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भारी सुरक्षा के बीच डॉन बबलू श्रीवास्तव बरेली से प्रयागराज रवाना, कोर्ट में होनी है पेशी

माफिया डॉन बबलू श्रीवास्तव का असली नाम ओम प्रकाश श्रीवास्तव है. वो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले का रहने वाला है. उसके पिता विश्वनाथ प्रताप श्रीवास्तव जीटीआई में प्रिंसिपल थे. बबलू का बड़ा भाई विकास श्रीवास्तव आर्मी में कर्नल है.

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माफिया डॉन बबलू श्रीवास्तव.
माफिया डॉन बबलू श्रीवास्तव.

अंडरवर्ल्ड डॉन बबलू श्रीवास्तव की सोमवार को प्रयागराज कोर्ट में पेशी होनी है. इसके लिए उसे भारी सुरक्षा के साथ बरेली से प्रयागराज ले जाया जा रहा है. इसमें पुलिस की चार गाड़ियां हैं. इस टीम को डिप्टी एसपी रैंक का अधिकारी लीड कर रहा है.

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बताते चलें कि माफिया डॉन बबलू श्रीवास्तव का असली नाम ओम प्रकाश श्रीवास्तव है. वो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले का रहने वाला है. उसके पिता विश्वनाथ प्रताप श्रीवास्तव जीटीआई में प्रिंसिपल थे. बबलू का बड़ा भाई विकास श्रीवास्तव आर्मी में कर्नल है.

एक छोटी सी घटना ने जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया

बबलू ने एक बार पेशी के दौरान खुद मीडिया के सामने खुलासा किया था कि वो अपने भाई की तरह सेना में अफसर बनना चाहता था. उसे आईएएस अधिकारी बनने की भी ललक थी. मगर, उसकी जिंदगी को कॉलेज की एक छोटी सी घटना ने पूरी तरह बदल दिया और वो कुछ और ही बन गया.

यह बबलू के खिलाफ पहला मुकदमा था

बबलू श्रीवास्तव की जिंदगी में सबकुछ ठीक चल रहा था. वो लखनऊ विश्वविद्यालय में लॉ का छात्र था. 1982 में वहां छात्रसंघ चुनाव हो रहे थे. बबलू का साथी नीरज जैन चुनाव में महामंत्री पद का उम्मीदवार था. प्रचार जोरों पर था. छात्र नेता एक दूसरे को हराने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार थे. 

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इसी दौरान दो छात्र गुटों में चुनावी झगड़ा हुआ. जिसमें किसी ने एक छात्र को चाकू मार दिया. घायल छात्र का संबंध लखनऊ के माफिया अरुण शंकर शुक्ला उर्फ अन्ना के साथ था. इस मामले में अन्ना ने बबलू श्रीवास्तव को आरोपी बनाकर जेल भिजवा दिया. यह बबलू के खिलाफ पहला मुकदमा था. यहीं से उसके मन में नफरत की आग जलने लगी थी.

अन्ना का गिरोह उस पर नजर लगाए बैठा था

बबलू श्रीवास्तव कुछ दिन बाद जमानत पर छूटकर बाहर आ गया. लेकिन अन्ना का गिरोह उस पर नजर लगाए बैठा था. पुलिस ने कुछ दिन बाद फिर से उसे अन्ना के कहने पर स्कूटर चोरी के झूठे आरोप में बबलू को जेल भेज दिया. इस घटना से नाराज घरवालों ने उसकी जमानत भी नहीं कराई. 

इसके बाद बबलू को दो हफ्ते जेल में रहना पड़ा. उसके बाद वाहन चोरी की की वारदातों में बबलू का नाम आ गया. इस बात परेशान होकर बबलू ने अपना घर छोड़ दिया. उसने एक हॉस्टल में रहने के लिए कमरा ले लिया. इसी दौरान वह अन्ना के विरोधी माफिया रामगोपाल मिश्र के सम्पर्क में आ गया और उसके लिए काम करने लगा. यही वो वक्त था जब बबलू ने अपराधी की दुनिया में कदम रख दिया था. अब वह पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहता था.

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