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आगरा: घर में राम मंदिर बनाने, हिंदू धर्म अपनाने की बात... हत्याकांड से पहले आरोपी बाप-बेटे ने ऐसा क्यों कहा?

लखनऊ हत्याकांड मामले में एक और खुलासा हुआ है. जिसके मुताबिक आगरा निवासी बाप-बेटे ने लखनऊ हत्याकांड से पहले एक बड़ा ऐलान किया था. दोनों ने परिवार सहित इस्लाम धर्म छोड़कर हिन्दू धर्म अपनाने की घोषणा की थी.

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 लखनऊ हत्याकांड में एक और खुलासा
लखनऊ हत्याकांड में एक और खुलासा

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अपने परिवार के 5 सदस्यों की हत्या मामले में पुलिस ने आरोपी बेटे मोहम्मद अरशद को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि पिता फरार है. जैसे-जैसे जांच बढ़ रही है, वैसे-वैसे मामले में कई खुलासे हो रहे हैं. इसी बीच एक और जानकारी निकलकर सामने आई है. जिसके मुताबिक आगरा निवासी बाप-बेटे ने लखनऊ हत्याकांड से पहले एक बड़ा ऐलान किया था. दोनों ने परिवार सहित इस्लाम धर्म छोड़कर हिन्दू धर्म अपनाने की घोषणा की थी. 

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साथ ही दोनों ने घर में राम मंदिर बनवाने का भी लिखित ऐलान किया था. इसके अलावा मौत के बाद अपनी प्रॉपर्टी हिन्दू ट्रस्ट को देने का निर्णय लिया था. आगरा के थाना ट्रांसयमुना स्थित इस्लाम नगर, टेढी बगिया निवासी मोहम्मद बदर उर्फ़ बदरुद्दीन अपने बेटे, 4 बेटियों के साथ रहता था. मोहम्मद बदर पुत्र नौशेर अली ने हत्या से 14 दिन पहले 18 दिसंबर दिन बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा था.

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पड़ोसियों को बताया था बदमाश किस्म का

पत्र की कॉपी जिलाधिकारी आगरा, पुलिस आयुक्त, पुलिस उपायुक्त नगर, सहायक पुलिस आयुक्त, छत्ता और थाना प्रभारी ट्रांसयमुना को भी सलंग्न की थी. पत्र में लिखा गया था कि मैं मोहम्मद बदर आगरा के थाना ट्रांसयमुना के इस्लाम नगर में मकान नंबर 183 में रहता हूं. हम मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति हैं. मेरे पड़ोसी और उनके रिश्तेदार बहुत ही झगड़ालू और बदमाश किस्म के हैं.

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मैं अपने मकान में एक छोटी से परचून की दुकान चला कर भरण पोषण कर रहा हूं. 16 दिसंबर शाम करीब 5 बजे पड़ोसियों ने षड्यंत्र रचकर अपने रिश्तेदारों के साथ मिलकर ऑटो से दुकान में टक्कर मरवा दी. जिससे मेरी छोटी लड़की आलिया उम्र 9 वर्ष के हाथ में चोट आ गई. घटना की शिकायत थाने में की थी. लेकिन शिकायत के बाद पुलिस ने हमला करने वाले पड़ोसियों से हमारा समझौता करा दिया.

18 दिसंबर सुबह 8 बजे सभी आरोपी एकत्र होकर हमारे घर आ गए और घर पर आकर ईंट पत्थर बरसाने लगे. साथ ही मेरी लड़की के साथ बदतमीजी भी करने लगे. विरोध करने पर हमारे साथ मारपीट और जान से मारने की धमकी भी देने लगे. इसके बाद हमने दो बार 112 पर कॉल किया. इस पर दो पीआरवी गाड़ियां मौके पर आई. लेकिन पुलिस ने हमला करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाही नहीं की. 

उल्टा पुलिस हमें ही डांट-फटकार कर चली गई. जिससे मैं और मेरा पूरा परिवार काफ़ी परेशान और दुखी हो गया है. पड़ोसी काफ़ी शातिर किस्म के लोग हैं और अवैध धंधा करते हैं.  साथ ही आए दिन लड़ाई झगड़ा भी करते रहते हैं. ऐसे में मेरा परिवार और सभी बच्चे हिंदू धर्म अपनाने को मजबूर हैं. हम मुस्लिम धर्म का त्याग करके हिंदू धर्म को ग्रहण करके अपने मकान में बनी दुकान में श्री राम का मंदिर बनाने की घोषणा करते हैं.

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यह कदम हमने खूब सोच समझकर अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए उठाया है. मैं अपने बच्चों को लेकर बाहर भटक रहा हूं. अगर मुझे या मेरे परिवार को कुछ हो जाता है तो इसकी जिम्मेदारी पड़ोसियों की होगी. मेरी सभी जायदाद हिन्दू मंदिर ट्रस्ट की हो जाएगी. मेरी प्रार्थना है कि थाना ट्रांसयमुना इंस्पेक्टर को आदेश दें कि मेरी रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी और उनके रिश्तेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें.

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पड़ोसियों ने परिवार पर किसी से नहीं बनाकर रखने का लगाया आरोप

मामले में पड़ोसी शौकद ने बताया कि मोहम्मद बदर का स्वाभाव ऐसा था कि बस्ती में किसी से बना कर नहीं रखता था. किसी की मैयत तक में नहीं जाता था. 14- 15 सालों से ये लोग यहां पर रह रहे थे. परिवार में चार लड़की, एक लड़का और माता-पिता थे. दो लड़की शादी लायक और दो लड़की छोटी थीं. लड़के की शादी हो गई थी. लेकिन उसने मारपीट कर बहू को घर से निकाल दिया था. हम रात को 12-12 बजे तक दुकान पर सौदा लेने जाते थे. इनके नाम और जाति पूरी बस्ती में किसी को नहीं पता थी.

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आरोपी अरशद के पडोसी मोहम्मद इस्लाम ने बताया कि अरशद हमारा पड़ोसी है. मोहल्ले में अरशद किसी से बना कर नहीं रखता था.  पड़ोसी बाबू मासूम खां ने कहा कि यहां से अरशद अजमेर की बात कहकर 8-10 दिन पहले गया था. अरशद फेरी लगाने का काम करता था. हो सकता है कि गरीबी की वजह से उसने हत्याकांड को अंजाम दिया है. 
 

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