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400 करोड़ की FD और चार करोड़ का चूना... नोएडा अथॉरिटी में जालसाजी की पूरी कहानी

Noida Authority: नोएडा अथॉरिटी में जालसाजी से जुड़ा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. जालसाजों ने प्लानिंग के तहत एक एफडी से 200 करोड़ रुपये निकालने की कोशिश की. चार करोड़ रुपये निकाल भी लिए गए. इसके बाद 9 करोड़ और निकालने की तैयारी थी.

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नोएडा अथॉरिटी में जालसाजी का मामला.
नोएडा अथॉरिटी में जालसाजी का मामला.

नोएडा अथॉरिटी (Noida Authority) ने दो बैंकों में 200-200 करोड़ की एफडी बनवाई. जालसाजों ने पूरी प्लानिंग के तहत एक से 200 करोड़ रुपये निकालने की कोशिश की. चार करोड़ रुपये निकाल भी लिए गए. 9 करोड़ और निकालने की तैयारी थी कि उससे पहले ही बैंक को शक हुआ. इसके बाद अथॉरिटी को सूचना दी गई और अब पुलिस ठगों की तलाश में है. जानें कैसे हुआ ये खेल...

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दरअसल, नोएडा अथॉरिटी को 400 करोड़ की एफडी करानी थी. इसके लिए अधिकारियों ने 15 जून को टेंडर निकाला. इसमें कई बैंक शामिल हुए. सबसे ज्यादा ब्याज दर देने का वादा करने की वजह से बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India), नोएडा सेक्टर-62 ब्रांच और एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) का चयन किया गया.

प्राधिकरण इन दोनों बैंकों में 200-200 करोड़ रुपये की एफडी बनवाने के कागज तैयार करने लगा. दोनों बैंकों के अधिकारी नोएडा अथॉरिटी के संपर्क में आ गए. अथॉरिटी की तरफ से साइनिंग अथॉरिटी बनाई गई. दोनों बैंकों को एफडी बनवाने के लिए पैसे ट्रांसफर कर दिए गए. इसके बाद असली खेल शुरू हो गया.

खाता खोलने में हुई गड़बड़ी

दोनों बैंकों से एफडी बनकर नोएडा अथॉरिटी आ गई. अधिकारियों ने इन एफडी (FD) को बिना जांच पड़ताल किए फाइल में लगा दिया और संबंधित लोगों को इसकी जानकारी भेज दी. नियम के मुताबिक, जिस बैंक में एफडी खोली जाती है, वहां खाता भी होना चाहिए. ऐसे में दोनों जगह बैंक अकाउंट खोलने की प्रकिया शुरू कर दी गई.

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यहां से शुरू हो गई जालसाजी. जालसाजों को पता था कि बैंक में खाता खोला जाना है. ऐसे में उन्होंने पुडुचेरी के रहने वाले अब्दुल खादर का फर्जी परिचय पत्र बनवाया. अब्दुल को नोएडा अथॉरिटी का अकाउंटेंट बताया गया. गैंग के सदस्य अब्दुल के साथ बैंक आने जाने लगे. बैंक कर्मी भी अब्दुल का परिचय पत्र देखकर उसे अथॉरिटी का कर्मचारी समझने लगे.

बैंक सूत्रों के मुताबिक, अब्दुल अथॉरिटी की कई बातें वहां करता था, जिससे कभी बैंक कर्मचारियों को उस पर शक नहीं हुआ. इसी विश्वास का फायदा उठाकर अब्दुल बैंक खाता खुलवाने में कामयाब हो गया. इस तरह बैंक ऑफ इंडिया में नोएडा अथॉरिटी के नाम पर ऐसा खाता खुला, जिसमें मोबाइल नंबर और ईमेल एड्रेस जालसाजों ने अपना दिया था. इस गैंग ने खाता खुलवाने के लिए जो कागजात दिए, उनमें वित्त नियंत्रक और मुख्य वित्त अधिकारी के फर्जी साइन थे.

3 करोड़ 90 लाख खाते में ट्रांसफर

गैंग ने सबसे पहले बैंक अधिकारियों से कहा कि उस एफडी में से 3 करोड़ 90 लाख खाते में ट्रांसफर कर दो. बैंक अधिकारी यहां गच्चा खा गए. पैसा ट्रांसफर कर दिया. इसके बारे में नोएडा अथॉरिटी के किसी अधिकारी को अब तक कुछ पता नहीं था. गैंग से जुड़े लोगों ने इस पैसे को तुरंत कई अन्य खातों में ट्रांसफर कर लिया.

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इसके बाद अब्दुल को नौ करोड़ रुपये निकालने के लिए एक बार फिर से बैंक भेजा गया. बैंक अधिकारियों को इस पर कुछ शक हुआ. उन्होंने कुछ बहाना बनाकर तुरंत पैसा ट्रांसफर करने से मना कर दिया और अगले दिन आने को कहा. सोमवार (3 जुलाई) को जैसे ही अब्दुल बैंक पहुंचा, अधिकारियों ने उसे बैठा लिया और पूछताछ करने लगे. इसी दौरान बैंक की एक टीम अथॉरिटी पहुंच गई.

जैसे ही बैंक वालों ने अथॉरिटी को ये बताया कि 3 करोड़ 90 लाख रुपये ट्रांसफर हो चुके हैं और आज नौ करोड़ और ट्रांसफर होने हैं, तो अधिकारियों में हड़कंप मच गया. नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों ने जैसे ही बैंक कर्मचारियों को बताया कि पैसा तो ट्रांसफर होना ही नहीं था, तो बैंक में भी खलबली मच गई. इसी बीच अब्दुल के जो साथी बैंक के बाहर थे, वो खतरा भांपकर भाग गए.

सौ करोड़ 96 लाख के लिए शुरू हुई माथापच्ची

नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों ने बैंक मैनेजर से कहा कि हमारा बचा पैसा तुरंत सही अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाए. इस पर पहले तो बैंक अधिकारी तैयार थे, लेकिन बाद में मुकर गए. बैंक अधिकारियों का कहना था कि जांच के बाद ही हम इस पैसे को ट्रांसफर करेंगे. इस मामले पर एडीसीपी नोएडा शक्ति अवस्थी ने बताया कि प्राधिकरण की ओर से थाना सेक्टर 58 में केस दर्ज कराया गया है. इसमें कहा गया है कि प्राधिकरण द्वारा एफडी के लिए जमा किए गए 200 करोड़ रुपये में से किसी ने 3 करोड़ 80 लाख रुपये फर्जी तरीके से ट्रांसफर करवा लिए हैं.

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हो सकती है सीबीआई जांच

नोएडा प्राधिकरण की सीईओ ऋतु माहेश्वरी (Ritu Maheshwari) ने इस मामले में एसीईओ मानवेंद्र सिंह की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है. इस समिति में एसीईओ प्रभाष कुमार और मुख्य विधि अधिकारी रविंद्र प्रसाद गुप्ता को सदस्य बनाया गया है. यह समिति 15 दिन में जांच रिपोर्ट सौंप सीईओ को दे देगी.  प्राधिकरण अधिकारियों की मानें तो 3 करोड़ से अधिक का लेनदेन होने के कारण इस मामले में सीबीआई की जांच भी हो सकती है.

बैंक की सीसीटीवी फुटेज की जांच

नोएडा जोन के एडीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी का कहना है कि कई लोग शक के दायरे में हैं. जालसाजों से लेकर अलग-अलग लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है. इसमें प्राधिकरण व बैंक के लोग भी शामिल हो सकते हैं. पुलिस इस मामले में बैंक की सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है. बताया जा रहा है कि पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया है.

इस संबंध में अथॉरिटी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि 23 जून को दो सौ करोड़ रुपये एफडी के रूप में जमा कराने के लिए बैंक ऑफ इंडिया (सेक्टर-62, नोएडा) को दिए गए थे. बैंक ने एफडी के पेपर्स अथॉरिटी को उपलब्ध कराए थे. एफडी बनने के बाद नियमानुसार पैसे निकाले नहीं जा सकते, बावजूद इसके बिना किसी आदेश के बैंक ने 3 करोड़ 80 लाख रुपये तीन व्यक्तियों को ट्रांफसर कर दिए. मामले की जानकारी मिलते ही बैंक ऑफ इंडिया के खिलाफ सेक्टर-58 पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है. बैंक द्वारा लिखित आश्वासन दिया गया है कि पूरी धनराशि जल्द ही उपलब्ध करा दी जाएगी.

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