उत्तर प्रदेश के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का निर्माण कार्य बेहद तेजी से आगे बढ़ रहा है. इस एयरपोर्ट को बनाने का जिम्मा स्विस कंपनी ज्यूरिख़ इंटरनेशनल को मिला है. ज्यूरिख़ इंटरनेशनल के सीईओ और सीओओ ने आज ग्रेटर नोएडा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि एयरपोर्ट का काम कहां तक पहुंचा है.
'बनारस का घाट लगभग बनकर तैयार'
सीओओ किरन जैन ने बताया कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट में जैसे ही लोग पहुंचेंगे उन्हें बनारस के घाट की तर्ज पर तैयार एक जगह दिखाई पड़ेगी. सबसे अच्छी बात ये है की बनारस के घाट के तर्ज पर तैयार की जा रही इस जगह तक कोई भी जा सकता है. मतलब ऐसा नहीं है कि सिर्फ पैसेंजर को ही वहां तक जाने की परमिशन होगी बल्कि जो लोग पैसेंजर को लेने या छोड़ने के लिए एयरपोर्ट जा रहे हैं, वह भी यहां तक पहुंच सकते हैं और बैठकर बात कर सकते हैं. एयरपोर्ट का यह हिस्सा लगभग बनकर तैयार हो गया है.
'DNX होगा 3 लैटर कोड'
IATA (International Airtransport Association) सभी स्टेशन को एक 'Three Letter Code' जारी करती है. इस कोड के नाम से ही किसी एयरपोर्ट को पूरी दुनिया में जाना जाता है. कोई भी एयरपोर्ट कमर्शियल उपयोग में इसी कोड से जाना जाता है. Noida International Airport के अधिकारियों ने बताया की थ्री लेटर्स कोड मिलना एक जटिल प्रक्रिया है. इसमें कई चरणों से होकर गुजरना पड़ता है. हमने तीन कोड उनको सुझाव के रूप में दिए थे और अच्छी बात यह कि उनमें से ही एक कोड हमें अलॉट कर दिया गया. जो कोड अलॉट हुआ है वो है DNX.
अब तक 14 मिलियन घंटे हुआ काम
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की साइट पर अब तक 14 मिलियन घंटे काम हो चुका है. 7000 से ज्यादा कर्मचारी इस एयरपोर्ट को तैयार करने में लगे हुए हैं. 450 से ज्यादा हल्की और भारी मशीन एयरपोर्ट की साइट पर काम कर रही है. अब तक 50 हज़ार मिट्रिक टन से भी ज्यादा कंक्रीट का इस्तेमाल एयरपोर्ट की साइट पर हो चुका है. इतना ही नहीं 25000 मिट्रिक टन से ज्यादा की स्टील का इस्तेमाल साइट पर किया जा चुका है.
बताया जा रहा है कि एयरपोर्ट का काम बेहद तेजी से अपने निर्धारित गति से आगे बढ़ रहा है. उम्मीद की जा रही है कि दिसंबर 2024 तक एयरपोर्ट का काम पूरा हो जाएगा और 2024 में ही पहली उड़ान नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से भरी जाएगी.