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ज्योति मौर्य से फोन चैट, महिला होमगार्ड को अकेले में बुलाना और 80 लाख दहेज... ऐसे फंसते जा रहे मनीष दुबे

SDM ज्योति मौर्य के साथ नाम जुड़ने के बाद चर्चा में आए होमगार्ड कमांडेंट मनीष दुबे की टेंशन बढ़ती ही जा रही है. उनके खिलाफ तीन शिकायतें आई थीं, जिनकी विभाग जांच कर रहा था. मनीष विभागीय जांच में दोषी पाए गए हैं. जानें कौन सी हैं वो तीन शिकायतें जिनकी जांच विभाग कर रहा था...

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मनीष दुबे और ज्योति मौर्य (फाइल फोटो)
मनीष दुबे और ज्योति मौर्य (फाइल फोटो)

SDM ज्योति मौर्य (SDM Jyoti Maurya) के साथ व्हाट्सएप चैट लीक (WhatsApp Chat Leak) होने के बाद चर्चा में आए महोबा के होमगार्ड जिला कमांडेंट मनीष दुबे (Manish Dubey) पर लगातार शिकंजा कसता जा रहा है. मनीष विभागीय जांच में दोषी पाए गए हैं. डीआईजी होमगार्ड संतोष सिंह ने अपनी जांच रिपोर्ट डीजी होमगार्ड बीके मौर्या को सौंप दी है. जिसमें मनीष दुबे को सस्पेंड (Suspend) करने की संस्तुति कर दी गई है. 

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दरअसल, मनीष दुबे पर कार्रवाई सिर्फ ज्योति मौर्य केस को लेकर नहीं हो रही है. बल्कि, दो अन्य महिलाओं ने उनके खिलाफ शिकायत की थी. इन तीनों केस में जांच के बाद ही मनीष दुबे को सस्पेंड करने की सिफारिश की गई है. जांच रिपोर्ट अब शासन को भेजी जाएगी जिसके बाद मनीष दुबे पर कार्रवाई तय होगी.

पहला केस: 
सोशल मीडिया सेंसेशन बने एसडीएम ज्योति मौर्य और आलोक मौर्य के मामले में जिला कमांडेंट मनीष दुबे की भूमिका पर सवाल खड़े हुए थे. ज्योति मौर्य के पति आलोक मौर्य ने डीजी होमगार्ड से शिकायत की थी. जिसके बाद डीआईजी होमगार्ड संतोष सिंह ने जांच शुरू की. जांच में मनीष दुबे को दोषी पाया गया है. जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि एसडीएम ज्योति मौर्य के साथ उनके संबंध हैं. इस वजह से विभाग की छवि धूमिल हुई है. 

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दूसरा केस:  
दूसरा मामला अमरोहा जिले का है. बताया जा रहा है मनीष दुबे के खिलाफ अमरोहा में एक महिला होमगार्ड ने आरोप लगाया था. महिला ने अपने शिकायती पत्र में कहा था कि  कमांडेंट मनीष दुबे उसे अकेले में मिलने के लिए बुलाते हैं. और जब वह मिलने नहीं गई तो उसकी ड्यूटी पर रोक लगा दी गई. महिला होम गार्ड ने इस मामले की शिकायत डीजी होम से भी की थी. महिला ने यह भी आरोप लगाया था कि शिकायत करने के बाद उसे धमकी भी दी जा रही थी. 

तीसरा केस: 
जांच रिपोर्ट में तीसरी शिकायत मनीष दुबे की पत्नी का भी जिक्र किया गया है. जिसमें मनीष दुबे की पत्नी ने जांच के दौरान लिखित बयान देकर आरोप लगाया कि शादी के बाद मनीष दुबे अब उससे 80 लाख रुपए दहेज मांग रहे हैं. हालांकि, एसडीएम ज्योति मौर्य के साथ मनीष दुबे का नाम जुड़ने के मामले में जब मीडिया ने उनसे बात की थी कि उन्होंने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया था. उनका कहना था कि ये मेरा पारिवारिक मामला है और वो इस मामले में कुछ भी नहीं कहेंगी.

ज्योति ने बयान देने से किया था इनकार
एसडीएम ज्योति मौर्य को भी प्रकरण में होमगार्ड विभाग ने बयान देने के लिए तलब किया था. उन्होंने कोई भी बयान देने से इनकार किया था , लेकिन बाद में डीआईजी होमगार्ड संतोष सिंह को लिखित बयान देते हुए कहा कि उनके पति आलोक मौर्य से उनका विवाद चल रहा है. जिसकी उन्होंने प्रयागराज के धूमनगंज थाने में एफआईआर दर्ज करवा दी है. मामला कोर्ट में लंबित है. उनको जो कुछ कहना होगा कोर्ट में कहेंगी.

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वहीं, दूसरी तरफ मनीष दुबे की पत्नी ने भी शुरुआत में अपना निजी मामला बताकर कुछ भी बयान देने से इनकार किया लेकिन बाद में मनीष दुबे की पत्नी की तरफ से भी दो पेज का लिखित बयान डीआईजी संतोष सिंह को दिया गया, जिसमें मनीष दुबे की पत्नी ने शादी के बाद दहेज मांगने का आरोप लगाया है. 

रिपोर्ट में चरित्र पर उठाया सवाल
फिलहाल मनीष दुबे की भूमिका को लेकर होमगार्ड विभाग की जांच पूरी हो गई है. जांच में होमगार्ड कमांडेंट मनीष दुबे को उत्तर प्रदेश राजपत्रित अधिकारी सेवा नियमावली के तहत विभाग की छवि धूमिल करने का दोषी पाया गया है. चरित्र संदिग्ध बताया गया है. जिसके आधार पर मनीष दुबे को निलंबित करने की सिफारिश की गई है.

अब शासन जांच रिपोर्ट के आधार पर मनीष दुबे पर कार्रवाई तय करेगा. माना जा रहा है कि शासन मनीष दुबे को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई के आदेश देगा.

लगता है फंस गया हूं: मनीष दुबे 
कुछ दिन पहले मनीष दुबे ने  कहा कि अगर मैं और ज्योति आम व्यक्ति होते तो इस केस पर जरूर बोलते. लेकिन जिस पद पर मैं हूं, कैमरे के सामने कुछ भी बोल नहीं सकता. इस केस के कारण ज्योति के साथ-साथ मेरा भी जीना मुहाल हो गया है. हम दोनों का तो कुर्सी पर बैठना ही गुनाह हो गया है

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उन्होंने कहा, ''मैं सॉफ्टवेयर इंजीनियर था, अच्छी नौकरी कर रहा था. लेकिन अब लगता है कि पता नहीं कहां आकर फंस गया हूं. 'आलोक कह रहा कि उसने ज्योति को पढ़ाया है. लोग भी यही कह रहे हैं, जबकि पढ़ाने-लिखाने का मतलब होता है बचपन से पढ़ाया-लिखाया जाए. जिस पोस्ट पर हम बैठे हैं, क्या सच में कोई हमें बना सकता है?''

मनीष दुबे ने आगे कहा, ''जो शख्स ज्योति को पढ़ाने-लिखाने का दावा कर रहा है, वो ये तक नहीं बता सकता कि कितने पेपर होते हैं. मुझे हैरानी होती है कि इस चीज को इतना क्यों बढ़ाया जा रहा है. ये तो किसी का पर्सनल मामला है. मैं खुद इस बारे में कोई बात नहीं करना चाहता. लेकिन इतना जरूर कहना चाहता हूं कि इससे हमारी प्रोफेशनल लाइफ खराब हो रही है. हमारे इस मामले में कुछ भी बोलने से समस्या सुलझेगी नहीं. बल्कि और उलझ जाएगी.''

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