ग्रेटर नोएडा के जेवर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बन रहा है और पास में ही फिल्म सिटी का भी निर्माण होगा. ऐसे में फिल्म सिटी को एयरपोर्ट से कनेक्ट करने के लिए पॉड टैक्सी चलाई जाएगी. जिसका अनुमानित खर्च 810 करोड़ रुपये बताया जा रहा है. क्या ग्रेटर नोएडा शहर में पॉड टैक्सी जैसी सुविधा कामयाब हो पाएगी? आजतक संवाददाता ने ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट से उनकी राय जानने की कोशिश की.
बेसिक सुविधाएं पूरी होना जरूरी
शहर के जाने-माने ट्रांसपोर्टर और केके साहिब बस सर्विस चलाने वाले शिवांकित शर्मा ने आजतक से बातचीत में पॉड टैक्सी के फायदे और नुकसान के बारे में बताया. शिवांकित शर्मा ने कहा कि स्टेट इंफ्रास्ट्रक्चर के हिसाब से पॉड टैक्सी अच्छी पहल है, लेकिन ग्रेटर नोएडा जैसे शहर में पॉड टैक्सी से पहले रोड कनेक्टिविटी अन्य बेसिक सुविधाओं को डेवलप करना होगा. पोड टैक्सी जिसका खर्च लगभग 810 करोड़ रुपये बताया जा रहा है, उसकी जगह अगर पहले रोड कनेक्टिविटी ठीक की जाए और प्रॉपर इलेक्ट्रिसिटी की व्यवस्था की जाए तो ग्रेटर नोएडा आने जाने में आसानी होगी.
मेट्रो की तुलना में इलेक्ट्रिसिटी की खपत होगी कम
उन्होंने यह भी कहा कि जिन गांव को एयरपोर्ट की जमीन के लिए विस्थापित किया गया है, उन्हें ठीक से विस्थापित किया जाए जिससे एयरपोर्ट के आस-पास अच्छी सुविधाएं डेवलप हो सकें. जहां अभी रोड भी ठीक नहीं है वहां पॉड टैक्सी लॉन्च कर देंगे तो कैसे कामयाब होगी. इसलिए बेहतर है कि पहले बेसिक सुविधाओं का विकास होना चाहिए. हालांकि, यह बात सही है कि पॉड टैक्सी में मेट्रो के मुकाबले इलेक्ट्रिसिटी की खपत कम होगी लेकिन जब तक एयरपोर्ट के आस-पास के इलाकों में इलेक्ट्रिसिटी और अन्य विकास नहीं होंगे तब तक पॉड टैक्सी कामयाब नहीं होगी. इसलिए इस योजना पर अभी 810 करोड़ खर्च करना उचित नहीं होगा.
नोएडा में चलेगी देश की पहली पॉड टैक्सी, जानें रूट और बाकी डिटेल्स
बता दें कि यमुना विकास प्राधिकरण जेवर एयरपोर्ट फिल्म सिटी और अन्य विकास की परियोजनाओं के साथ-साथ विकास कार्यों में भी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता. इसी के मद्देनजर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से फिल्म सिटी तक पॉड टैक्सी भी चलाई जाएगी. इसके लिए डीपीआर तैयार हो चुकी है और प्राधिकरण के पास जमीन पहले से ही उपलब्ध है.
यह पॉड टैक्सी इंडस्ट्रियल एरिया सेक्टर 28 29 ,31, 32 से गुजरती हुई यमुना प्राधिकरण के क्षेत्र में बनने वाली फिल्म सिटी तक पहुंचेगी. यमुना विकास प्राधिकरण के सीईओ अरुण वीर सिंह ने जानकारी दी किइस कॉरिडोर की लंबाई 14 .1 किलोमीटर होगी और इस पर 641.53 करोड़ रुपये खर्च होंगे. पॉड टैक्सी का स्ट्रक्चर एलिवेटेड तरीके का होगा और यह एग्जास्टिंग रोड पर बनाई जाएगी.
शासन के सामने डीपीआर प्रस्तुति के समय कमेटी ने पहले उन देशों का अध्ययन करने के कहा जिन देशों में पहले से पॉड टैक्सी चल रही हैं. इसमें जापान, साउथ कोरिया और लंदन शामिल है. यमुना प्राधिकरण में इंडियन पोर्ट रेल एंड रोपवे कॉरपोरेट लिमिटेड के साथ प्राधिकरण में अधिकारियों की बैठक हुई है. जिसके बाद इसको अप्रूवल के लिए शासन के पास जल्द ही भेज दिया जाएगा.
पॉड टैक्सी क्या है?
पर्सनल रैपिड ट्रांस्पोट (पीआरटी) या पॉड टैक्सी ऐसी तकनीकी कार होती है जो ऊर्जा की मदद से संचालित होती है. इसको पूरी तरह से स्वचालित बनाया गया है, जिसके लिए ड्राइवर की जरूरत नहीं होती. पॉड टैक्सी के जरिए 3 से 6 यात्रियों को एक बार में ले जाया जा सकता है. पर्यावरण के लिहाज से पॉड टैक्सी काफी बेहतर होती हैं, क्योंकि इनके इस्तेमाल से वाहनों की वजह से बढ़ रहे प्रदूषण पर काफी हद तक रोकथाम में सफलता मिल सकती है.