यूपी एटीएस के हाथ बड़ी सफलता लगी है. एटीएस ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) से मिलकर देश विरोधी और आपराधिक गतिविधियां अंजाम देने वाले वांटेड तहसीम उर्फ मोटा को मुजफ्फरनगर के बुढाना से गिरफ्तार किया है. तहसीम मूल रूप से शामली का रहने वाला है. गिरफ्तार तहसीम ने पूछताछ में बताया कि वह और उसका भाई कलीम पाकिस्तान आते-जाते रहते थे. पाक में ही उनकी ISI के कुछ हैंडलर से जान पहचान हो गई थी.
गुरुवार (11 जनवरी) को STF के अधिकारी ने बताया कि अगस्त 2023 में शामली कोतवाली क्षेत्र से 6 लाख के नकली नोट के साथ इमरान नाम के शख्स को गिरफ्तार किया गया था. इस मामले में तहसीम उर्फ मोटा के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया था. इसके अलावा तहसीम के भाई कलीम को भी गिरफ्तार किया गया था, जिसका संपर्क ISI से होना पाया गया. हालांकि, तब तक तहसीम फरार चल रहा था. उसकी तलाश में टीमें लगी हुई थीं. अब उसे पकड़ने में सफलता मिली है.
तहसीम और कलीम पाकिस्तान आते-जाते रहते थे
अधिकारी ने आगे बताया कि तहसीम और कलीम पाकिस्तान आते-जाते रहते थे. पाकिस्तान में उनकी ISI के कुछ हैंडलरों से जान पहचान हो गई थी. जिन्होंने दोनों भाइयों को रुपयों का लालच देकर कहा कि तुम लोग भारत में जिहाद फैलाओ, हम तुम्हें असलहा, बारूद के साथ आर्थिक मदद भी देंगे. साथ ही भारत में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए लोगों को तैयार करो.
गिरफ्तार तहसीम और कलीम फर्जी सिम से व्हाट्सऐप यूज करते थे और भारत में बैठकर ISI एजेंट दिलशाद उर्फ मिर्जा से संपर्क कर सवेंदनशील सूचनाएं भेजते थे. तहसीम 2002 में पाकिस्तान पान-कत्था, मसाला बेचने गया था. इसके बाद वह ISI के साथ मिलकर फेक करेंसी और ड्रग्स की भारत में सप्लाई करने लगा था.
पाकिस्तान में है रिश्तेदारी
बताया गया कि तहसीम 2002 में पाकिस्तान कोटाद्दू अपने रिश्तेदार (पिता की बुआ) के यहां गया था. तहसीम वहां पर पान, कत्था आदि बेचने के बहाने गया था. कोटाद्दू में वो अपने रिश्तेदार के पास करीब 10-15 दिन ही रहा, बाकी 15-20 दिन वह लाहौर में हमीदा के यहां चला गया था. हमीदा मूल रूप से कैराना (जनपद शामली) की रहने वाली है.
दरअसल, इकबाल काना जो कैराना का रहने वाला है, काफी वर्ष पहले आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त होने के बाद पाकिस्तान भाग गया था. उक्त गतिविधियों में हमीदा भी इकबाल काना की सहयोगी रही थी. पकड़े जाने के डर से वह भी इकबाल की सहायता से पाकिस्तान भाग गई थी. हमीदा के माध्यम से तहसीम की मुलाकात पकिस्तान में इकबाल काना से हुई थी.
फेक करेंसी की तस्करी
लाहौर में हमीदा के यहां रहते हुए तहसीम की मुलाकात लाहौर के ड्राई फूड की दुकान करने वाले इकबाल काना के सहयोगी केसर से हो गई. केसर ने उसे नकली नोट सप्लाई करने के काले धंधे में लगाया था. केसर के माध्यम से तहसीम की जान पहचान दिलशाद मिर्जासे हुई थी. दिलशाद ने उसे देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रेरित किया.
पाकिस्तान से वापस आने के बाद इकबाल काना और केसर ने तहसीम को फोन कर नकली करेंसी भेजना शुरू कर दिया. हर खेप में 2 लाख से लेकर 7 लाख रूपये तक की रकम भेजते थे. तहसीम कभी दिल्ली तो कभी अमृतसर से इसे रिसीव करता था. इस बीच कई लोग इस धंधे में रंगे हाथ पकड़े और परत दर परत खुलासा होता गया.