उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में आदमखोर भेड़ियों का खौफ अब भी बरकरार है. वन विभाग छठे संभावित अल्फा भेड़िए को पकड़ने के लिए पूरी कोशिश में लगा है. वहीं तहसील महसी अंतर्गत थाना खैरीघाट इलाके के राजापुर कला गांव में बीती 21 सितंबर की रात एक दुकान के बाहर तेंदुआ जैसा जानवर सीसीटीवी में कैद हुआ. जिसकी वजह से आसपास के गांवों में खौफ पैदा हो गया. ग्रामीण इस जानवर को तेंदुआ बता रहे हैं.
जिस जगह लगे सीसीटीवी कैमरे में जानवर कैद हुआ है, उस घर के मालिक दीपक सिंह ने बताया कि दो दिन पहले 21 सितंबर की रात 12 बजे के करीब वह जानवर आया था. घर के बाहर कुत्ते भौंक रहे थे तो उन्होंने ध्यान नहीं दिया और सो गए सुबह जब सीसीटीवी चेक किया तो उसमें एक जानवर दिखाई दिया. तुरंत ही उन्होंने इसकी सूचना वनकर्मियों और पुलिस को दी. पुलिस तो आई पर वन विभाग का कोई कर्मचारी नहीं आया. मंगलवार रात करीब 10 बजे डीएफओ साहब आए तो मुझसे मिले भी और कहा थोड़ा सावधानी से रहूं.
सीसीटीवी में कैद हुआ तेंदुआ
जिले के डीएफओ अजीत प्रताप सिंह ने फोन पर बताया कि एक माह पहले जब हम ऑपरेशन भेड़िया चला रहे थे उस दौरान उन्हें किसी ने फोन पर महसी नानपारा बॉर्डर पर तेंदुए के होने की सूचना दी थी. जिस पर उन्होंने सर्च कराया तो उनके थर्मल ड्रोन में तेंदुआ दिखाई पड़ा था जिसकी जानकारी उन्होंने इलाके के रेंजर और विधायक नानपारा को भी दी थी. इस पर उन्होंने जागरूकता अभियान भी चलाया.
दरअसल कतरनिया वाइल्ड लाइफ व दुधवा नेशनल पार्क में बढ़ रही बाघों की संख्या के चलते तेंदुए जंगल छोड़कर दक्षिण में नीचे की तरफ घाघरा की कछार में चले आते हैं. विशेष कर जब मादा तेंदुए को बच्चे को जन्म देना होता है तो वह सुरक्षा के लिहाज से जंगल छोड़ देती है.
तेंदुओं के रहने के लिए मुफीद है कछार इलाका
तेंदुए को फूड, वाटर, सेल्टर व कवर की जरूरत होती है, जो उसे महसी नानपारा के इस क्षेत्र में मिल जाता है. उसके भोजन के लिए सियार, कुत्ते, नीलगाय वा पालतू पशु इस इलाके में काफी हैं और बहराइच में पानी की कोई कमी नहीं है. नदी से लेकर बड़े-बड़े नालें हैं, साथ ही छुपने के लिए गन्ने के खेत भी मौजूद हैं.
डीएफओ अजीत प्रताप सिंह ने बताया कि सीसीटीवी के वीडियो को उन्होंने कई बार देखा. लेकिन इसमें साफ तौर पर स्पष्ट कुछ भी नहीं हो रहा है. लेकिन अधिक संभावना तेंदुए की है. इसके शरीर के धब्बे और हाइट को देखकर यह लगता है कि तेंदुआ है. उन्होंने बताया की उनके लिए अभी पहली प्राथमिकता में ऑपरेशन भेड़िया है क्योंकि अगर छठा भेड़िया पकड़ा नहीं गया तो वह किसी का बच्चा उठा सकता है.
भेड़िए के आतंक से खौफ में ग्रामीण
बता दें, बहराइच की महसी तहसील के लगभग 50 गांवों में बीते ढाई महीने से आदमखोर भेड़ियों ने आतंक मचा रखा है. इस इलाके के गांवों में भेड़िया खौफ का पर्याय बन चुका है. आदमखोर भेड़िए यहां पर नौ बच्चों समेत 10 लोगों और कई जानवरों की जान ले चुके हैं वहीं इनके हमले में 50 से अधिक लोग घायल भी हुए हैं. मौत का पर्याय बन चुके भेड़िए का कहर अभी थमा भी नहीं था कि अब तेंदुए की आहट ने लोगों में खौफ भर दिया है.