कुछ दिनों पहले विवादों में रहने वाले सपा नेता मनीष जगन अग्रवाल ने आजतक से खास बातचीत की है. विवादित ट्वीट्स के चलते ही मनीष जगन अग्रवाल की गिरफ्तारी हुई थी. आजतक से बातचीत में मनीष ने कहा, बीजेपी को सिर्फ एक मोहरा चाहिए फंसाने के लिए. झूठे और फर्जी मुकदमे में मुझे फंसा दिया. जबकि मेरा इस मामले से कोई लेना देना नहीं है.
मनीष ने कहा, मैं समाजवादी पार्टी मीडिया सेल नहीं चलाता, इससे मेरा कोई लेना देना नहीं है. मैं एक आम कार्यकर्ता की तरह सपा का समर्पित कार्यकर्ता हूं. जमीनी स्तर पर क्या ग्राउंड के मुद्दों के संबंध में अपनी पार्टी को बताना यह सब मेरा काम है. इसके अलावा मैं और कोई काम नहीं करता. मेरे द्वारा कोई भाषा नहीं लिखी गई और अब बात क्यों हो रही है, तब क्यों नहीं हुई? जब बीजेपी ने लगातार अभद्र भाषा की. उनकी भाषा टोटी चोर, 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड से पहले कभी चर्चा ही नहीं हुई या फिर आज जब सपा के हैंडल से किया गया तब मीडिया का दिमाग गया.
भाजपा पर हमलवार दिखे मनीष जगन अग्रवाल
मनीष जगन अग्रवाल ने कहा कि मैं सवाल करना चाहता हूं कि जब पहले बीजेपी के लोग आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते हैं तो पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई. मीडिया ट्रायल में मुझे दोषी बनाया गया है. अपने खुद के अकाउंट से हुए आपत्तिजनक ट्वीट्स पर बोले पुलिस ट्विटर से जानकारी ले रही है, अगर मैं दोषी पाया गया तो सजा के लिए तैयार हूं. मेरे अकाउंट के फेक स्क्रीनशॉट वायरल किए गए. बीजेपी पहले भी ऐसा करती आई है. अमित मालवीय कितने फेक ट्वीट चलाते हैं क्या कभी इस पर कार्रवाई हुई?
'भाजपा ने की भद्दे ट्वीट्स की शुरुआत'
सपा नेता का कहना है कि अगर मेरे ट्वीट्स आपत्तिजनक हैं तो हम उसकी निंदा करते हैं. लेकिन यह देखना भी जरूरी है कि इस की शुरुआत कहां से हुई. इसकी शुरुआत बीजेपी की तरफ से हुई. उन्होंने कहा बीजेपी के प्रवक्ता पहले अपनी भाषा शैली पर ध्यान दें और उसे सुधारें. मनीष ने आरोप लगाया कि बीजेपी जब शब्दों में हार जाती है, तो पुलिस को आगे करती है. या तो शब्दों में लड़ाई लड़ लो, या पुलिसिया लड़ाई लड़ लो. अगर हम ऐसे ही मुकदमे दर्ज करना शुरू करें तो पुलिस के रिकॉर्ड भर जाएंगे.
महिला पर विवादित टिप्पणी करने को लेकर उन्होंने कहा कि एक ऋचा राजपूत पर मुकदमा दर्ज होने से क्या होता है. हमारे नेता लगातार पुलिस को और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को टैग करते रहे हैं लेकिन कोई संज्ञान नहीं लेता. खुद की गिरफ्तारी के बारे में उन्होंने कहा, सुबह-सुबह अचानक से पुलिस मेरे घर आई और जब मुझे पता चला कि बाहर पुलिस फोर्स आई हुई है तो मैंने कहा चलिए. क्योंकि मैं कानून पर विश्वास रखता हूं, मैं भागने वाले और डरने वालों में से नहीं हूं.
छोटे से कार्यकर्ता के लिए भी पहुंचे अखिलेश
साथ ही अखिलेश के पुलिस मुख्यालय पहुंचने पर मनीष जगन अग्रवाल ने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि एक-एक छोटे से कार्यकर्ता के लिए अखिलेश खड़े हुए. इसके लिए जीवनभर आभारी रहूंगा. अपनों के साथ खड़ा होना जानते हैं. अखिलेश कभी गलत चीज के साथ खड़े नहीं होते हैं. उन्हें पता था कि इसमें मेरा कोई और रोल इसलिए वो साथ खड़े हैं.
'हो सकता है भाजपा ही चला रही हो मीडिया सेल का अकाउंट'
गौरतलब है कि सपा ने अपने ही नाम से चल रहे इस ट्विटर अकाउंट से किनारा करते हुए कहा कि हो सकता है बीजेपी ही यह मीडिया सेल चलवा रही हो. वे अपने हीं लोगों को गाली बकते हैं जिससे असल मुद्दों पर चर्चा ना हो. अखिलेश के यह सब संज्ञान में होने या न होने पर बोले, मुझे जानकारी नहीं है कि अखिलेश जी की जानकारी में थी या नहीं.
इसके अलावा ऋचा राजपूत के मुद्दे पर मनीष जगन अग्रवाल ने कहा कि कौवा कान ले गया, सब कौवा देखने लग गए. ढूंढने से उन्हें मनीष जगन मिल गया, लेकिन असल मुद्दों पर बात नही हुई. मनीष ने कहा कि ऋचा मेरी बहन है और मैं बहन से यही कहूंगा कि कृपया अपनी भाषा को सुधारें. वह जिस दल में हैं, वह दल नही दलदल है. जितना जल्दी निकल जाएं बेहतर होगा, यह पार्टी केवल इस्तेमाल करती है.
ये है पूरा मामला
मनीष जगन अग्रवाल का नाम तब सुर्खियों में आया था जब 8 जनवरी को लखनऊ लखनऊ के हजरतगंज थाने की पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था. समाजवादी पार्टी के टि्वटर हैंडल से की गई अभद्र टिप्पणी को लेकर हजरतगंज कोतवाली में तीन केस दर्ज कराए गए थे. बताया गया कि मनीष जगन अग्रवाल ही सपा का टि्वटर अकाउंट हैंडल करते थे. इससे पहले 6 जनवरी को लखनऊ में बीजेपी युवा मोर्चा की सोशल मीडिया इंचार्ज डॉ. ऋचा राजपूत ने समाजवादी पार्टी मीडिया सेल नाम के टि्वटर हैंडल पर रेप और जान से मारने की धमकी दिए जाने पर मुकदमा दर्ज करवाया था. मनीष जगन के खिलाफ FIR में सपा के मीडिया समन्वयक आशीष यादव और पूर्व एमएलसी उदयवीर सिंह का नाम भी शामिल किया गया.