किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (लखनऊ) का ट्रॉमा और न्यूरोसर्जरी विभाग न सिर्फ ज़िंदगी की लड़ाई लड़ रहे लावारिस मरीजों का इलाज कर रहा है, बल्कि उन लोगों को उनके घर और परिवार तक पहुंचाने का नेक काम भी कर रहा है, जो अपनों से बिछड़ गए हैं. यह अभियान सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि नेपाल तक के मरीजों को उनके परिवार से मिलाया जा चुका है. जब अपनों ने साथ छोड़ दिया, तब KGMU उन बेसहारा लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आया.
हाल ही में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में भर्ती रीना देवी की कहानी दिल को छू लेने वाली है. एक सड़क हादसे में बुरी तरह घायल गर्भवती रीना देवी को ट्रॉमा सर्जरी विभाग ने तीन महीने तक अपनी देखरेख में रखा. उस मुश्किल वक्त में उनके साथ सिर्फ उनकी 14 साल की बेटी थी, जो अकेले ही मां की देखभाल में जुटी रही.
इस बीच ट्रॉमा सर्जरी विभाग के अध्यक्ष और CMS प्रो. बीके ओझा और उनकी टीम ने न सिर्फ रीना देवी का इलाज किया, बल्कि उनके खाने-पीने और हर जरूरत का भी पूरा ध्यान रखा. तीन महीने की लंबी जद्दोजहद के बाद जब रीना देवी पूरी तरह स्वस्थ हो गईं, तो उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाने की जिम्मेदारी वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी अतुल उपाध्याय और तकनीकी अधिकारी रूप सिंह को सौंपी गई. इंसानियत की मिसाल कायम करते हुए, उन्होंने अपने निजी वाहन से रीना देवी को गोंडा में उनके घर तक पहुंचाया.
KGMU के न्यूरोसर्जरी विभाग में कार्यरत वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी अतुल उपाध्याय बताते हैं कि अब तक सैकड़ों लावारिस मरीजों और याद्दाश्त खो चुके लोगों को उनके परिवार से मिलाया जा चुका है. इनमें नेपाल तक के लोग शामिल हैं.