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पार्क में बोरे और घास में दुबके थे कुत्ते के चार पिल्ले, बच्चों ने आग लगाकर जिंदा जला दिया

कानपुर के बेगमपुरवा में चार नाबालिग बच्चों ने खेल-खेल में कुत्ते के चार पिल्लों को जिंदा जला दिया. पिल्लों का शोर सुनकर गांव वाले वहां पहुंचे तो बच्चे घबराकर भागने लगे. लेकिन गांव वालों ने 8 साल के एक बच्चे को पकड़ लिया. पुलिस उसे थाने लेकर गई. लेकिन वहां से उसे घर भेज दिया गया. इस घटना के बाद से स्थानीय लोगों में रोष है. देखना होगा कि पुलिस इसमें क्या कार्रवाई करती है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

यूपी के कानपुर में चार नाबालिग बच्चों ने खेल-खेल में कुत्ते के घर में भूसा भर दिया. फिर उनमें से एक बच्चे ने उसमें आग लगा दी. इस कारण कुत्ते के चार पिल्ले जिंदा जलकर मर गए. कुत्ते के पिल्लों की मौत से स्थानीय लोगों का गुस्सा भड़क गया. घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने लोगों को शांत कराया.

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जानकारी के मुताबिक, इस घटना को अंजाम देने के बाद चारों बच्चे घबराकर वहां से भागने लगे थे. लेकिन कुत्ते के पिल्लों का शोर सुनकर लोग वहां पहुंच गए. उन्होंने एक बच्चे को पकड़ लिया. जिसके बाद पुलिस उस बच्चे को अपने साथ थाने ले गई. फिर वहां से उसे घर भेज दिया गया. वहीं,  जानवरों के लिए काम करने वाली समाजिक संस्था 'उम्मीद एक किरण' ने किदवई नगर थाने में इसे लेकर तहरीर दी है. मामला किदवई नगर थाना क्षेत्र स्थित गीता पार्क का है. यहां एक फीमेल डॉग ने चार पिल्लों को जन्म दिया था. स्थानीय लोगों ने सर्दी से बचाने के लिए घास और बोरे की मदद से घर बनाया था.

जानकारी के मुताबिक, बेगमपुरवा में रहने वाले 8 से 9 साल की उम्र के तीन बच्चों ने खेल-खेल में उनके घर में आग लगा दी. इसकी चपेट में आकर चारों पिल्लों की मौत हो गई.

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स्थानीय लोगों का आरोप है कि बच्चों ने यह जानबूझकर उन्हें जलाया है. क्षेत्रीय लोगों ने बच्चों को पकड़ने की कोशिश की थी, लेकिन बच्चे मौके से भाग निकले. सिर्फ एक ही बच्चे को वो पकड़ पाए, जिसकी उम्र 8 साल है. इस मामले में बाबू पुरवा इलाके के एसीपी अमरनाथ यादव कहना है कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई थी. जिस बच्चे को लोगों को पकड़ा था वो माइनर था, इसलिए उसे घर जाने दिया गया.

वहीं, कानपुर के वरिष्ठ एडवोकेट शिवाकांत दीक्षित का कहना है यह मामला पशु क्रूरता अधिनियम के तहत 428 और 429 की धारा का बनता है. जिसमें से धारा 428 में 2 साल की सजा का प्रावधान है. जबकि, धारा 429 में 5 साल की सजा है. इस मामले में आरोपी की थाने से ही जमानत मिल जाती है. लेकिन बच्चे माइनर हैं इसलिए बच्चों को ऐसे अरेस्ट नहीं किया जा सकता है. मामले में अभी जांच की जा रही है. देखना होगा कि पुलिस इस केस में क्या एक्शन लेती है.

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