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'मम्मी... आज के बाद नहीं मिलेंगे', लखनऊ में रिटायर्ड जज के रसोइये ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, परिजनों ने लगाया ये आरोप

Lucknow News: मरने से पहले महेश निषाद ने एक वीडियो बनाया था, जिसमें उसने अपनी मां से कहा था- 'मम्मी जी, आज के बाद आपसे नहीं मिलेंगे, क्योंकि सुसाइड करने जा रहे हैं.'

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लखनऊ: मृतक महेश और रोते-बिलखते परिजन
लखनऊ: मृतक महेश और रोते-बिलखते परिजन

लखनऊ में एक रिटायर्ड जज के घर में काम करने वाले महेश निषाद नाम के शख्स ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. महेश की मौत के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है. मरने से पहले महेश ने एक वीडियो बनाया था, जिसमें उसने अपनी मां से कहा था- 'मम्मी जी, आज के बाद आपसे नहीं मिलेंगे, क्योंकि सुसाइड करने जा रहे हैं.'

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महेश निषाद अपने घर का इकलौता कमाने वाला बेटा था. उसके पिता दिव्यांग हैं. पूरा घर उसी की कमाई पर चलता था. महज ₹12,500 महीने की सैलरी पर वह काम करता था, लेकिन बीते दिनों उस पर 6 लाख की चोरी का आरोप लगा था. इसके चलते वो काफी परेशान रहने लगा था.  

मृतक महेश की पत्नी कविता का आरोप है कि जज के घर हुई चोरी के बाद महेश को जबरन दोषी ठहरा दिया गया. उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया. कविता के मुताबिक, पति पिछले चार सालों से रिटायर्ड जज के घर में रसोइये का काम कर रहे थे. हाल ही में जज के घर में करीब 6 लाख रुपये की चोरी हुई थी, जिसका आरोप महेश पर लगाया दिया गया था. 

कविता ने सवाल पूछा कि क्या सिर्फ महेश ही वहां काम कर रहे थे? बाकी किसी पर शक क्यों नहीं किया गया? बाकी लोगों को क्यों नहीं परेशान किया गया. कविता का दावा है कि पिछले 15 दिनों से महेश को मानसिक रूप से टॉर्चर किया जा रहा था. 17 मार्च को रिटायर्ड जज की पत्नी ने उन्हें अपने घर बुलाया. पूछताछ के दौरान महेश को पीटा गया और फिर पुलिस थाने ले जाया गया. 

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कविता ने बताया कि जब रात तक पति घर नहीं लौटे, तो उन्होंने जज की पत्नी से पूछा कि महेश कहां हैं? इसके जवाब में उन्होंने कहा- हमें नहीं पता, जब खबर मिलेगी तब बता देंगे. इसके बाद कविता को अपने घर के जेवर और बैंक अकाउंट से पैसे निकालकर देने पड़े, तब जाकर महेश को छोड़ा गया. लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ. महेश पर दबाव बनाया गया कि वह 1.5 लाख रुपये का और इंतजाम करे. इतना मानसिक तनाव सहने के बाद, महेश ने अपने ही घर में फांसी लगा ली. 

उधर, महेश की बहन का आरोप है कि जब तक पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार नहीं हुआ, तब तक पुलिस ने पूरा साथ दिया, लेकिन उसके बाद अपना रुख बदल लिया. उनका कहना है कि अगर इस मामले में न्याय नहीं मिला, तो साबित हो जाएगा कि पैसे वालों के लिए ही कानून है, गरीबों के लिए नहीं. 

वहीं, महेश के 17 साल की बेटी और 13 साल के बेटे ने सिर्फ एक ही मांग की है कि उन्हें इंसाफ मिलना चाहिए. मृतक के बेटे ने रोते हुए कहा- मुझे मेरा पापा वापस चाहिए. फिलहाल, मामला चर्चा में आ गया है. पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहा है. 

रिपोर्ट- अंकित मिश्रा
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