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लखनऊ पुलिस ने परछाई देखकर सुलझा दिया डकैती का केस, आखिर कैसे हुआ ये कमाल, जानें पूरी कहानी

लखनऊ पुलिस ने डकैती के एक केस को मैथ्स के फॉर्मुला से सुलझाया. दरअसल, पुलिस के पास डकैती के इस मामले में सिर्फ एक ही सबूत था. वो था गाड़ी की परछाई. पुलिस ने कैसे इस केस को सुलझाया और 11 लोगों को गिरफ्तार किया. चलिए जानते हैं पूरी कहानी.

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सड़क के पानी पर दिखी गाड़ी की परछाई.
सड़क के पानी पर दिखी गाड़ी की परछाई.

लखनऊ पुलिस ने डकैती का केस कुछ इस तरह से सुलझाया की हर कोई हैरान रह गया. इस केस में पुलिस के पास सबूत के तौर पर था तो सिर्फ एक परछाई, और इस परछाई की बदौलत ही लखनऊ पुलिस ने इस केस की पूरी गुत्थी सुलझा ली. दरअसल, लखनऊ में बदमाशों ने डकैती करते हुए पूरी चालाकी दिखाई और हर वो तरकीब आजमाई जिससे वह पकड़ में ना आ पाएं. लेकिन उन्हें क्या पता था की एक परछाई उन्हें सलाखों के पीछे ले जाएगी.

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बता दें कि 7 सितंबर को बदमाशों के ग्रुप ने एक ठेकेदार के यहां डकैती की घटना को अंजाम दिया और 400 ग्राम चांदी और 2 लाख रुपये लूट लिये. इसके बाद पुलिस ने तलाशी अभियान शुरू किया. पुलिस ने 100 से ज्यादा फुटेज इकट्ठा किए. कई वीडियो में एक कार देखी गई, लेकिन लाइसेंस प्लेट नंबर दिखाई नहीं दे रहा था. पुलिस ने पानी में लाइसेंस प्लेट की परछाई देखी. जहां गाड़ी की नंबर प्लेट के अंतिम दो अंक “15” और “यूपी 32” ही दिखाई दे रहे थे. पूरा नंबर नहीं पता लग पा रहा था.

इसके बाद, एडीजी चिरंजीव नाथ सिन्हा ने अपने गणितीय कौशल का इस्तेमाल किया और आरटीओ से संपर्क किया. लखनऊ में पंजीकृत सभी वाहनों की सूची तैयार की गई. इनमें से उन वाहनों को चुना गया जिनके अंत में “15” था, और जो सफेद रंग के थे उनकी आगे जांच की गई. कुल 1,300 कारें सूचीबद्ध की गईं. सावधानीपूर्वक जांच के बाद आखिरकार कार का पूरा नंबर पहचान लिया गया.

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इस मामले की पूरी जानकारी देते हुए एडीसीपी वेस्ट चिरंजीव नाथ सिन्हा ने बताया, ''हम लोगों ने गणित का फॉर्मूला परम्यूटेशन कॉम्बिनेशन का इस्तेमाल किया. बिना इस फार्मूला के हम लोग अपराधियों को पकड़ ही नहीं सकते थे. क्योंकि सीसीटीवी कैमरे में गाड़ी का पूरा नंबर आ ही नहीं रहा था. जूम करने पर पिक्सल फट जा रहे थे. ऐसे में एक बहुत ही बारीक सुराग हाथ लगा. जिसमें जो गाड़ी डकैती में चांदी लेकर भागने में इस्तेमाल की गई थी, वह एक जगह कच्ची सड़क पर गुजरते वक्त कुछ सेकंड के लिए खड़ी दिखाई पड़ी. लेकिन उस जगह जो सीसीटीवी कैमरा लगा था वह सिर्फ गाड़ी के आगे वाले हिस्से को कवर कर रहा था.''

1300 गाड़ियों में लिखा था 15 नंबर

उन्होंने आगे बताया, ''उसी वक्त हमारी नजर कच्ची सड़क पर पड़े हुए पानी पर पड़ी जिसकी परछाई में चार पहिया गाड़ी की नंबर प्लेट नजर आ रही थी. ध्यान से देखने पर गाड़ी की शुरुआत में UP 32 लिखा दिखा. उसके बाद के दो अल्फाबेट्स नहीं दिखाई पड़े और इसके अलावा दो डिजिट नंबर जोकि 15 था, वह दिखाई पड़ा. जिसके बाद हमने मैथ्स का फॉर्मूला परम्यूटेशन एंड कॉम्बिनेशन का प्रयोग करके आरटीओ कार्यालय से संपर्क साधा. लखनऊ में जितने भी चार पहिया वाहन के आखिरी नंबर 15 से थे, उसकी डिटेल निकलवाई. 1300 गाड़ियां ऐसी थीं, जिनके आखिरी में 15 नंबर था.

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ऐसे मिली पुलिस को कामयाबी

पुलिस ने फिर वैगन आर कार की लिस्ट अलग की, जिनके नंबर प्लेट में 15 आता था. फिर उनमें से व्हाइट वैगन आर को अलग किया. उसके बाद कमर्शियल वैगन आर को सर्च किया. क्योंकि डकैती में इस्तेमाल की गई कार कमर्शियल थी. इस तरह पुलिस को आखिरकार कामयाबी मिल ही गई. डकैत में इस्तेमाल गाड़ी का नंबर UP 32 Kn 4115 था. पचा चला कि कार चला रहा शख्स ओला के लिए काम करता था. लूट के बाद ड्राइवर ऋषिकांत ने कार मालिक से कहा था कि अब वो काम नहीं करेगा. लेकिन जब पुलिस ने उसे पकड़ा तो पूरी कहानी साफ हो गई. इस केस में 11 लोग गिरफ्तार किए गए हैं. मामले में कार्रवाई जारी है.

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