने में तैनात तत्कालीन आरक्षक सत्य नारायण व संतोष कुमार सिंह ने चकेरी थाने में मारपीट, सरकारी कार्य में बाधा डालने सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई.
सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर कर आश्रम खोलने का लगा आरोप
इसके अलावा उनके खिलाफ वर्ष 1995 में बर्रा में भी प्राथमिकी दर्ज की गई थी. इसके बाद करौली बाबा संतोष सिंह भदौरिया पर आरोप लगा कि बिधनू में भूदान पट्टा के सरकारी दस्तावेजों में हेरफेरी करके आश्रम खोल लिया. आश्रम खोलने के बाद मंत्र से बीमारी या किसी भी तरह के समस्या के समाधान का वीडियो यूट्यूब पर अपलोड किए जाने लगे. करौली बाबा नाम के यूट्यूब चैनल के 93 हजार सब्सक्राइबर हैं.
क्या है किसान नेता से बाबा बनने की कहानी?
संतोष सिंह भदौरिया का मूल निवास उन्नाव के बारह सगवर में है. संतोष की किस्मत उस वक्त बदली जब भारतीय किसान यूनियन के महेंद्र सिंह टिकैत ने कानपुर के सरसोल क्षेत्र की पूरी बागडोर सौंप दी थी. इस दौरान एक केस में जेल जाने के बाद संतोष सिंह भदौरिया को किसानों के बीच लोकप्रियता मिल गई, इसके बाद किस्मत बदलती गई.