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UP : अमरोहा में मुस्लिम समाज ने फूंका स्वामी प्रसाद मौर्य का पुतला, कहा- लिया जाए सख्त एक्शन

पुतला दहन के दौरान बीजेपी नेता आफताब आडवाणी ने कहा, ''स्वामी प्रसाद मौर्य का असली नाम शैतान प्रसाद मौर्य होना चाहिए. उन्होंने रामचरितमानस को लेकर जो विवादित बयान दिया है, बहुत ही निंदनीय है और बहुत ही गलत है. हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं.'' माननीय मुख्यमंत्री जी से निवेदन है कि मौर्य को जेल भेज दिया जाए.

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फूंका गया स्वामी प्रसाद मौर्य का पुतला.
फूंका गया स्वामी प्रसाद मौर्य का पुतला.

यूपी के अमरोहा में मुस्लिम समाज के लोगों ने स्वामी प्रसाद मौर्य का पुतला फूंका. हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश देते हुए मुस्लिम समाज ने स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग सीएम योगी आदित्यनाथ से की है. साथ ही मांग की है कि जल्द से जल्द स्वामी प्रसाद मौर्य को जेल भेजा जाए. रामचरितमानस पर मौर्य के दिए बयान से मुस्लिम समाज नाराज है.

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देखें वीडियो...

'स्वामी प्रसाद मौर्य का असली नाम शैतान प्रसाद मौर्य होना चाहिए' : बीजेपी नेता

पुतला दहन के दौरान बीजेपी नेता आफताब आडवाणी ने कहा, ''स्वामी प्रसाद मौर्य का असली नाम शैतान प्रसाद मौर्य होना चाहिए, उन्होंने रामचरितमानस को लेकर जो विवादित बयान दिया है, वह बहुत ही निंदनीय और बहुत ही गलत है. हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं.''

आफताब आडवाणी ने आगे कहा कि आज हमारे मुस्लिम भाइयों ने स्वामी प्रसाद मौर्य का पुतला फूंका है. साथ ही संदेश दिया है कि देश में एकता है, हम अशांति का माहौल कभी भी पैदा नहीं होने देंगे.

जो भी अशांति का माहौल पैदा करेगा, हम उसका इसी तरह विरोध करेंगे. हम स्वामी प्रसाद मौर्य के खिला कानूनी कार्रवाई चाहते हैं. माननीय मुख्यमंत्री जी से यह निवेदन करूंगा के स्वामी प्रसाद मौर्य पर तुरंत कार्यवाही हो और उन्हें जेल भेज दिया जाए.

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यह है मामला

सपा के राष्ट्रीय महासचिव और एमएलसी स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरित मानस की चौपाइयों को लेकर सवाल किए थे. उन्हीं के बयान के बाद लखनऊ में धार्मिक ग्रंथ की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया गया. मौर्य ने कहा था कि कई करोड़ लोग रामचरितमानस को नहीं पढ़ते, सब बकवास है. यह तुलसीदास ने अपनी खुशी के लिए लिखा है.

स्वामी प्रसाद मौर्य ने आगे कहा था- सरकार को इसका संज्ञान लेते हुए रामचरितमानस से आपत्तिजनक अंशों को बाहर करना चाहिए या इस पूरी पुस्तक को ही बैन कर देना चाहिए. तुलसीदास की रामचरितमानस में कुछ अंश ऐसे हैं, जिन पर हमें आपत्ति है. किसी भी धर्म में किसी को भी गाली देने का कोई अधिकार नहीं है. तुलसीदास की रामायण की एक चौपाई है, जिसमें इसमें वह शूद्रों को अधम जाति का होने का सर्टिफिकेट दे रहे हैं.

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