यूपी के बाराबंकी जिले में लखनऊ-गोरखपुर रेलखंड पर ट्रेन चालकों (लोको पायलट) द्वारा दो ट्रेनों को बीच रास्ते में छोड़ने का मामला चर्चा में बना हुआ है. इस बीच एक लोको पायलट का एक वीडियो सामने आया है, जिसमे यात्री उससे कह रहे हैं, यहां जंगल में गाड़ी क्यों खड़ी कर दिया? जिसके जवाब में लोको पायलट कह रहा है- "हमारा समय पूरा हो गया था. तबीयत भी ठीक नहीं है. कहीं आंख लग जाती तो कुछ भी हो सकता था." लोको पायलट और यात्रियों के बीच बहस का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
वहीं, इस मामले में रेलवे की तरफ से डीआरएम एनईआर (DRM NER) ने बयान दिया है. NER पीआरओ आलोक श्रीवास्तव ने कहा कि ड्राइवरों के ड्यूटी टाइम पूरा होने और अपने आप को अनफिट होने की जानकारी के बाद उन्होंने ट्रेन को स्टेशन पर छोड़ा था. रेल यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए ट्रेन चालकों को ये कदम उठाना पड़ा.
मालूम हो कि बुधवार को सहरसा (बिहार) से चलकर नई दिल्ली जा रही ट्रेन(संख्या 04021) लखनऊ-गोरखपुर रेलखंड के बुढ़वल रेलवे स्टेशन पर पहुंची थी. जहां लोको पायलट (ट्रेन ड्राइवर) ने ट्रेन खड़ी कर यह कहकर आगे जाने से मना कर दिया कि उनके ड्यूटी का टाइम पूरा हो चुका है.
ट्रेन छोड़कर ड्राइवर-गार्ड आराम करने चले गए
ड्राइवर और गार्ड के ट्रेन को प्लेटफ़ॉर्म पर छोड़ने से रेल अधिकारियों में हड़कंप मच गया. इस बीच काफी देर तक ट्रेन के रवाना न होने पर यात्री भड़क गए. स्टेशन अधीक्षक समेत तमाम अधिकारियों ने यात्रियों की समस्या पर फोन उठाना बंद कर दिया. जिसपर नाराज यात्रियों ने हंगामा करना शुरू कर दिया. ये देख मौके पर मौजूद आरपीएफ, जीआरपी, स्टेशन अधीक्षक समेत अन्य अफसरों के हाथ पांव फूल गए.
आनन-फानन में घटना की जानकारी लखनऊ कंट्रोल रूम को दी गई. जिसके बाद लखनऊ से दूसरे ड्राइवर और गार्ड को भेजा गया. तब जाकर बुढ़वल स्टेशन से ट्रेन नई दिल्ली रवाना हो सकी. ड्राइवर व गार्ड के ट्रेन छोड़ने पर यह ट्रेन करीब 3 घंटे 40 मिनट तक प्लेटफ़ॉर्म पर खड़ी रही.
दूसरी ट्रेन के ड्राइवर ने भी यही काम किया
इन सबके बीच बरौनी से चलकर लखनऊ जा रही एक्सप्रेस ट्रेन (संख्या 15203) के ड्राइवर ने भी यही कहानी दोहरा दी. यह ट्रेन शाम 4:04 बुढ़वल रेलवे स्टेशन पर पहुंची. तभी ट्रेन के ड्राइवर और गार्ड ने स्टेशन अधीक्षक को बताया कि उनकी 12 घंटे की ड्यूटी पूरी हो चुकी है और वह अब आगे ट्रेन को लेकर नहीं जा सकते हैं.
ऐसे में इस ट्रेन के लिए भी दूसरे ड्राइवर व गार्ड को लखनऊ से बुलाया गया. जिसके चलते ट्रेन घंटे भर से ज्यादा लेट हुई. यह 5:46 पर आगे के लिए रवाना हो सकी. शुरू में पूर्वोत्तर रेलवे के स्टेशन पर हुई इस घटना पर जिम्मेदार रेलवे के अधिकारी कोई भी जानकारी देने से बचते रहे.
अब रेलवे के अधिकारियों ने क्या सफाई दी?
घटना पर डीआरएम NER के पीआरओ आलोक श्रीवास्तव ने गुरुवार को बताया कि रेल यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए लोको पायलट ने ट्रेन आगे न ले जाने का फैसला लिया था. क्योंकि, लोको पायलटों के ड्यूटी आवर्स तय हैं. 10 घंटे बाद उनको दूसरे लोको पायलट और गार्ड रिलीव करते हैं.
साथ ही उनका ड्यूटी टाइम पूरा हो चुका था और वो अपने आप को अनफिट महसूस कर रहे थे. ट्रेन में मौजूद लोको पायलट, असिस्टेंट लोको पायलट ने नियम के तहत कैब से निकलकर स्टेशन मास्टर को रिपोर्ट किया था. बाद में इंजन के संचालन के लिए लखनऊ से दूसरे (क्रू मेंबर) लोको पायलट को बुलाया गया था.
वीडियो में ड्राइवर से यात्रियों की बहस होती दिखी
उधर, ट्रेन रोकने के बाद लोको पायलट का जो वीडियो सामने आया है उसमें कुछ यात्री उससे पूछ रहे है कि ट्रेन को जंगल में क्यों खड़ा कर दिया? इसे बाराबंकी स्टेशन तक तो ले जाओ. जिस पर लोको पायलट ने जवाब देते हुए कहा- रात 2 बजे से जगे हुए है. आंख बंद हो जाए या कोई हादसा हो जाए तो ये सही होगा क्या? दूसरा ड्राइवर आ गया है.