पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के परिवार की 13 जमीन नीलाम हो चुकी है. उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थित 13 बीघा जमीन को एक करोड़ 38 लाख 16 हजार रुपये में नीलाम किया गया. प्रशासन की ओर से इसका आधार मूल्य 39 लाख रुपये रखा गया था. मुशर्रफ के परिवार की यह जमीन शत्रु संपत्ति के रूप में दर्ज थी.
परवेज मुशर्रफ की जमीन खरीदने के लिए ऑनलाइन बोली लगाई गई थी. इस जमीन को देखने के लिए अलग-अलग राज्यों से कई लोग बागपत के कोताना गांव पहुंचे थे. 13 बीघा जमीन को तीन लोगों ने एक करोड़ 38 लाख और 16 हजार रुपये में खरीद लिया. नीलामी का यह पैसा केंद्र सरकार के संपत्ति अभिरक्षक विभाग के खाते में जमा कराया जाएगा.
एडीएम ने बताया कि इस जमीन के खरीदारों को चार महीने में रुपये जमा कराने होंगे. पहले महीने में रकम का 25 फीसदी जमा कराना होगा, जबकि बचा हुई 75 फीसदी रकम तीन महीनों में जमा करानी होगी.
परवेज मुशर्रफ का परिवार बागपत के कोताना गांव में रहता था. हिंदुस्तान के बंटवारे के समय उनका परिवार पाकिस्तान में चला गया था, लेकिन परिवार की जमीन और हवेली यहीं रह गई थी. मुशर्रफ के परिवार की प्रॉपर्टी को शत्रु संपत्ति में शामिल कर लिया गया था. बता दें कि परवेज मुशर्रफ का निधन 5 फरवरी 2023 को हो गया था.
1943 में दिल्ली जाकर रहने लगा था मुशर्रफ का परिवार
बताया जाता है कि परवेज मुशर्रफ के पिता मुशर्रफुद्दीन और माता बेगम जरीन कोताना गांव की रहने वालीं थीं. कोताना में ही दोनों की शादी हुई थी. वो साल 1943 में दिल्ली जाकर रहने लगे थे, जहां परवेज मुशर्रफ और उनके भाई डॉ. जावेद मुशर्रफ का जन्म हुआ था. साल 1947 में बंटवारे के समय उनका परिवार पाकिस्तान में जाकर बस गया था. दिल्ली के अलावा उनके परिवार की हवेली और खेती की जमीन कोताना में भी थी, जिसमें परवेज मुशर्रफ की जमीन तो बेच दी गई थी, लेकिन उनके भाई डॉ. जावेद मुशर्रफ और परिवार के अन्य सदस्यों की 13 बीघा से ज्यादा खेती की जमीन बच गई थी, जिसकी नीलामी कर दी गई है.
15 साल पहले शत्रु संपत्ति में शामिल हुई थी जमीन
इसके अलावा कोताना की हवेली उनके चचेरे भाई हुमायूं के नाम दर्ज हो गई थी. परवेज मुशर्रफ के भाई डॉ. जावेद मुशर्रफ और परिवार के अन्य सदस्यों की जमीन को 15 साल पहले शत्रु संपत्ति में दर्ज कर दिया गया था. इस जमीन की नीलामी होते ही बागपत से पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के भाई और परिवार का नाम खत्म हो गया है.