बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी से जेल के अंदर कई घंटे पूछताछ हुई हैं. आयकर विभाग ने बेनामी संपत्ति को लेकर कई घंटो पूछताछ की. जानकारी के मुताबिक, मुख्तार अंसारी की 125 करोड़ रूपए की 23 बेनामी संपत्ति जांच के दायरे में है. हालांकि इस दौरान इनकम टैक्स विभाग ने मुख्तार अंसारी की पत्नी आफशा अंसारी को भी नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुलाया था पर वह सामने नहीं आईं.
आयकर की टीम के पांच सदस्य बांदा जेल पहुंचे थे. इस दौरान मुख्तार अंसारी गोलमोल जवाब देता रहा और जब पत्नी के बारे में पूछताछ की तो उसने कहा कि कई वर्षों से जेल रहने की वजह से उसकी अपनी पत्नी से बातचीत नहीं हुई. आयकर विभाग ने मुख्तार का करीबी गणेश दत्त मिश्र से भी पूछताछ की थी और उसकी बेनामी संपत्ति की कुर्की भी की थी. मुख्तार के खिलाफ ईडी भी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर जांच की जा रही है.
बता दें, मुख्तार के रियल स्टेट कारोबार को गणेश दत्त मिश्रा ही संभालता था. मऊ, आजमगढ़, लखनऊ, वाराणसी, गाजीपुर और आसपास के कई जिलों में गणेश दत्त मिश्रा ने रियल स्टेंट के कारोबार में अपना पैर फैला लिया था. मुख्तार के नाम पर वह जमीन खरीदता था.
बेनामी 20 करोड़ की संपत्ति अब तक कुर्क
गणेश की मऊ और गाजीपुर की कई बेनामी 20 करोड़ की संपत्ति अब तक कुर्क की जा चुकी हैं. गाजीपुर के चंदन नगर कॉलोनी में गणेश दत्त मिश्र की बहुमंजिला इमारत को भी गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई में प्रशासन ने गिरा कर दिया था.पुलिस और लखनऊ ईडी की टीम ने गणेश दत्त मिश्रा को रौजा के चंदन नगर कॉलोनी स्थित उसके आवास से हिरासत में लिया. गणेश दत्त मिश्र को पहले सदर कोतवाली लाया गया. इसके बाद लखनऊ से आई ईडी टीम उसे अपने साथ लेकर चली गई.
गणेश ईडी के नोटिस को नजरअंदाज कर रहा था
शहर कोतवाल तेज बहादुर सिंह ने बताया कि बेनामी संपत्ति से जुड़े मामले में पूछताछ को लेकर गणेश दत्त मिश्र को लखनऊ ईडी से नोटिस जारी किया गया था. गणेश ईडी के नोटिस को नजरअंदाज कर रहा था. पिछले महीने मुख्तार अंसारी को वाराणसी की MP MLA कोर्ट ने 32 साल पुराने अवधेश राय हत्याकांड मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी. जैसे ही कोर्ट ने मुख्तार को दोषी करार दिया, उसकी बेचैनी बढ़ गई. उसके चेहरे पर तनाव देखने को मिला. टेंशन के चलते उसने अपना माथा पकड़ लिया.
पिछले महीने मुख्तार अंसारी को वाराणसी की MP MLA कोर्ट ने 32 साल पुराने अवधेश राय हत्याकांड मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी. जैसे ही कोर्ट ने मुख्तार को दोषी करार दिया, उसकी बेचैनी बढ़ गई. उसके चेहरे पर तनाव देखने को मिला. टेंशन के चलते उसने अपना माथा पकड़ लिया.