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तीन बार फेल हुई उमेश पाल के मर्डर की प्लानिंग, बरेली जेल में बंद अशरफ से क्या है हत्याकांड का कनेक्शन?

शूटरों ने उमेश पाल के मर्डर की एक-दो नहीं, बल्कि तीन बार कोशिश की, लेकिन तीनों बार प्लानिंग फेल हो गई. इसके बाद आखिर में 24 फरवरी की शाम उमेश पाल हत्याकांड को अंजाम दिया गया. शूटरों के नाम बरेली जेल में बंद अशरफ ने फाइनल किए थे. इसके लिए बाकयदा जेल में अशरफ ने शूटरों से 11 फरवरी को फाइनल मीटिंग की थी.

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बरेली जेल में बंद अशरफ ने ही शूटरों के नाम फाइनल किए थे
बरेली जेल में बंद अशरफ ने ही शूटरों के नाम फाइनल किए थे

प्रयागराज के उमेश पाल हत्याकांड की पुलिस परत दर परत जांच कर रही है. इसमें केस की तफ्तीश के दौरान सामने आया है कि उमेश पाल हत्याकांड में साजिश के तार साबरमती जेल में बंद अतीक अहमद से होकर बरेली जेल में बंद अशरफ तक फैले है. अशरफ से मुलाकात के तीसरे दिन ही शूटरों ने उमेश पाल की हत्या का प्रयास किया था. लेकिन शूटरों की यह कोशिश फेल हो गई.

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इसके बाद अतीक के इशारे पर शूटरों को फाइनल करने का जिम्मा अशरफ को मिला था और जैसे ही अशरफ ने शूटरों से मुलाकात की उसके तीसरे ही दिन उमेश पाल की जान लेने की कोशिश की गई थी. 

फिलहाल जेल प्रशासन ने बरेली जेल के तमाम सीसीटीवी खंगालने शुरू कर दिया है. जिसमें बताया जा रहा है कि अशरफ से मुलाकात करने के लिए मोहम्मद गुलाम और उसका करीबी बरेली जेल गए थे.

बताया जा रहा है उमेश पाल की हत्या करने वाले शूटरों का नाम अशरफ ने ही फाइनल किया था. अशरफ से शूटरों की फाइनल मीटिंग 11 फरवरी को बरेली जेल में हुई थी. बरेली जेल में अशरफ की मुलाकात में मददगार बंदी रक्षक शिवहरी अवस्थी और कैंटीन सप्लायर दयाराम को इसी सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है. स्थानीय चौकी इंचार्ज की तरफ से अशरफ और उसके साले सद्दाम और करीबी लल्ला गद्दी पर एफआईआर दर्ज करवाई गई है. 

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पुलिस सूत्र के अनुसार अशरफ की यह मीटिंग 11 फरवरी को हुई थी और यह मीटिंग मोहम्मद गुलाम और असद के साथ अशरफ के बीच हुई थी. 11 फरवरी को अशरफ से मीटिंग के तीसरे दिन ही यानी 14 फरवरी को शूटरों ने उमेश पाल की जान लेने की कोशिश की थी, लेकिन मौका नहीं मिला. दूसरी कोशिश 18 फरवरी को की गई. लेकिन उस दिन शिवरात्रि होने के चलते उमेश पाल के घर के बाहर वाली गली में ज्यादा भीड़ थी. इसलिए शूटर हिम्मत नहीं जुटा पाए. तीसरी कोशिश 21 फरवरी को हुई, शूटर उमेश पाल का पीछा करते हुए आए, लेकिन अटैक नही हो पाया. फिर आखिर में 24 फरवरी की शाम उमेश पाल हत्याकांड को अंजाम दिया गया.

बरेली जेल में अशरफ के मुलाकात में जेल कर्मचारियों की मिलीभगत का मामला सामने आने के बाद अब जेल मुख्यालय ने बरेली जेल में मुलाकात के सीसीटीवी व अन्य दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं कि आखिर यह मुलाकात किसने कब और किसकी आईडी पर करवाई थी.

अशरफ से शूटरों की मुलाकात कराने में मददगार दो आऱोपी गिरफ्तार)

वही, बरेली जेल में बंद अशरफ से गैर कानूनी तरीके से मुलाकात कराने में मददगार दो लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया गया है. बरेली की एसओजी ने बंदी रक्षक शिवहरी अवस्थी के साथ कैंटीन में सामान सप्लाई करने वाले नन्हे उर्फ दयाराम को गिरफ्तार किया है. ये लोग जेल स्टाफ की मदद से अशरफ के साले सद्दाम और उसके साथियों की बिना पर्ची के अशरफ से मुलाकात कराते थे. लंबे समय से अशरफ का साला सद्दाम बरेली के बारदारी थाना क्षेत्र के फाइक एनक्लेव में मुस्ताक के नाम पर किराए का मकान लेकर रह रहा था. एक हफ्ते में एक ही आईडी पर 6 से 7 व्यक्तियों को अशरफ से मिलवाया जाता था. उमेश पाल हत्याकांड में अशरफ भी नामजद आरोपी है. 

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