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नफीस ने बनाई ऐसी बिरयानी कि अशरफ ने कर ली पार्टनरशिप, अतीक के फाइनेंसर नफीस बिरयानी की ये है कहानी

अतीक अहमद का सबसे प्रमुख फाइनेंसर नफीस बिरयानी पहले बेहद गरीब आदमी हुआ करता था और बिरयानी का ठेला लगाता था. अतीक के भाई अशरफ को उसके हाथ की बनी बिरयानी इस कदर भा गयी कि उसने प्रयागराज के सबसे पॉश इलाके सिविल लाइंस में उसकी दुकान खुलवा दी. इसके बाद वो धीरे-धीरे बड़ा आदमी बन गया.

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नफीस बिरयानी कैसे बना अतीक का फाइनेंसर
नफीस बिरयानी कैसे बना अतीक का फाइनेंसर

अतीक अहमद की हत्या के बाद अब उसके सबसे बड़े फाइनेंसर और करीबी नफीस बिरयानी की भी हार्ट अटैक से मौत हो गई. उमेश पाल हत्याकांड के बाद से नफीस बिरयानी जेल में बंद था. 

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उसे रविवार की रात को दिल का दौरा पड़ा था जिसके बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन वहां उसकी मौत हो गई. वो प्रयागराज के नैनी सेंट्रल जेल में बंद था. नफीस बिरयानी की अतीक अहमद के छोटे भाई अशरफ से गहरी दोस्ती थी. बाद में नफीस अतीक अहमद का भी करीबी बन गया और हर काम में पैसों से उनकी मदद करने लगा.

नफीस के नाम के साथ कैसे जुड़ा बिरयानी

ऐसे में हम आपको बताते हैं कि आखिर नफीस बिरयानी कैसे बड़ा आदमी बना और उसके नाम के साथ बिरयानी शब्द क्यों जुड़ गया. दरअसल प्रयागराज के करेली का रहने वाला नफीस शुरुआती दौर में बेहद गरीब था. वो अपना परिवार चलाने के लिए करेली में ठेले पर बिरयानी की दुकान करने लगा. ठेले पर बिरयानी बेचने के लिए उसकी बहन को अपने सोने के गहने तक बेचने पड़े थे लेकिन इसके बाद भी नफीस धंधा नहीं चल रहा था.

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कहा जाता है कि इसी दौरान एक दिन किसी काम से करेली पहुंचे अशरफ ने नफीस के ठेले पर बनी हुई बिरयानी खा ली. उसे बिरयानी का स्वाद इतना पंसद आया कि वो नफीस का मुरीद हो गया और प्रयागराज के पॉश इलाके सिविल लाइंस में उसकी नई दुकान खुलवा दी.

ऐसे बदली नफीस की किस्मत

यहीं से नफीस की दुकान फेमस हो गई जिसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा. उसके दुकान पर लोग दूर-दूर से बिरयानी खरीदने आने लगे. लजीज बिरयानी की वजह से अशरफ की उससे दोस्ती और मजबूत होती गई. इसके बाद नफीस धीरे-धीरे बड़े कारोबारी के तौर पर उभरने लगा. इसके बाद पूरे प्रयागराज में नफीस बिरयानी के नाम से उसने कई आउटलेट खोल लिए और उसका कारोबार बढ़ता गया.

इसके बाद नफीस बिरयानी बाहुबली अतीक और अशरफ के लिए काम करने लगा और उनका मुख्य फाइनेंसर बन गया. इसके बाद इसी साल 24 फरवरी को धूमनगंज इलाके में उमेश पाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई. 

नफीस की क्रेटा से आए थे उमेश पाल के हत्यारे

शूटर जिस क्रेटा कार से आए थे वह कार नफीस की ही थी. इस केस में नफीस भी फंस गया और पुलिस ने केस दर्ज कर उसे इलाहाबाद के नैनी सेंट्रल जेल भेज दिया जहां रविवार की रात को उसे दिल का दौरा पड़ा था. अस्पताल में नफीस की मौत हो गई. 

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