उमेश पाल हत्याकांड में पुलिस और एसटीएफ को अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन, बमबाज गुड्डू मुस्लिम के साथ ही शूटर साबिर और अरमान की तलाश है. इस बीच खुलासा हुआ है कि हत्याकांड में शामिल शूटर साबिर साये की तरह अतीक अहमद की बहन आयशा नूरी और पत्नी शाइस्ता परवीन के साथ प्रयागराज के कछार इलाके में छिप रहा था.
पिछले 30 दिनों शूटर साबिर, आयशा नूरी, शाइस्ता परवीन से साथ है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शूटर साबिर, आयशा नूरी, शाइस्ता परवीन प्रयागराज-कौशाम्बी के कछार के इलाके में लगातार लोकेशन बदल कर छिप रहे हैं. आयशा और शाइस्ता के साथ आधी दर्जन से ज्यादा महिलाएं भी है, जो बुर्का पहन कर आयशा और शाइस्ता के साथ रहती हैं.
फोन और नंबर बदल रहे हैं आरोपी
आयशा और शाइस्ता रोजाना फोन और नंबर दोनों बदल रहे है. साबिर और शाइस्ता की तलाश में जुटी पुलिस टीम अब इनके मददगारों को तलाशने में जुटी है. खैर पचास हजार की इनामी शाइस्ता की तलाश में पुलिस जगह-जगह दबिश दे रही है लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिल रहा. सवाल उठता है कि ऐसी कौन सी महफूज जगह पर शाइस्ता छिपी है?
शाइस्ता कहां है?
इसी सवाल के जवाब की तलाश में मंगलवार को पुलिस की टीम अतीक के गढ़ से करीब नौ किलोमीटर दूर मारिया डीह भरहठा पहुंची. पुलिस को शक था कि शाइस्ता इसी गांव में कहीं अंडरग्राउंड है. एक-एक घर में सर्च ऑपरेशन चलाया गया लेकिन शाइस्ता का कोई सुराग नहीं मिला. सवाल तस का तस है कि शाइस्ता कहां है?
20 से अधिक मददगारों की शिनाख्त
शाइस्ता की तलाश में चार राज्यों में य़ूपी की पुलिस छापेमारी कर रही है. यूपी के कौशांबी, ग्रेटर नोएडा और मेरठ, दिल्ली के ओखला, महाराष्ट्र के मुम्बई और पश्चिम बंगाल के कुछ ठिकानों पर यूपी पुलिस ने छापा मारा है. यही नहीं 20 से ज्य़ादा ऐसे लोगों को चिन्हित किया गया, जिन पर शक है कि उन्होंने शाइस्ता को छिपने में मदद की है.
गैंग की गॉडमदर थी शाइस्ता
इनमें एक बड़ा बिल्डर भी है और एक महिला डॉक्टर. बनारस में रहने वाले अतीक के बहनोई से भी पुलिस ने पूछताछ की है. शाइस्ता पर पुलिस ने 50 हजार का इनाम रखा है. बताया जाता कि अतीक के जेल जाने के बाद से शाइस्ता ही गैंग की कमान संभाल रही थी. अतीक के आईएस 227 गैंग में शाइस्ता को कोड वर्ड में गॉडमदर कहकर बुलाया जाता था.
शाइस्ता ही है अहम कड़ी
आरोप है कि उमेश पाल हत्याकांड में शाइस्ता ने सूत्रधार की भूमिका निभाई. सभी शूटरों को पैसे देने से लेकर मोबाइल और सिम उपलब्ध कराने तक. चूंकि अतीक, अशरफ और असद का सफाया हो चुका है इसलिए अब शाइस्ता ही वो कड़ी है जो अतीक आपराधिक नेटवर्क की जानकारी दे सकती है, इसीलिए पुलिस के लिए शाइस्ता का पकड़ा जाना जरूरी है.
चाहे बेटे का जनाजा हो या पति का.. शाइस्ता नहीं पहुंची. इस मामले में एक नया तर्क सामने आया है. बताया जाता है कि पति अतीक अहमद की हत्या के बाद शाइस्ता 4 महीने की इद्दत में है. इस्लाम में शरियत के मुताबिक, इद्दत में महिला के लिए गैर मर्दों से पर्दा भी जरूरी होता है.