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यूपी उपचुनाव: अखिलेश के PDA कार्ड के जवाब में बीजेपी ने चला OBC दांव

समाजवादी पार्टी ने इन उपचुनाव में एक बार फिर एग्रेसिव पीडीए कार्ड खेलते हुए सबसे ज्यादा 9 में से चार सीटों फूलपुर, कुंदरकी, सीसामाउ और मीरापुर पर मुस्लिम प्रत्याशियों को उतारा है, दो सीटों पर दलित और 3 सीटों पर ओबीसी उम्मीदवारों पर दांव लगाया है. जबकि भाजपा-आरएलडी गठबंधन ने 9 में से 6 सीटें दलित और पिछड़ों को दी हैं, जबकि तीन सीटों पर ब्राह्मण और ठाकुर चेहरों को टिकट दिया है.

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अखिलेश यादव और सीएम योगी आदित्यनाथ. (फाइल फोटो)
अखिलेश यादव और सीएम योगी आदित्यनाथ. (फाइल फोटो)

यूपी की नौ विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के चलते प्रदेश भर में सियासी पारा चढ़ गया है. इन उपचुनाव में NDA ने ओबीसी पर अपना दांव लगाया है, जबकि सपा ने पीडीए कार्ड खेला है. सपा प्रमुख अखिलेश का कहना है कि यूपी में पीडीए कार्ड चलेगा.

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समाजवादी पार्टी ने इन उपचुनाव में एक बार फिर एग्रेसिव पीडीए कार्ड खेलते हुए सबसे ज्यादा 9 में से चार सीटों फूलपुर, कुंदरकी, सीसामाउ और मीरापुर पर मुस्लिम प्रत्याशियों को उतारा है, दो सीटों पर दलित और 3 सीटों पर ओबीसी उम्मीदवारों पर दांव लगाया है. 

इसके इतर सपा ने अयोध्या की तर्ज पर गाजियाबाद में भी प्रयोग किया है. उन्होंने लोकसभा चुनाव में जिस तरह से फैजाबाद सीट पर दलित चेहरे अवधेश प्रसाद को उतारा था. इसी तरह गाजियाबाद में भी दलित चेहरे को उतारा है.

गाजियाबाद सदर सीट पर कमजोर रही है सपा

सपा जिसे सबसे कमजोर सीट मान रही है वह गाजियाबाद सदर है, क्योंकि सपा इस सीट पर कभी नहीं जीती है. इसलिए अखिलेश यादव ने यहां से जाटव बिरादरी के सिंह राज जाटव को अपना उम्मीदवार बनाया है और पूरी कोशिश है कि गाजियाबाद में दलित-मुस्लिम के समीकरण पर चुनाव को केंद्रित किया जाए. वहीं, बसपा ने इस सीट से वैश्य समाज के चेहरे को मैदान में उतारा है.

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सपा की कोशिश है कि पीडीए के नाम पर चुनाव हो और वह ज्यादा-से-ज्यादा सीटें जीतने में कामयाब रहे, लेकिन अगर कहीं कोई सीट जीतने की संभावना नहीं बनती तो उसे सीट पर दलित और पिछड़ों को एक संदेश जरूर दिया जाए.

इसी तरह अलीगढ़ की सुरक्षित खैर सीट पर कांग्रेस से हाल ही में सपा में शामिल हुईं चारु कैन को अपना उम्मीदवार बनाया है. अभी कुछ हफ्ते पहले ही चारु कैन ने बीएसपी को छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा था. दरअसल, चारु जाटव समाज से आती हैं, लेकिन अब वह जाट समाज से ताल्लुक रखती हैं. इसलिए जाटव और जाटों के समीकरण को साधने की कोशिश इंडिया ब्लॉक ने की है.

NDA ने 6 दलित और OBC को दिया टिकट

उधर आरएलडी ने भी अपनी एकमात्र सीट मीरापुर पर अपने उम्मीदवार का ऐलान कर दिया है. आरएलडी ने मिथलेश पाल को अपना उम्मीदवार बनाया है. वहीं, भाजपा-आरएलडी गठबंधन ने 9 में से 6 सीटें दलित और पिछड़ों को दी हैं, जबकि तीन सीटों पर ब्राह्मण और ठाकुर चेहरों को टिकट दिया है.

इस बार का मुकाबला दिलचस्प होने वाला है अखिलेश यादव इसे पीडीए बनाम भाजपा का नाम दे रहे हैं, जबकि भाजपा इस बार ओबीसी को ही केंद्र में मानकर पूरा चुनाव लड़ रही है.

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