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माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ हत्याकांड में पुलिस को क्लीन चिट दी गई है. जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि घटना को रोकना मुमकिन नहीं था और घटना पुलिस की लापरवाही का परिणाम नहीं थी. साथ ही हत्या पूर्व नियोजित भी नहीं थी. बता दें कि 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज के कॉल्विन अस्पताल के बाहर 9 सेकंड में अतीक-अशरफ की तीन शूटरों ने 14 गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस मामले में गठित न्यायिक आयोग की रिपोर्ट से अहम जानकारी निकलकर सामने आई है.
जांच आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, 9 सेकंड में अतीक अहमद और अशरफ की हत्या हुई थी. तीनों शूटरों ने उनपर 14 गोलियां चलाई थीं. अतीक और अशरफ के अस्पताल पहुंचने से एक घंटा 27 मिनट पहले ही एक शूटर लवलेश तिवारी वहां पहुंच चुका था.
2023 की 14 अप्रैल और 15 अप्रैल को अतीक अहमद की तबीयत बिगड़ने के चलते थाने बुलाए गए निजी डॉक्टर ने रेगुलर मेडिकल चेकअप की सलाह दी थी. धूमनगंज थाने में ही अतीक और अशरफ का डॉक्टर बुलाकर चेकअप करवाया गया था.
हत्या से एक रात पहले यानि 14 अप्रैल की रात अतीक और अशरफ को 10:37 पर अस्पताल लाया गया था और 11:07 PM पर वापस ले जाया गया. अगले दिन 15 अप्रैल को रात 10 बजकर 36 मिनट पर अतीक और अशरफ अस्पताल के गेट पर पहुंचे. वहीं, शूटर लवलेश तिवारी उसी रात को 9:09 PM पर अस्पताल पहुंच चुका था. इसके 20 मिनट बाद 9.29 PM पर अरुण मौर्य और सनी एक साथ अस्पताल पहुंचे थे.
अतीक और अशरफ के अस्पताल गेट पर पहुंचते ही सनी 8 सेकंड के लिए अस्पताल परिसर में बने सुलभ शौचालय में गया और फिर तुरंत बाहर निकलकर साथियों के पास पहुंच गया था. शूटरों के आने और डेढ़ घंटे बाद हत्या होने तक यह सब हुआ. अतीक पर पहली गोली लवलेश तिवारी ने 10 बजकर 36 मिनट और 24 सेकेंड पर चलाई थी.
जानिए मिनट टू मिनट क्या हुआ?
पहला शूटर लवलेश तिवारी 9:09:31 सेकेंड पर अस्पताल के गेट से अंदर आता है. फिर ई रजिस्ट्रेशन काउंटर के पेड़ के नीचे लगी बेंच पर बैठता है. 4 मिनट बाद लवलेश बेचैन होकर अस्पताल गेट के बाहर 9:13:27 सेकेंड पर बाहर जाता है और 1 मिनट बाद ही 9:14:14 सेकेंड बाद फिर वापस अस्पताल आ जाता है.
10 मिनट बाद यानि 9:24:54 सेकंड बाद लवलेश फिर अस्पताल के बाहर जाता है और 5 मिनट बाद 9:29:50 सेकेंड पर अंदर आता है. इसी बीच 9:29:18 सेकेंड पर सनी और अरुण मौर्य अस्पताल आते हैं और इमरजेंसी वार्ड की तरफ बढ़ते हैं.
लवलेश तिवारी अपने साथी सनी और अरुण के अस्पताल में पहुंचने के 32 सेकंड बाद वहां आता है. पहले लवलेश, सनी और अरुण से अलग बैठता है, फिर 9:33:12 सेकेंड पर सनी और अरुण रजिस्ट्रेशन काउंटर के पास बनी सीढ़ियों से उठकर लवलेश के पास सुलभ शौचालय के बगल वाली बेंच पर बैठ जाते हैं.
अतीक और अशरफ पर पहली गोली लवलेश तिवारी ने 10:36:24 सेकंड पर चलाई. इसी दौरान सनी तपाक से अपनी माइक आईडी फेंकता है और 10:36:20 पर पिस्टल निकालकर फायरिंग करने लगता है. 10:36:28 सेकेंड पर तीनों शूटर यानि अरुण, सनी और लवलेश एकसाथ फायरिंग करते नजर आते हैं.
10:36:24 सेकंड पर अतीक अहमद पर पहली गोली चली. 9 सेकेंड में कुल 14 राउंड फायर हुए. 10:36:50 सेकेंड यानी गोली चलने के 26 सेकंड के अंदर ही पुलिस ने शूटर सनी, अरुण और लवलेश को पकड़ लिया और जीप में बैठाकर लेकर चली गई.
पुलिस के पास नहीं था हस्तक्षेप का समय
हत्याकांड नौ सेकंड में घटित हुआ, जिससे पुलिस के पास हस्तक्षेप का कोई समय नहीं था. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि अतीक और अशरफ की सुरक्षा के लिए पुलिस ने मानक से अधिक कर्मियों की तैनाती की थी. जेल से लेकर रिमांड तक के दौरान सुरक्षा व्यवस्था मजबूत थी. हालांकि, मीडिया की उपस्थिति ने पुलिस के कार्य में बाधा डाली और हत्याकांड के दौरान मीडियाकर्मियों की गतिविधियों पर सवाल उठाए गए.
हमलावरों ने क्यों की हत्या?
जांच आयोग ने हमलावरों के मकसद पर भी प्रकाश डाला, जिन्होंने अतीक और अशरफ की हत्या को मीडिया की मौजूदगी में अंजाम दिया ताकि उन्हें कुख्याति मिल सके. इस घटना ने पुलिस को कई महत्वपूर्ण सूचनाओं के नुकसान का भी सामना करना पड़ा, जैसे कि आतंकवादी संगठनों और आईएसआई से अतीक और अशरफ के संबंध. आयोग की रिपोर्ट ने साफ किया कि अतीक अहमद और अशरफ की हत्या में पुलिस और राज्य तंत्र की कोई संलिप्तता नहीं थी. यह पूर्व नियोजित साजिश थी जिसे टालना संभव नहीं था. मीडिया की भूमिका और पुलिस की तत्परता पर भी रिपोर्ट ने विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया है.