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दरियाई घोड़े के हमले में हुई मौत... चिड़ियाघर प्रशासन ने दी 50 हजार की मदद, परिजन बोले नौकरी भी मिले

कानपुर चिड़ियाघर से 4 दिसंबर को हिप्पो इंदिरा को लखनऊ लाया गया था. मामले को लेकर मृतक के परिजनों ने आइसोलेशन अवधि पूरी होने से पहले ही दरियाई घोड़े के बारे में सूरज को भेजे जाने पर सवाल उठाए हैं. उधर, चिड़ियाघर प्रशासन की ओर से मृतक के परिजनों को 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद की गई है.

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मादा हिप्पो इंदिरा को लखनऊ चिड़ियाघर में आइसोलेशन में रखा गया था.
मादा हिप्पो इंदिरा को लखनऊ चिड़ियाघर में आइसोलेशन में रखा गया था.

लखनऊ से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. यहां एक दरियाई घोड़े ने सूरज नाम के एक शख्स को अपने जबड़े में दबोचकर पटक दिया. वहीं, उसके एक अन्य साथी राजू को भी घायल कर दिया. हमले के दौरान सूरज मदद के लिए चिल्लाया, तो नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान में काम करने वाले साथी उसे बचाने के लिए दौड़े. 

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किसी तरह से उनको वहां से निकाला गया और आनन-फानन में सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया. मगर, इलाज शुरू होने से पहले ही सूरज की मौत हो गई. वहीं, हिप्पो के हमले में घायल राजू का इलाज किया गया. 

बाड़े की सफाई के लिए गया था सूरज  

बताते चलें कि चिड़ियाघर सोमवार को बंद रहता है. इस दौरान जानवरों के बाड़ों की सफाई की जाती है. सूरज भी राजू के साथ इसी काम के लिए सुबह करीब 10:30 बजे मादा हिप्पो इंदिरा के बाड़े में पहुंचा था. इस दौरान हिप्पो को हांककर क्लोजर की तरफ भेज दिया था. इसके बाद दोनों मिलकर बाड़े की सफाई करने लगे. तभी अचानक पानी से बाहर निकले हिप्पो ने हमला कर दिया. 

अपने जबड़े में सूरज का पेट दबोच लिया और इसके बाद उसे पटक दिया. सूरज मदद के लिए शोर मचाते हुए भागा और दीवार से टकराकर गिर गया. इसके बाद रेलिंग से लटक कर खुद को बचाने की कोशिश करने लगा. शोर सुनकर वहां मौजूद कर्मचारी इंदिरा के बाड़े पहुंच गए. उन्होंने सूरज को खींचकर बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया. मगर, इलाज मिलने से पहले ही उसकी मौत हो गई. 

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सूरज के घर पर पसरा मातम  

सूरज की मौत से घर में मातम पसरा है. परिवार में वही इकलौता कमाने वाला था. लखनऊ के ठाकुरगंज स्थित कैंपवेल रोड के बरौरा का रहने वाला सूरज करीब 12 साल से चिड़ियाघर में सफाई कर्मचारी के तौर पर काम कर रहा था. उसे 5,500 रुपये वेतन मिलता था. परिवार में पत्नी लता के साथ दो बच्चे हैं. चिड़ियाघर प्रशासन की तरफ से मिली 50 हजार रुपये की मदद के बाद परिवार और ज्यादा आर्थिक मदद और नौकरी की मांग कर रहा है. फिलहाल, पत्नी कुछ भी बोल पाने की हालत में नहीं है. 

परिजनों ने उठाए ये सवाल 

हिप्पो इंदिरा को 4 दिसंबर को कानपुर चिड़ियाघर से लखनऊ लाया गया था. नियमानुसार, उसे 15 दिन तक आइसोलेशन में रखा जाना चाहिए था. इस दौरान गतिविधियों पर जू के डॉक्टर और हेडकीपर को नजर रखनी होती है. हादसे के बाद सूरज के परिजनों में आइसोलेशन का समय पूरा होने से पहले ही कर्मचारियों को सफाई के लिए बाड़े में भेजने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. 

यह सवाल भी उठ रहा है कि जिस डॉक्टर और हेडकीपर पर निगरानी की जिम्मेदारी थी, हादसे के समय वो कहां थे? सफाई के दौरान हिप्पो को क्लोजर में बंद करने की बात कही जा रही है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर दरियाई घोड़ा क्लोजर बंद था, तो वह बाहर कैसे आया?

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कर्मचारियों को देंगे ट्रेनिंग- जू निदेशक

मामले की पड़ताल करने के बाद आजतक की टीम ने नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान की निदेशक अदिति शर्मा से बात की. उन्होंने बताया कि सूरज हिप्पो के क्लोजर में चला गया था, जो गलत था. इसी वजह से उस पर अटैक हुआ. उन्होंने कहा कि हम सोमवार से नए सिरे से कर्मचारियों की ट्रेनिंग शुरू कर रहे हैं. मृतक सूरज के परिवार को 50 हजार रुपये की मदद की गई है. इसके अलावा मदद के रूप में और जो भी हमसे बनेगा, वह किया जाएगा. 

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