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महाकुंभ में स्नान करने नेपाल से आए चंदेश्वर, भगदड़ में बिछड़े, प्रयागराज खोजने पहुंचे बेटे

महाकुंभ प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन हुई भगदड़ में नेपाल के चंदेश्वर भी बिछड़ गए हैं. कई दिनों बाद भी उनका पता नहीं चल सका है. वहीं, अब उनका बड़ा बेटा अपने छोटे भाई के साथ उन्हें ढूंढने प्रयागराज पहुंच गया है.

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महाकुंभ में नेपाल से स्नान के लिए आए चंदेश्वर भगदड़ में हुए गुम
महाकुंभ में नेपाल से स्नान के लिए आए चंदेश्वर भगदड़ में हुए गुम

प्रयागराज महाकुंभ में मौनी अमावस्या स्नान पर्व  पर स्नान करने पूरे भारत से लोग आए थे. इस मौके पर पड़ोसी राज्य नेपाल सहित अन्य देशों से भी लोग पहुंचे थे. इन्हीं में नेपाल से आया एक समूह भी शामिल था. इसी समूह में 67 वर्षीय चंदेश्वर ठाकुर भी शामिल थे. चंदेश्वर जिस समूह के साथ आए थे ,.उस समूह के तीन लोग लापता थे. जिसमें से 2 तो मिल गए लेकिन वे नहीं मिले, अब चिंता की लकीरों के साथ उनका बेटा अविनाश और छोटे भाई के साथ प्रयागराज पहुंचा है और उनकी तलाश कर रहा है.

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अविनाश ठाकुर ने बताया कि पिता चंदेश्वर ठाकुर काफी धार्मिक प्रवृत्ति के आदमी हैं. लिहाजा वो संगम में लगे महाकुंभ में आकर अमृत स्नान करने प्रयागराज पहुंचे थे. लेकिन जहां पर भगदड़ हुई थी, वहां पर नहीं गए और कहीं दूसरी जगह स्नान किया था. लेकिन भारी भीड़ की वजह से अपने समूह से छूट  गए. अविनाश ठाकुर के मुताबिक वह जिनके साथ आए थे उन्होंने मुझे बताया कि हम लोगों ने उनको बहुत ढूंढा लेकिन वह नहीं मिले. तब हम लोग यहां से नेपाल वापस चले आए.

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पिता को खोजने में पुलिस की ले रहे हैं मदद

जब अविनाश ठाकुर को फोन गया. तो वह चिंता के साथ अपने छोटे भाई को लेकर प्रयागराज संगम पहुंचकर अपने पिता की तलाश शुरू कर दिए हैं. अविनाश के मुताबिक उनके पिता बहुत बहादुर थे और वह उन्हें हमेशा समझाते थे किसी भी चीज का हल रोना नहीं है, उसका बहादुरी से सामना करना चाहिए. यही नहीं अविनाश यह भी कहते हैं मेरा छोटा भाई आया है लेकिन मैं उसे डेड बॉडी और मृतकों की लगी फोटो दिखाने नहीं ले जाता हूं. मैं उसके सामने रोता भी नहीं, अगर मैं रो दूंगा तो वह कमजोर हो जाएगा. मेरा छोटा भाई मेरे बेटे की तरह है.

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अविनाश के मुताबिक उसने सबसे पहले सभी हॉस्पिटल में जाकर घायलों को देखा. उसके बाद हादसे के शिकार हुए मेडिकल कॉलेज में लगी उनकी तस्वीरों को भी देखा, लेकिन अच्छी बात ये रही की रखी गई डेड बॉडी और जारी की गई मृत्यु की तस्वीर में उनके पिता  शामिल नहीं  हैं. फिलहाल अविनाश अभी भी अपने पिता की तलाश कर रहे हैं, यही नहीं अपने पिता की तलाश में खोया पाया केंद्र से लेकर मेला प्रशासन कार्यालय और पुलिस की भी मदद ले रहे हैं.

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