अम्बेडकरनगर जिले की कटेहरी विधानसभा में उपचुनाव होना है. इसे लेकर बीजेपी, समाजवादी पार्टी और बसपा के उम्मीदवारों ने अपना-अपना नामांकन दाखिल किया. बीजेपी ने धर्मराज निषाद, सपा ने शोभावती वर्मा और बसपा ने अमित वर्मा को कैंडिडेट बनाया है. खास बात ये है कि कटेहरी उपचुनाव में तीनों प्रमुख पार्टियों के प्रत्याशी ओबीसी समाज से आते हैं.
बीजेपी प्रत्याशी धर्मराज निषाद और सपा प्रत्याशी शोभावती वर्मा लंबे समय तक मूल रूप से बसपा की राजनीति से जुड़े रहे हैं. धर्मराज निषाद साल 1996 में पहली बार कटेहरी सीट से बसपा क़े टिकट पर विधायक बने थे, उसके बाद धर्मराज निषाद 2002 में भी बसपा के टिकट पर कटेहरी से चुनाव लड़कर विधायक बने और 2007 में भी धर्मराज निषाद कटेहरी से तीसरी बाद विधायक बने, तो मायावती ने उन्हें मंत्री भी बना दिया. साल 2012 में बसपा ने उनकी सीट बदलकर जौनपुर का शाहगंज कर दी तो वह चुनाव हार गए. इसके अलावा धर्मराज निषाद को बसपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव में अयोध्या की गोसाईगंज विधानसभा सीट से अपना प्रत्याशी बनाया था. धर्मराज ये चुनाव भी हार गए, इसके बाद धर्मराज निषाद 2019 में भाजपा में शामिल हुए और 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने धर्मराज को अकबरपुर विधानसभा से प्रत्याशी बनाया, हालांकि 2022 चुनाव में भी धर्मराज को हार का सामना करना पड़ा था.
लालजी वर्मा की पत्नी हैं सपा कैंडिडेट शोभावती वर्मा
सपा कैंडिडेट शोभावती वर्मा अम्बेडकरनगर से वर्तमान सपा सांसद लालजी वर्मा की पत्नी हैं, 2022 में लालजी वर्मा कटेहरी से सपा के विधायक चुने गए थे, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने उन्हें अपना प्रत्याशी बनाया और लालजी वर्मा चुनाव जीत गए. लालजी वर्मा के सांसद बनने के बाद ये सीट खाली हो गई. जानकारी के मुताबिक लालजी वर्मा कटेहरी विधानसभा सीट पर अपने परिवार के सदस्य को ही चुनाव लड़वाना चाहते थे.
चर्चा में आया था छाया वर्मा का नाम
लालजी वर्मा कटेहरी से 2017 में बसपा से विधायक थे और 2022 में सपा से विधायक बने. इसीलिए समाजवादी पार्टी ने लालजी वर्मा की पत्नी शोभावती वर्मा को प्रत्याशी बनाया है, शोभावती वर्मा, बसपा सरकार के दौरान 2011 से 2106 तक अम्बेडकरनगर की जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुकी हैं. हालांकि कटेहरी उपचुनाव की सुगबुगाहट के बाद से पहले ही लालजी वर्मा की बेटी डॉ. छाया वर्मा का नाम भी कटेहरी उपचुनाव के लिए चर्चा में आया था, लेकिन समाजवादी पार्टी ने उनकी पत्नी शोभावती वर्मा को प्रत्याशी घोषित कर दिया.
अमित वर्मा ने कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था पहला चुनाव
वहीं, बसपा प्रत्याशी अमित वर्मा का राजनीतिक करियर तब चर्चा में आया था, जब 2012 में विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने उन्हें कटेहरी से प्रत्याशी घोषित किया था, हालांकि अमित वर्मा 2012 में अपना पहला चुनाव हार गए थे, हालांकि इसके बाद भी वह कई साल तक कांग्रेस से जुड़े रहे. इस बीच कांग्रेस ने उन्हें जिलाध्यक्ष भी बनाया. लगभग 2 साल तक कांग्रेस जिलाध्यक्ष रहने के बाद उन्होंने अचानक इस पद से इस्तीफा दिया और बसपा में शामिल हो गए. साथ ही टिकट की दावेदारी करने लगे. हालांकि बसपा ने अमित वर्मा को ही अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया.