लखनऊ के चारबाग स्थित रवीन्द्रालय में सुहलदेव भारतीय समाज पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई. बैठक में सर्वसम्मति से तीन महत्वपूर्ण पदों की घोषणा की गई, जिसमें ओमप्रकाश राजभर को राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ अरविंद राजभर को राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव और राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की घोषणा की गई. साथ ही राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता अरुण राजभर को बनाया गया. इसके आलावा प्रदेश अध्यक्ष के साथ साथ 25 जिलों के जिलाध्यक्ष, विभिन्न मोर्चों व प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों की भी बैठक में घोषणा की गई. वहीं पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता अरुण राजभर ने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने नए चुनाव चिन्ह 'चाबी' की घोषणा की.
बैठक को संबोधित करते हुए ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि पार्टी गरीबों, वंचितों, पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक और पीड़ितों की पार्टी है. इसलिए सुभासपा के समर्थक पूरे तन -मन- धन से सहयोग कर पार्टी के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाएं. वर्तमान समय में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी उत्तर प्रदेश ही नहीं अपितु बिहार राज्य की राजनीति में भी अपना दखल रखती है. बिहार में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी मजबूती से उतरेगी. 2026 में होने वाले जिला पंचायत और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में अभी से जुटने के लिए कार्यकर्ताओं से कहा गया ताकि पार्टी की नीतियों और सिद्धांतों को प्रदेश के जन- जन तक पहुंचाया जा सके और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत किया जा सके.
ओम प्रकाश राजभर पूर्व की सरकारों पर भी हमलावर होते हुए दिखाई पड़े, जिसमें उन्होंने कहा कि सरकार में रहते हुए विपक्षीय पार्टियों ने शोषित, वंचित, पिछड़ा, दलित, अतिपिछडा एवं अल्पसंख्यक समाज के लोगों की याद क्यो नहीं आई? सरकार में रहते हुए जातिगत जनगणना, सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट को लागू करने की याद क्यों नहीं आई?
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री के तौर पर ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि मदरसों के संचालन के लिए विश्वविद्यालय खुलवाउंगा. राजभर ने प्रदेश के मदरसों की मान्यता की नयी व्यवस्था शुरू किए जाने की तैयारी की तरफ इशारा करते हुए कहा, हमारा प्रयास है कि हम दो विश्वविद्यालय खोलें. हम राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड को विश्वविद्यालय से संबद्ध करना चाहते हैं और वहीं विश्वविद्यालय से सभी मदरसों को मान्यता दे दी जाएगी, ताकि भविष्य में कोई विवाद न हो.
उदाहरण देते हुए कहा, उन्होंने कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय, पूर्वांचल विश्वविद्यालय, शकुंतला विश्वविद्यालय आपके सामने हैं, जहां से तमाम विद्यालय संचालित होते हैं, इस तरह विश्वविद्यालय से अगर मदरसे संचालित होते, तो आज यह दुर्गति न होती इस काम को न तो सपा कर पाई, न कांग्रेस कर पाई और न ही बसपा.