देश की राजधानी दिल्ली में बीते मई महीने में नए संसद भवन में प्रधानमंत्री मोदी ने सत्ता ट्रांसफर के प्रतीक सेंगोल को स्थापित किया था जिसने लोगों को खूब आकर्षित किया. अब प्रयागराज के म्यूजियम में उसी सेंगोल की प्रतिकृति रखी गई है जिसे देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है.
सेंगोल की प्रतिकृति को 25 सितंबर को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने जनता के देखने के लिए आधिकारिक तौर पर म्यूजियम में रखा था. अब उसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंच रहे हैं.
इसको लेकर प्रयागराज संग्रहालय के निदेशक राजेश प्रसाद ने कहा, 'सेंगोल' की प्रतिकृति में सब कुछ समान है, चाहे वह आयाम हो या वजन, उन्होंने कहा कि प्रतिकृति के लिए सोने की परत वाली पीतल की सामग्री का उपयोग किया गया है जिसे एक सप्ताह में बनाया गया है. असली 'सेंगोल' सोने की परत के साथ चांदी से बना है. प्रसाद ने कहा कि संग्रहालय में प्रतिकृति ने लोगों का ध्यान आकर्षित करना शुरू कर दिया है.
म्यूजियम के डायरेक्टर राजेश प्रसाद ने आगे कहा, 'जब तक सेंगोल को स्थानांतरित नहीं किया गया, तब तक स्थानीय लोगों को इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी. इसकी प्रतिकृति की स्थापना से उन्हें खुशी हुई है. पर्यटक अच्छी संख्या में संग्रहालय में आ रहे हैं और इसे देख रहे हैं. वे इस बात से भी खुश महसूस कर रहे हैं कि मूल 'सेंगोल' यहां से संसद में चला गया.
नए संसद भवन में रखा गया है असली सेंगोल
बता दें कि 28 मई को दिल्ली में नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान, प्रधानमंत्री ने 'संगोल' के सामने साष्टांग प्रणाम किया और हाथ में पवित्र राजदंड लेकर तमिलनाडु के विभिन्न साधु-संतों से आशीर्वाद मांगा था.
इसके बाद पीएम मोदी "नादस्वरम" की धुन और वैदिक मंत्रों के जाप के बीच एक जुलूस में 'सेंगोल' को नए संसद भवन तक ले गए और इसे लोकसभा कक्ष में अध्यक्ष की कुर्सी के दाईं ओर एक विशेष घेरे में स्थापित किया गया.
सत्ता ट्रांसफर का प्रतीक है सेंगोल
'सेंगोल', तमिलनाडु का एक ऐतिहासिक राजदंड है जिसे अंग्रेजों ने सत्ता के हस्तांतरण का प्रतिनिधित्व करने के लिए भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को दिया था, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नए संसद भवन में स्थापित करने से पहले इसे इलाहाबाद संग्रहालय में रखा गया था.
चोल-युग के समय का सेंगोल 1947 से ब्रिटिश सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक है. 'सेंगोल' की ऊंचाई लगभग 138.4 सेंटीमीटर है, और इसे 4 नवंबर, 2022 को राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली में स्थानांतरित कर दिया गया था.
अधिकारियों ने बताया कि प्रयागराज में आम बोलचाल की भाषा में 'सेंगोल' को 'राज दंड' कहा जाता था, जबकि संग्रहालय के रिकॉर्ड में इसका उल्लेख 'सुनहरी छड़ी' के रूप में किया गया है.