बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) प्रमुख मायावती ने शुक्रवार को वक्फ (संशोधन) विधेयक को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि लोगों की चिंताओं और शंकाओं को दूर करने के बाद ही इस विधेयक को पेश किया जाना चाहिए था.
उनकी यह टिप्पणी गुरुवार देर रात राज्यसभा में विधेयक पारित होने के बाद आई है. इससे एक दिन पहले ही इसे लोकसभा में मंजूरी मिली थी, जहां विपक्ष ने इसका कड़ा विरोध किया था.
मायावती ने हिंदी में एक्स पर पोस्ट किया, "वक्फ संशोधन विधेयक पर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को सुनने के बाद निष्कर्ष यह निकला है कि अगर केंद्र सरकार ने विधेयक को समझने के लिए लोगों को और समय दिया होता और इसे आगे लाने से पहले उनकी सभी चिंताओं का समाधान किया होता, तो यह बेहतर होता."
बीएसपी प्रमुख ने विधेयक को पारित करने में सरकार की "जल्दबाजी" पर निराशा व्यक्त की. उन्होंने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार ने जल्दबाजी में इस विधेयक को पेश किया और पारित किया, जो उचित नहीं है. अब जब यह पारित हो गया है, अगर सरकारें इसका दुरुपयोग करती हैं, तो बीएसपी मुस्लिम समुदाय के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी. दूसरे शब्दों में, पार्टी इस विधेयक का समर्थन नहीं करती है."
आपको बता दें कि गुरुवार को राज्यसभा में कई घंटे तक हुई चर्चा के बाद वक्फ संशोधन बिल पास हो गया. राज्यसभा में बिल के विरोध में 95 वोट पड़े और बिल के पक्ष में 128 वोट पड़े. इससे पहले बुधवार को लोकसभा में वक्फ बिल पास हुआ था. दोनों सदनों से बिल पास होने के बाद बिल अब राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा. राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ये बिल कानून की शक्ल ले लेगा.
उधर, विपक्ष मोदी सरकार पर आरोप लगा रहा था कि इस बिल के जरिए सरकार वक्फ की संपत्ति जब्त करना चाहती है. वहीं, बीजेपी का दावा है कि विपक्ष मुसलमानों को अपने सियासी फायदे के लिए गुमराह कर रहा है.