मौनी अमावस्या के स्नान से पहले महाकुंभ में मची भगदड़ ने कई श्रद्धालुओं को जिंदगी भर का गम दे दिया. अभी भी कई लोग ऐसे हैं जिन्हें अपने परिजनों का कोई अता-पता नहीं है. वे उनकी तलाश में इस अस्पताल से उस अस्पताल चक्कर काट रहे हैं. इस बीच प्रयागराज मेडिकल कॉलेज के बाहर खड़े मृतकों/घायलों/लापता श्रद्धालुओं के परिजनों ने 'आजतक' से बातचीत में अपनी दर्दभरी कहानी बयां की है. महाकुंभ हादसे में किसी की मां खो गई तो किसी के चाचा-चाची. आइए जानते ने पीड़ितों ने क्या-कुछ कहा...
आपको बता दें कि प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन हुए हादसे में एक तरफ जहां 30 लोगों की मौत हो गई वहीं दूसरी तरफ कई ऐसे भी लोग हैं जो हादसे के बाद से ही लापता हैं. अपनों की तलाश में परिजन अस्पताल दर अस्पताल भटक रहे हैं. आलम यह है प्रयागराज शहर और मेला क्षेत्र में ट्रैफिक कंट्रोल किए जाने के बाद से इन परिजनों को 15 से 20 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ रहा है.
अपनों की तलाश में प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज पहुंचे बिहार के सासाराम के रहने वाले द्वारिका सिंह ने बताया कि वह पत्नी, साला और दो सरहज के साथ मौनी अमावस्या का स्नान करने के लिए कुंभ पहुंचे थे. आधी रात के बाद अचानक भगदड़ हुई और उनकी पत्नी सहित सभी लोग में बिछड़ गए. द्वारिका सिंह ने भगदड़ की कहानी तो बताई ही साथ ही यह भी बताया कि अपनों की तलाश में वह किस तरह अस्पताल दर अस्पताल भटक रहे हैं.
वहीं, रोहतास (बिहार) के रहने वाले दीपक कुमार की मां भी स्नान करने आई थीं, जो मेले में गुम हो गई हैं. अभी तक उनका कोई अता-पता नहीं चला है. उधर, दीपक मोबाइल में अपनी मां की फोटो दिखाकर दर-दर भटक रहे हैं और उनकी तलाश कर रहे हैं.
बिहार के रहने वाले मनोज कुमार के भैया-भाभी भी मौनी अमावस्या के दिन कुंभ स्नान के लिए आए थे और अभी तक घर नहीं लौटे हैं. उनकी तलाश में मनोज कुमार प्रयागराज पहुंचे हैं और मेला क्षेत्र से लेकर अस्पताल तक ढूंढ रहे हैं.
बिहार के ही अरवल के रहने वाले राहुल के चाचा भी मेले में खो गए हैं, जिनकी तलाश में राहुल प्रयागराज के अस्पतालों और मेला क्षेत्र में भटक रहे हैं. इसी तरह सीतामढ़ी के रहने वाले आदित्य रंजन सिंह के चाचा-चाची स्नान के दौरान हुई भगदड़ में खो गए, जिनकी तलाश में आदित्य जुटे हुए हैं. उन्होंने बताया कि वह 15 से 20 किलोमीटर पैदल चल चुके हैं, मगर खोजने में सफलता नहीं मिली.