नोएडा में पोर्न साइट्स के लिए कंटेंट अपलोड करने वाले गिरोह से पूछताछ में कई बड़े खुलासे हो रहे हैं. जांच एजेंसियों को एक के बाद नई चौंकाने वाली चीजें पता चल रही हैं. बताया जा रहा है कि कंपनी के डॉयरेक्टर उज्जवल किशोर और नीलू श्रीवास्तव के मोबाइल व व्हाट्एप चैटिंग से कई चीजों का पता चला है. इतना ही नहीं लाइव कैम पर अश्लील कंटेंट अपलोड करने से जो कमाई होती थी उस रकम का 75% हिस्सा दोनों खुद रखते थे और 25% मॉडल्स को दिया जाता था.
तीन कैटेगरी में बांटी गईं थी मॉडल्स
बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर मॉडल्स की भर्ती की जाती थी. ग्लैमरस लाइफस्टाइल और हाई पेमेंट के नाम पर लड़कियों को फंसाया जाता था. शुरुआत में मॉडल्स से नॉर्मल फोटोशूट कराया जाता था, फिर धीरे-धीरे उन्हें बोल्ड कंटेंट के लिए मजबूर किया जाता था. सूत्रों के मुताबिक यहां मॉडल्स को तीन कैटेगरी में बांटा गया था. A कैटेगरी की मॉडल्स, B और C कैटेगरी की मॉडल्स. A-कैटेगरी में हाई-प्रोफाइल और पॉपुलर मॉडल्स को रखा गया था. ये मॉडल्स लाइव स्ट्रिपिंग और एक्सक्लूसिव कंटेंट के लिए मोटी रकम वसूलती थीं. B-कैटेगरी में मिड-लेवल मॉडल्स, जो सीमित एक्सक्लूसिव कंटेंट बनाती थीं और उनकी कमाई औसत थी. जबकि C-कैटेगरी में नई मॉडल्स या वे जो कम पॉपुलर थीं. इन्हें कम भुगतान किया जाता था और ये ज्यादातर सामान्य अश्लील कंटेंट में काम करती थीं.
सबडिगी वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड से खुलासा
बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय ने 28 मार्च 2025 को नोएडा स्थित सबडिगी वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड पर छापा मारा था. यह कार्रवाई FEMA के तहत हुई थी. जांच में पता चला था कि कंपनी के डायरेक्टर उज्जवल किशोर और नीलू श्रीवास्तव अपने घर से ही एडल्ट वेबकैम स्टूडियो चला रहे थे. यह कपल साइप्रस स्थित एक कंपनी के लिए काम कर रहा था, जो Xhamster और Stripchat जैसी पोर्न साइट्स चलाती है. यहां सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर मॉडल्स की भर्ती की जाती थी, जो लाइव कैम पर अश्लील कंटेंट अपलोड करती थीं.
बैंक में भी गलत जानकारी
इतना ही नहीं दोनों डायरेक्टर ने बैंक में गलत जानकारी देकर विदेशी कंपनियों से पैसा भी मंगवाया था, अब तक की जांच में 15.66 करोड़ रुपये की अवैध फॉरेन फंडिंग का खुलासा हुआ है. इस रकम का 75% हिस्सा कपल खुद रखता था और 25% मॉडल्स को दिया जाता था. ED ने छापेमारी के दौरान स्टूडियो में काम कर रही मॉडल्स के बयान भी दर्ज किए हैं. उसके आधार पर भी आगे की कार्रवाई की जा रही है. बैंक ट्रांजेक्शन और अन्य वित्तीय लेन-देन की भी गहराई से जांच की जा रही है.