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पीलीभीत फर्जी मुठभेड़ केसः हाईकोर्ट ने 43 पुलिसकर्मियों की उम्रकैद 7-7 साल की सजा में बदली

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 31 साल बाद 43 पुलिसकर्मियों को सात-सात साल की सजा सुनाई है. इस फैसले से फर्जी मुठभेड़ में मारे गए लोगों के परिजन संतुष्ट नहीं हैं. उनका कहना है कि वे इस फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे. तीर्थ यात्रा से लौट रहे 10 सिखों को बस से उतारकर एनकाउंटर किया गया था.

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कोर्ट ने 43 पुलिसकर्मियों को सुनाई सजा.
कोर्ट ने 43 पुलिसकर्मियों को सुनाई सजा.

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में 31 साल पहले हुए फर्जी मुठभेड़ कांड में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गुरुवार को फैसला सुनाया है. कोर्ट ने इस फर्जी मुठभेड़ के दोषी 43 पुलिसकर्मियों को सात-सात साल कैद की सजा सुनाई है. इस मामले में 57 पुलिसकर्मी आरोपी थे, जिसमें से 14 की मौत हो चुकी है.

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वहीं, 43 आरोपियों में कुछ जेल में हैं और कुछ जमानत पर बाहर हैं. कोर्ट के इस फैसले से मामले के मुख्य पैरोकार हरजिंदर सिंह कहलो और मृतकों के परिजन खुश नहीं हैं. कहलो का कहना है कि वे इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे.

2016 में सुनाई गई थी उम्रकैद की सजा 

31 साल पुराने मामले में गुरुवार को हुई सुनवाई के बाद एक बार फिर सिख समुदाय के लोगों के जख्म हरे हो गए हैं. बताते चलें कि इस मामले में सीबीआई जांच के बाद सभी पुलिसकर्मियों को साल 2016 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी और जुर्माना भी लगाया गया था.

मगर, 15 दिसंबर 2022 को लखनऊ बेंच ने जुर्माने की राशि को कम कर दिया और उम्रकैद की सजा को सात-सात साल की सजा में बदल दिया. कहलो ने कहा कि हम इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं. हम इसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील करेंगे.

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फर्जी मुठभेड़ मामलाः हाईकोर्ट ने 43 पुलिसकर्मियों की उम्रकैद को 7 साल की सजा में बदला

सिख तीर्थयात्रियों को बस से उताकर किया था एनकाउंटर 

बता दें कि पीलीभीत में 12 जुलाई 1991 की रात में थाना पूरनपुर-माधोटांडा, बिलसंडा और न्यूरिय क्षेत्र में 3 अलग-अलग जगहों पर 10 सिख तीर्थयात्रियों को पुलिस ने बस से उतारा था. इसके बाद पुलिस ने आतंकवादी करार देते हुए उनका एनकाउंटर कर दिया था. 

सिख तीर्थयात्री बिहार में पटना साहिब और महाराष्ट्र में नांदेड साहब के दर्शन कर वापस लौट रहे थे. इस घटना के बाद सिख समुदाय के लोगों के नाराजगी देखी गई थी. मृतकों में पीलीभीत के 3 और 7 पंजाब के सात सिख शामिल थे. 

मुख्य पैरोकार बोले- मामले को लेकर जाएंगे सुप्रीम कोर्ट

इस मामले के मुख्य पैरोकार हरजिंदर सिंह कहलो सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कह रहे हैं. उन्होंने फैसले के बाद कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे. फैसला से हम संतुष्ट नहीं हैं. एनकाउंटर में मारे गए नीरेंद्र सिंह की पत्नी जसबंत कौर फैसला आने के बाद रो पड़ीं.

नीरेंद्र सिंह की पत्नी जसबन्त कौर ने यह मेरे साथ न्याय नहीं हो रहा है. हम लोगों को सजा मिल रही है. कल आए फैसले से पहले वर्ष 2016 में लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने इन सभी आरोपी पुलिस कर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. उस फैसले से सिख समुदाय के लोग संतुष्ट थे.

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इस मामले में कहलो ने कहा कि नीरेंद्र सिंह मेरे रिश्तेदार हैं. एनकाउंटर में मारे गए थे. वह अपनी मां के साथ तीर्थ पर गए थे. बस में पीलीभीत और पंजाब के सिख थे. बस जब लौट रही थी तो बदायूं में बस को पीलीभीत पुलिस ने रोक लिया और 11 लोगों को बस से उतार लिया. इसके बाद सभी को अलग-अलग जगहों पर ले जाकर एनकाउंटर कर दिया. उनका आज तक पता नहीं लगा.

फर्जी मुठभेड़ मामलाः हाईकोर्ट ने 43 पुलिसकर्मियों की उम्रकैद को 7 साल की सजा में बदला

घटना के बाद सीबीआई जांच की उठाई थी मांग

कहलो ने कहा कि नीरेंद्र सिंह की मां ने मुझे घटना की जानकारी दी थी. इसके बाद मैंने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक से बात की. मगर, उन्होंने मुझे फटकार दिया और मुझे भी मारने की धमकी दी. इसके बाद लोगों से बात की.

इसके बाद इस मामले को सीबीआई जांच कराने का प्रयास किया. इसके बाद नीरेंद्र सिंह की मां को सुप्रीम कोर्ट ले गया, वहां उनका एफिडेविट लगवाया. फिर हमारी रिट पड़ गई. इसके बाद सीबीआई जांच के आदेश हुए.

सीबीआई जांच के बाद सभी पुलिसकर्मियों को साल 2016 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी और जुर्माना भी लगाया गया था. मगर, 15 दिसंबर 2022 को लखनऊ बेंच ने जुर्माने को कम कर दिया और उम्रकैद हटाकर 7 साल की सजा सुनाई.

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मारे गए लोगों की नहीं थी कोई क्राइम हिस्ट्री

कहलो ने कहा कि जो लोग उस दिन पीलीभीत के एनकाउंटर में मारे गए, उनकी कोई क्राइम हिस्ट्री नहीं थी. जो लोग पंजाब के थे, उन पर मुकदमे थे. पुलिस ने सभी को आतंकवादी बताकर मार दिया. इन लोगों ने इनाम के लालच और सिख समुदाय में दहशत फैलाने के लिए एनकाउंटर किया था. यह बात सुप्रीम कोर्ट में साबित हो गई थी कि इन लोगों ने फर्जी एनकाउंटर किया था.

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