राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने शनिवार को यूपी के बलिया माओवादी साजिश मामले में एक अन्य प्रमुख आरोपी के खिलाफ लखनऊ की विशेष अदालत में आरोपपत्र दायर किया है. जांच एजेंसी ने आरोपी पर भारत सरकार को अस्थिर करने के मकसद से सीपीआई (माओवादी) एक्टिविटी में शामिल होने का आरोप लगाया है.
एनआईए ने आरसी 02/2023/एनआईए/एलकेडब्ल्यू मामले में लखनऊ की स्पेशल कोर्ट के समक्ष दायर की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में बलिया के कोतवाली क्षेत्र में रहने वाले संतोष वर्मा उर्फ मंतोश को आरोपी बनाया है. संतोष पर प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) संगठन के सक्रिय कैडर के रूप में आरोपी बनाया गया है.
आरोपपत्र के अनुसार, वह भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को खतरे में डालने के उद्देश्य से विघटनकारी एक्टिविटी की साजिश रच रहा था और वह खुद भी ऐसी ही एक्टिविटी में शामिल था.वह सीपीआई (माओवादी) के लिए नए लोगों की भर्ती में भी सक्रिय रूप से शामिल था.
यह मामला मूल रूप से 16 अगस्त 2023 को एटीएस पुलिस स्टेशन लखनऊ पुलिस द्वारा राम मूरत नामक व्यक्ति के घर छापेमारी में पांच लोगों की गिरफ्तारी के बाद दर्ज किया गया था. टीम ने आरोपियों के कब्जे से सीपीआई (माओवादी) से संबंधित कई आपत्तिजनक डॉक्यूमेंट्स, पर्चे, हथियार, गोला-बारूद और डिजिटल डिवाइस बरामद किए थे.
जांच से पता चला है कि प्रतिबंधित संगठन बिहार की सीमा से लगे जिलों में नक्सल विचारधारा का प्रचार करने के लिए फ्रंटल संगठनों का इस्तेमाल कर रहा है. इसी उद्देश्य से उन्होंने राम मुरात के घर पर एक बैठक का आयोजन किया था, ताकि उनके नापाक इरादों को आगे बढ़ाया जा सके.
10 नवंबर को जांच का जिम्मा संभालने वाली एनआईए ने इस साल 9 फरवरी को इस मामले में चार अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था. एजेंसी की जांच से पता चला है कि सीपीआई (माओवादी) के नेता, कैडर और समर्थक/ ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) उत्तर क्षेत्रीय ब्यूरो, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में संगठन को फिर से सक्रिय करने की कोशिश में लगे हुए थे.