उत्तर प्रदेश में मदरसों को हो रही विदेशी फंडिंग की जांच एसआईटी कर रही है. शुरुआती जांच में एसआईटी को पता चला है कि 100 से ज्यादा मदरसे ऐसे हैं, जिनको 2 सालों में डेढ़ सौ करोड़ से ज्यादा की विदेश से फंडिंग की गई है. हालांकि, एडीजी एटीएस की अगुवाई में एसआईटी की जांच अभी जारी है. मगर, समाजवादी पार्टी का आरोप है इस जांच से मुसलमान के प्रति नफरत दिखती है.
दरअसल, समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अमीक जमई ने आरोप लगाया है कि देश में निवेश लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अरब देशों के दौरे करते हैं. वे वहां के लोगों से मुलाकात करते हैं. तमाम बिजनेसमैन खासकर गुजरात से ताल्लुक रखने वाले व्यापारियों ने दुबई जैसे शहर में ही अपना दूसरा घर और दफ्तर बना लिया है.
'मुसलमानों के प्रति नफरत के सहारे कर रहे हैं राजनीति'
मगर, जब मदरसों में पढ़ने वाले गरीब और यतीम बच्चों में चंदा आता है, तो उसमें आतंकवाद नजर आता है. अमीक जमई ने आरोप लगाते हुए ये भी कहा कि बीजेपी और आरएसएस का मुसलमानों के प्रति नफरत है, जिसके सहारे वह अपनी राजनीति कर रहे हैं.
108 मदरसों में 150 करोड़ की फंडिग
बता दें कि इसी साल अक्टूबर में उत्तर प्रदेश सरकार ने एडीजी एटीएस और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अफसरों की तीन सदस्य एसआईटी गठित कर मदरसों की विदेशी फंडिंग की जांच के आदेश के दिए थे. जांच के दौरान 2 साल में 100 करोड़ से अधिक की फंडिंग का खुलासा हुआ. प्रदेश भर के 108 मदरसों में 150 करोड़ की फंडिग हुई, जिनमें केवल 80 मदरसों में 100 करोड़ की फंडिंग हुई.
SIT ने केंद्रीय खुफिया जांच एजेंसियों की मांगी मदद
SIT की जांच में बड़े पैमाने पर मदरसों में विदेशी फंडिंग के सुबूत भी मिले हैं. यूपी के बहराइच, सिद्धार्थ नगर, श्रावस्ती के साथ-साथ सहारनपुर, देवबंद, आजमगढ़, मुरादाबाद, रामपुर अलीगढ़ समेत दर्जन भर जिलों के मदरसों को खाड़ी देशों से बड़ी फंडिंग के सबूत मिले हैं. SIT ने अब यूपी मदरसों की जांच के लिए केंद्रीय खुफिया जांच एजेंसियों की भी मदद मांगी है.
ATS ने भी फंडिग का मांगा पूरा ब्यौरा
फंडिंग भेजने वाली संस्था कौन-सी है? कहां-से रकम भेजी गई? किस तरीके से रकम भेजी गई? रकम किस अकाउंट से भेजी गई? अब SIT इस तरह के सवालों के जवाब जानने की कोशिश करेगी. इसके अलावा फंडिंग मिलने के बाद रकम मदरसे में कहां खर्च हुई? खर्च की पूरी रसीद? खरीदारी का पूरा बिल? सभी जांच के दायरे में होगा. मदरसों में पढ़ने वाले कुल बच्चे और मिलने वाली फंडिंग के कनेक्शन की भी जांच होगी. ATS ने भी फंडिग का पूरा ब्यौरा मांगा है.