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'न्याय के मंदिर में हुआ भगवान का फैसला...', संजीव जीवा की हत्या पर बोले कृष्णानंद राय के बेटे

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को कोर्ट में माफिया संजीव जीवा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हमलावर वकील के भेष में पहुंचा और 6 गोलियां दाग दीं. इससे जीवा की मौके पर ही मौत हो गई. वह कृष्णानंद राय हत्याकांड के मुख्य आरोपी था. इस हत्याकांड पर कृष्णानंद के बेटे पीयूष राय का बयान सामने आया है.

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कृष्णानंद राय के बेटे पीयूष राय.
कृष्णानंद राय के बेटे पीयूष राय.

कृष्णानंद राय हत्याकांड के मुख्य आरोपी माफिया संजीव जीवा की हत्या पर उनके बेटे का बयान आया है. पीयूष राय ने कहा कि यह न्याय के मंदिर में भगवान का फैसला हुआ है. इससे पहले कृष्णानंद राय हत्याकांड के आरोपी मुन्ना बजरंगी की जेल में हत्या हुई थी. वहीं, कुल तेरह आरोपियों में से दो आरोपियों का पुलिस एनकाउंटर हो चुका है. अब जीवा की भी कोर्ट के अंदर हत्या हो गई है. 

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दरअसल, लखनऊ की अदालत में बुधवार को कुख्यात अपराधी संजीव जीवा की गोली मारकर हत्या हुई थी. वह गाजीपुर में साल 2005 में हुए कृष्णानंद राय हत्याकांड का मुख्य आरोपी था. जीवा ने ही कृष्णानंद पर दर्जनों गोलियां बरसाई थीं. कृष्णानंद राय के बेटे पीयूष राय ने संजीव जीवा की हत्या पर 'यूपी तक' से खास बातचीत की.

अपराधियों का साम्राज्य खत्म होना चाहिए- पीयूष राय

पीयूष राय ने बताया कि न्याय के मंदिर में यह भगवान का फैसला हुआ है. जब पीयूष से पूछा गया कि शार्प शूटर जीवा की हत्या और उसकी गैंग के मुन्ना बजरंगी की जेल में हत्या से मुख्तार अंसारी के जुर्म का साम्राज्य ढह जाएगा. इस पर पीयूष राय ने बताया कि बिल्कुल ऐसे संगठित अपराध वालों का साम्राज्य खत्म होना चाहिए. यह सिर्फ पूजनीय योगी आदित्यनाथ की सरकार में संभव हो पाया है. 

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न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा

उन्होंने आगे बताया कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है. मगर, इस तरह के अपराधियों के कई दुश्मन होते हैं. अपराध जगत के ऐसे अपराधियों को भी अब सोचना पड़ेगा कि न्याय व्यवस्था के अलावा उनके जुल्म के सताए हुए पीड़ित लोगों में से कोई भी उन्हें मौत के घाट उतार सकता है.

पिता ने मुख्तार के साम्राज्य को दी थी चुनौती- पीयूष

पीयूष राय ने अपने पिता की साल 2005 में हुई हत्या के बारे में भी बताया. कहा कि जब उनके पिता की हत्या हुई थी, उस वक्त उनकी उम्र महज 17 साल थी. उनके पिता की हत्या इसलिए हुई थी, क्योंकि उन्होंने मोहम्मदाबाद विधानसभा की सीट जीतकर मुख्तार के साम्राज्य को चुनौती दी थी.

कृष्णानंद राय हत्याकांड में पुलिस और सीबीआई द्वारा दाखिल की गई विभिन्न चार्जशीटों में कुल 13 आरोपी बनाए गए थे. जानिए उनके नाम... 

  • एजाज उल हक- मोहम्मदाबाद नगर पालिका के चेयरमैन रह चुके हैं. हत्याकांड में उनके ऊपर 302 का आरोप लगा था. उन्हें अब बरी कर दिया गया है. वह अब घर पर ही रहता है.
  • अफजाल अंसारी- गाजीपुर सांसद अफजाल अंसारी के ऊपर इस हत्याकांड में साजिश का आरोप लगा था. उन्हें भी इस मामले में बरी कर दिया गया था. वर्तमान में गैंगेस्टर मामले में मिली चार साल की सजा के बाद गाजीपुर जेल में बंद हैं.
  • मुख्तार अंसारी- मऊ विधायक मुख्तार अंसारी भी 120बी के तहत हत्याकांड में साजिश के आरोपी थे. उन्हें भी इस मामले में बरी किया जा चुका है. मगर, अभी भी वह बांदा जेल में बंद हैं.
  • मंसूर अंसारी- आरोप था कि कृष्णानंद राय हत्याकांड में शामिल रहते हुए मंसूर अंसारी मौके पर मौजूद था. उसे भी इस मामले में बरी किया जा चुका है. आजकल वह प्रॉपर्टी डीलिंग और मोबाइल टॉवर के व्यवसाय से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं. फिलहाल एक मामले में जेल में हैं.
  • अता उर रहमान- सामूहिक हत्याकांड के मामले में मौके पर मौजूद था. हत्यारों के साथ शामिल होने का आरोप लगा था. तब से वह फरार चल रहा है.
  • मुन्ना बजरंगी उर्फ प्रेम प्रकाश सिंह- विधायक समेत अन्य लोगों की हत्या करने वाले शूटर गैंग का मुख्य सरगना बताया गया था. साल 2018 में जेल में ही हत्या कर दी गई थी.
  • फिरदौस उर्फ जावेद- हत्याकांड में शूटर के रूप में आरोपित किया गया था. उसे भी बाद में एसटीएफ ने मुंबई में हुए एनकाउंटर में ढेर कर दिया था.
  • संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा- हत्याकांड के प्रमुख शूटरों में जीवा का नाम भी सामने आया था. वह आजीवन कारावास मामले में जेल में बंद था, जिसकी सात जून को कोर्ट परिसर में गोली मारकर हत्या कर दी गई.
  • राकेश पांडे- गोली चलाने वाले शूटरों में राकेश पांडे भी आरोपी था. उसे बरी कर दिया गया. आजकल वह प्रॉपर्टी डीलिंग के कारोबार से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है. 
  • रामू मल्लाह- कृष्णानंद राय हत्याकांड में शातिर शूटर के रूप में रामू मल्लाह को भी आरोपी बनाया गया था. इस मामले में बरी हो चुका है. मगर, अन्य केस में सजा काट रहा है.
  • विश्वास उर्फ नेपाली- लंबे अरसे से नेपाल में छुपा बताया जा रहा है.
  • जफर उर्फ चंदा- सीबीआई कोर्ट में मामला जाने से पहले ही जमानत पर बाहर आ गया था. आजकल छोटी-मोटी ठेकेदारी और प्रॉपर्टी के कारोबार से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है.
  • अफरोज खान- पहले ही आरोप मुक्त किया जा चुका है.

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