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यूपी में 39 साल पहले हुई SHO की हत्या में कोर्ट ने 9 लोगों को दी आजीवन कारावास की सजा

यूपी के जौनपुर में करीब 39 साल पहले ड्यूटी के दौरान एसएचओ की हुई हत्या के मामले में कोर्ट ने 9 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. कोर्ट ने दोषियों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. एसएचओ की हत्या उस वक्त की गई थी जब वो जमीन विवाद के मामले को सुलझाने गए थे.

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कोर्ट ने दोषियों को सुनाई आजीवन कारावास की सजा
कोर्ट ने दोषियों को सुनाई आजीवन कारावास की सजा

यूपी के जौनपुर में साल 1985 में पुलिस के एक एसएचओ की हत्या में कोर्ट ने 9 लोगों को दोषी ठहराया है. 39 साल पुराने इस मामले में कोर्ट ने सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है.

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इस मामले को लेकर सरकारी वकील सतीश चंद्र पांडे ने बताया कि दिसंबर 1985 में सुरेरी पुलिस स्टेशन के SHO बब्बन सिंह की हत्या कर दी गई थी. पांडे ने कहा, 'जिला जज वाणी रंजन अग्रवाल की अदालत ने हत्या के इस मामले में नौ लोगों को दोषी ठहराया. कोर्ट ने दोषियों को आजीवन कारावास और 10,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई.'

1985 में हुई थी एसएचओ की हत्या

सरकारी वकील ने बताया कि 18 दिसंबर 1985 को SHO बब्बन सिंह सिरोही पुरवा में जमीन पर कब्जे के एक मामले को सुलझाने गए थे, तभी गुस्साए ग्रामीणों ने उन पर हमला कर दिया था. 

पांडे ने कहा, नौ आरोपियों की सुनवाई के दौरान मौत हो गई और आठ को अदालत ने बरी कर दिया है. जानकारी के मुताबिक जब विवाद सुलझाने एसएचओ पहुंचे थे तो उन्हें खेत के पास आरोपी मानिकचंद, जयप्रकाश, श्रीराम, ओम प्रकाश, उत्तम, मोहन और अन्य लोगों ने घेर लिया और पुलिस टीम पर हमला कर दिया था. आरोपी बलिराम को छुड़ाने का प्रयास करने लगे. 

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जयप्रकाश ने कट्टे से दारोगा अमरनाथ पर फायर किया. थाना अध्यक्ष बब्बन सिंह के झुकने के कारण गोली सुखनंदन को लग गई और उसकी मौके पर मौत हो गई. इसके बाद आरोपियों द्वारा बब्बन सिंह पर ईंट से हमला किया गया था जिसमें उनकी भी मौत हो गई थी.

घटना के दौरान आरोपी बलिराम ने थाना अध्यक्ष अमरनाथ की पिस्टल, मैगजीन और गोली भी लूट ली थी. पुलिस द्वारा जब मौके का निरीक्षण किया गया तो उसे खून से सनी लाठी, ईंट के टुकड़े और कारतूस बरामद हुए थे.

सरकारी वकील ने कहा कि बाद में बब्बन सिंह की ज्यादा चोट लग जाने की वजह से मौत हो गई थी. पुलिस ने इस मामले 60 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी और 26 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था. उन्होंने बताया की इस मामले में पुलिसकर्मियों पर भी क्रॉस केस दायर किया गया था लेकिन साक्ष्य के अभाव में उनको बरी कर दिया गया.


 

इनपुट - आदित्य भारद्वाज
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