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यूपी के बहराइच में हुई हिंसा के आरोपियों की तस्वीर सामने आई हैं. रामगोपाल मिश्रा की गोली मारकर हत्या करने वालों आरोपियों की तस्वीर 'आज तक' के पास मौजूद है. सबसे पहली तस्वीर उस अब्दुल हामिद की है जो हिंसा का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है. अब्दुल हामिद की लाइसेंसी बंदूक से ही रामगोपाल को गोली मारी गई थी. हामिद पकड़ा जा चुका है.
दूसरी तस्वीर अब्दुल हामिद के बेटे सरफराज उर्फ रिंकू की है. आरोप है कि इसी ने पिता की बंदूक से गोली चलाई थी, जिसकी वजह से रामगोपाल मिश्रा की मौत हुई. पुलिस एनकाउंटर में सरफराज के पैर में गोली लगी थी. उसे भी गिरफ्तार किया जा चुका है.
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वहीं, तीसरी तस्वीर एनकाउंटर के बाद पकड़ा गए तालिब उर्फ सबलू की है. तालिब भी अब्दुल हामिद का बेटा है. एनकाउंटर में उसके पैर में भी गोली लगी थी. उपरोक्त तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा चुका है. जबकि, चौथी तस्वीर हत्याकांड के तीसरे नामजद आरोपी फहीम की है. जिसे पुलिस ने बीते गुरुवार को 4 अन्य आरोपियों के साथ गिरफ्तार किया था.
बताया जा रहा है कि बहराइच के महराजगंज कस्बे में हुए बवाल के वक्त का जो वीडियो सामने आया था उसमें एक शख्स घर के अंदर से बंदूक चलाते दिख रहा था. वो शख्स कोई नहीं बल्कि सरफराज ही था. खुद इसकी तस्दीक सरफराज की बहन रुखसार ने की है. बकौल रुखसार- भाई ने गोली चलाई थी, लेकिन भीड़ को भगाने के लिए, किसी को मारने के लिए नहीं, मगर अनहोनी हो गई.
सूत्रों के मुताबिक, मूर्ति विसर्जन वाले दिन ( 13 अक्टूबर) सरफराज से ही गाना (डीजे) बंद करने को लेकर विवाद हुआ था. देखते ही देखते ये विवाद इतना बढ़ा कि डीजे पर पत्थरबाजी होने लगी और हालात आउट ऑफ कंट्रोल हो गए. गोलीबारी में रामगोपाल की मौत के बाद तो भीड़ और उग्र हो गई और तोड़फोड़-आगजनी का दौर शुरू हो गया.
सरफराज की बहन ने किया ये दावा
मालूम हो कि बहराइच के थाना हरदी क्षेत्र के रेहुआ मंसूर गांव निवासी रामगोपाल मिश्रा 13 अक्टूबर की शाम करीब 6 बजे दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए निकले जुलूस में शामिल था. ये जुलूस जब महराजगंज बाजार में समुदाय विशेष के मोहल्ले से गुजर रहा था तो दो पक्षों में कहासुनी हो गई. आरोप है कि इस दौरान छतों से पत्थर फेंके जाने लगे, जिससे विसर्जन में भगदड़ मच गई. इस बीच रामगोपाल को एक घर की छत पर गोली मार दी गई, जिससे उसकी मौत हो गई. ये छत अब्दुल हमीद की थी. सरफराज अब्दुल हमीद का बेटा है और रुखसार उसकी बेटी.
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रुखसार ने और क्या कहा?
रुखसार ने 'आजतक' से बात करते हुए कहा कि घटना में (रामगोपाल मर्डर) परिवार के शामिल होने पर हमें दुख है लेकिन जितना मुझे पता चला है चारों तरफ से भीड़ मेरे घर में घुस गई थी. केवल अंदर का एरिया दिखाया जा रहा है, बाहर का नहीं दिखाया जा रहा. घर के अंदर से इतना पथराव कैसे होगा, बाहर से भी ईंट-पत्थर आया. बवाल के वक्त घर में महिलाएं भी थीं और बाहरी लोग घर के अंदर दाखिल होना चाह रहे थे. भीड़ में शामिल लोगों ने उसके पिता की ज्वैलरी शॉप भी लूट ली थी फिर उसमें आग लगा दी थी. तोड़फोड़ और पथराव तो हुआ ही. पुलिसवालों की वजह से उस वक्त पिता-भाइयों की जान बच गई थी. लड़के (रामगोपाल) के छत पर चढ़ने के बाद पूरी भीड़ छत पर उमड़ आई थी. दुकान जलाई, गाड़ी जलाई, बाइक जलाई. बोतलें फेंकी. फिर मेरे भाई और पापा ने वही बोतलें वापस उन लोगों के ऊपर फेंकी. मेरे परिवार ने आंगन से गुहार भी लगाई कि हमें बचा लो, ये भीड़ हमें मार देगी. लेकिन ये सबकुछ नहीं दिखाया जा रहा है. इसके ठीक बाद मेरे भाई ने पहले हवाई फायर किया जिससे भीड़ कम हो जाए.
रुखसार का कहना है कि वह लड़का (रामगोपाल) जो ऊपर चढ़ गया था, आंगन में आने की कोशिश कर रहा था. जबकि घर में महिलाएं भी थीं. जिसके बाद अपने बचाव में मेरे भाई ने गोली चलाई. अगर प्लान तरीके से किया होता तो आप खुद सोचिए किसी को मार कर परिवार कैसे बच सकता था?
क्या गोली मारना ही आखिरी सॉल्यूशन था? इस सवाल के जवाब में रुखसार ने कहा कि मृतक को कई गोलियां लगी हैं, करंट लगा है, यह सारी चीज गलत है. 1000-500 की भीड़ जब एक घर में हमला करेगी तो वह इंसान क्या करेगा अपने बचाव में. हालांकि, किसी को मारा जाना जस्टिफाई नहीं किया जा सकता है. पुलिस मेरे पति-देवर को उठा ले गई, जबकि उनका कोई रोल नहीं है. हम लोग तो 40-50 किमी दूर रहते हैं.