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ना बुलेट प्रूफ जैकेट, ना जूते... क्या थी मंगेश यादव एनकाउंटर में 'ओवर कॉन्फिडेंस' की वजह? UP STF के सामने ये हैं बड़े सवाल

Mangesh Yadav STF Encounter: यूपी एसटीएफ की तरफ से दर्ज FIR के मुताबिक, मंगेश यादव के पास से अमेरिकन टूरिस्टर बैग, 3 ब्रांडेड टी-शर्ट, और दो ब्रांडेड पैंट मिली थी.  लेकिन मंगेश के घर के हालात तो उसकी बदहाली को बयां कर रहे हैं. ऐसे में इतने महंगे कपड़े उसके पास कहां से आए?

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मंगेश यादव का एनकाउंटर करने वाली टीम
मंगेश यादव का एनकाउंटर करने वाली टीम

यूपी के सुल्तानपुर में एक लाख के इनामी मंगेश यादव के एनकाउंटर पर सवाल खड़े हो रहे हैं. सवाल राजनीतिक दलों के साथ-साथ मंगेश यादव के परिवार की तरफ से खड़े किए जा रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ कुछ तथ्य ऐसे हैं जिनको इस एनकाउंटर में नजरंदाज नहीं किया जा सकता. आइए जानते हैं इस केस की इनसाइड स्टोरी...  

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मंगेश यादव एनकाउंटर पर सबसे पहले सवाल यूपी एसटीएफ की 11 सदस्य टीम पर है जिसमें एक डिप्टी एसपी डीके शाही, दो इंस्पेक्टर राघवेंद्र सिंह और महावीर सिंह, दो सब इंस्पेक्टर अतुल चतुर्वेदी और प्रदीप सिंह, 3 हेड कांस्टेबल सुशील सिंह, राम निवास शुक्ला व नीरज पांडे और 3 कांस्टेबल अमित त्रिपाठी, ब्रजेश बहादुर सिंह, अमर श्रीवास्तव मुख्य तौर पर शामिल थे.  

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मंगेश यादव एनकाउंटर में डिप्टी एसपी डीके शाही की तरफ से दर्ज कराई गई एफआईआर की शुरुआती कुछ लाइन पढ़िए. इसके मुताबिक, मंगेश को बेहद खतरनाक अपराधी मानते हुए यूपी एसटीएफ की टीम बहुत एहतियात बरती है, ट्रेनिंग के दौरान जो भी सिखाया गया उन सभी नियमों का पालन करती है, बुलेट प्रूफ जैकेट पहनती है, हथियार लेती है और फिर बाइक से आ रहे एक लाख के इनामी लुटेरे मंगेश यादव को एनकाउंटर में मार गिराती है. 

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एनकाउंटर साइट पर चप्पल में नजर आई पुलिस

अब जरा एनकाउंटर के घटनास्थल की तस्वीरों को देखिए जिसमें एसटीएफ की टीम को लीड करने वाले डिप्टी एसपी डीके शाही और उनके तीन खास साथी चप्पल में नजर आते हैं. सबसे पहले डीके शाही चप्पल पहने खड़े हैं, उनके बगल में हेड कांस्टेबल (पिंक टीशर्ट में) राम निवास शुक्ला और फिर जौनपुर एसओजी से एसटीएफ में आए हेड कांस्टेबल सुशील सिंह और नीरज पांडे खड़े हैं. 

पुलिसवालों ने बुलेट प्रूफ जैकेट क्यों नहीं पहनी? 

अब एसटीएफ की एफआईआर में एक और लाइन बहुत महत्वपूर्ण है.. जिसमें लिखा है मंगेश जैसे लुटेरे को पकड़ने के लिए एसटीएफ की टीम बुलेट प्रूफ जैकेट पहनती है. एफआईआर में एसटीएफ टीम बुलेट प्रूफ जैकेट तो पहनती है लेकिन मैदान में बुलेट प्रूफ जैकेट का नामो निशान गायब हो जाता है. एनकाउंटर करने वाली 11 सदस्य टीम में किसी के ना हाथ में, ना शरीर पर बुलेट प्रूफ जैकेट दिखी. तो क्या यूपी एसटीएफ बिकरु कांड में हुई लापरवाही को भूल गई या फिर इस एनकाउंटर में बदमाश की तरफ से गोली ना चलने का पहले से ही भरोसा था?

अब बात मंगेश यादव पर दर्ज मुकदमों की करते हैं. मंगेश यादव पर सुल्तानपुर लूट कांड समेत 8 मुकदमे दर्ज थे. सभी मुकदमे वाहन चोरी और लूट के थे और इसमें एक मुकदमा गैंगस्टर एक्ट का था. मंगेश को पुलिस ने दो बार गिरफ्तार किया. एक बार सुल्तानपुर से और एक बार जौनपुर से, लेकिन मंगेश ने कभी किसी वारदात को अंजाम देने के लिए ना कभी गोली चलाई ना किसी को चाकू मारा और ना ही पुलिस ने गिरफ्तारी के वक्त उसके पास कभी कोई असलहा बरामद किया. लेकिन एनकाउंटर करते वक्त पुलिस/STF दावा करती है कि मंगेश यादव के पास एक नहीं दो असलहे थे. एक 7.65 एमएम की पिस्टल और एक 315 का देसी कट्टा. 

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पुलिस के अनुसार, मंगेश ने 28 अगस्त को दिन में 12:15 पर सुल्तानपुर शहर कोतवाली में भरत ज्वैलर्स के यहां करोड़ों की लूट की लेकिन मंगेश की बहन कहती है कि 28 अगस्त को तो उसका भाई उसके साथ स्कूल की फीस जमा करने गया था. वह उसके साथ सुबह 10:00 बजे से 2:00 बजे तक था. 

इतना ही नहीं बहन यह भी दावा करती है कि जिस मंगेश यादव को एसटीएफ ने 5 सितंबर के सुबह 3:15 बजे सुल्तानपुर में एनकाउंटर में मार गिराया उसे 2 दिन पहले 2 सितंबर की रात 2:30 बजे घर से उठाकर ले गई थी. 

मंगेश पर जौनपुर में दर्ज हुआ ये केस अहम 

मंगेश यादव पर दर्ज 9 मुकदमों की फेहरिस्त में आठवें नंबर का मुकदमा जौनपुर की शहर कोतवाली का बहुत अहम हो जाता है. क्राइम नंबर 348/2024 पर 303 (2) बीएनएस की धारा में दर्ज हुआ यह मुकदमा एक और नई कहानी बताता है. 

इसके मुताबिक, जौनपुर शहर कोतवाली में इलाके में रहने वाले मोहम्मद नसीम अपनी मां को देखने जिले के निजी अस्पताल गए, जहां उनकी हीरो होंडा स्प्लेंडर बाइक Up 44 AK 6740 चोरी हो गई. बाइक चोरी हुई 20 अगस्त को दिन में 2:00 बजे, यानि सुल्तानपुर में सर्राफा कारोबारी के यहां हुई डकैती से ठीक 8 दिन पहले. लेकिन इस बाइक चोरी की एफआईआर हुई, 8 दिन बाद और सुल्तानपुर डकैती के 8 घंटे बाद, 28 अगस्त रात 8.11pm पर. 

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एसटीएफ की तरफ से दर्ज FIR में मंगेश यादव के पास से अमेरिकन टूरिस्टर बैग, 3 ब्रांडेड टी-शर्ट, और दो ब्रांडेड पैंट मिली थी. लेकिन मंगेश के घर के हालात तो उसकी बदहाली को बयां कर रहे हैं. ऐसे में इतने महंगे ब्रांड के कपड़े उसके पास कहां से आए?

सवाल उठता है कि क्या कानपुर के बिकरु कांड की शहादत से भी यूपी एसटीएफ ने सबक नहीं लिया? कागजों में बुलेट प्रूफ जैकेट पहनने का दावा कर असल में जींस टी-शर्ट और चप्पल में ही मंगेश यादव का एनकाउंटर करने क्यों निकल पड़ी? आखिर पुलिस/एसटीएफ के इस ओवर कॉन्फिडेंस की वजह क्या थी? क्या पुलिस को पहले से मालूम था कि उसका टारगेट मंगेश यादव पुलिस पर गोली चलाने के लायक नहीं है? या फिर मामला कुछ और है? 

मंगेश यादव ने जब 28 अगस्त को दिनदहाड़े लूट जैसी वारदात को अंजाम दिया, उसके तीन साथी एनकाउंटर के बाद दबोचे जा चुके थे, गैंग के लीडर विपिन सिंह ने सरेंडर कर दिया था, इतना ही नहीं उस पर ₹1 लाख का इनाम हो चुका था तो फिर वह क्यों सुल्तानपुर वापस गया, जहां पुलिस और एसटीएफ उसकी तलाश कर रही थी और बाद में वहीं उसका एनकाउंटर कर दिया गया.  

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मंगेश यादव पर दर्ज आठ मुकदमों की फेहरिस्त में कहीं पर भी असलहे के प्रयोग का या बरामदगी का कोई जिक्र नहीं आया, यानी मंगेश हथियार नहीं रखता था. तो फिर उस रात मंगेश के पास एक पिस्टल और एक देसी कट्टा कहां से आया?

मंगेश यादव की बहन का दावा 

मंगेश की बहन ने दावा किया कि उसका भाई तो 28 अगस्त के दिन उसकी फीस जमा करने के लिए उसके साथ दिनभर स्कूल में था तो फिर वह लूट कैसे करता सकता है. अब बहन के इस दावे की सच्चाई क्या है और वो एसटीएफ के दावे से मैच क्यों नहीं कर रही. 

मंगेश की बहन

मंगेश यादव की बहन एनकाउंटर पर सवाल खड़े करते हुए दावा करती है कि 2 सितंबर की भोर में एसटीएफ की टीम मंगेश को घर से उठा ले गई थी और 5 सितंबर की भोर 3.15am में उसका एनकाउंटर कर दिया. 

जौनपुर के अगरौरा गांव में स्थित मंगेश यादव के घर की माली हालत ऐसी है कि घर में साइकिल तक नहीं थी. जबकि पुलिस उसके पास से ब्रांडेड कंपनी का बैग, कपड़े और कीमती पिस्तौल की बरामदगी दिखाती है. 

मंगेश पर जौनपुर में दर्ज 28 अगस्त के उस बाइक चोरी के मुकदमे का क्या कनेक्शन है? आखिर 20 अगस्त को जौनपुर में हुई बाइक चोरी का मुकदमा 28 अगस्त की रात 8:00 बजे सुल्तानपुर में डकैती के बाद क्यों लिखा गया? क्या यह कोई साजिश थी? या फिर पुलिस को किसी मिले सुराग का हिस्सा.

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मंगेश यादव के घर में पिता राकेश यादव गुजरात में ट्रक ड्राइवर है. घर में सिर्फ एक छोटी बहन जो दसवीं की पढ़ाई कर रही है और बुजुर्ग मां है. कहीं ऐसा तो नहीं की मंगेश की चोरी की घटनाओं को देखते हुए पुलिस टीम को एनकाउंटर का आसान शिकार मिला और उसने सुल्तानपुर लूट कांड में सरकार के दबाव को कम करने के लिए मंगेश को मार गिराया. 

पुलिस ने बताई ये कहानी 

पुलिस ने दावा किया कि 28 अगस्त को हुई सुल्तानपुर डकैती कांड में 14 बदमाश शामिल थे, जो तीन टीमों में थे. पुष्पेंद्र सिंह, त्रिभुवन और सचिन सिंह लूट के बाद बदमाशों और लूटे गए माल को रायबरेली ले जाने के लिए बोलेरो के इंतजाम के साथ खड़े थे. 

दूसरी टीम में शामिल विपिन सिंह, विनय शुक्ला, अजय यादव, अरविंद यादव, विवेक सिंह और दुर्गेश प्रताप सिंह बाजार की रेकी और बैकअप प्लान में शामिल थे. 

पुलिस ने दावा किया कि दुकान के अंदर जो पांच बदमाश गए थे उनमें फुरकान, अनुज प्रताप सिंह, अरबाज मंगेश यादव और अंकित यादव शामिल थे. यह अलग बात है कि ज्वैलर भरत सोनी (जिनके यहां डकैती हुई) पकड़े गए बदमाश हों या मारे गए मंगेश, किसी को नहीं पहचान पा रहे. 

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पुलिस ने तीन बदमाशों पुष्पेंद्र सिंह, त्रिभुवन कोरी और सचिन सिंह को वारदात के दो दिन बाद 1 सितंबर को एनकाउंटर में घायल कर गिरफ्तार किया था. वहीं, दूसरी तरफ इस पूरे गैंग में सबसे खतरनाक और शातिर अपराधी विपिन सिंह ने 4 सितंबर को रायबरेली में दर्ज पुराने मुकदमे में सरेंडर कर दिया. जबकि, 5वां आरोपी मंगेश यादव एनकाउंटर में मारा गया. 

अब बाकी बचे 9 बदमाशों फुरकान, अनुज प्रताप सिंह, अरबाज, विनय शुक्ला, अंकित यादव, अजय यादव, अरविंद यादव, विवेक सिंह, दुर्गेश प्रताप सिंह समेत 9 लोगों पर एक-एक लाख का इनाम घोषित है. 

डीजीपी ने दी सफाई 

हालांकि, मंगेश यादव के एनकाउंटर पर उठ रहे सवालों पर उत्तर प्रदेश के डीजीपी ने खंडन किया है और कहा है कि जो लोग फील्ड में ऐसी स्थिति का सामना करते हैं वह सच्चाई जानते हैं. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस पर लगाए जा रहे हैं आरोपों का मैं खंडन करता हूं.  

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