मधुमिता शुक्ला हत्याकांड मामले में हाल ही में रिहा हुए यूपी सरकार के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी अपहरण मामले में कोर्ट में पेश नहीं हुए. यह मामला 22 साल पुराना है. बस्ती के एक व्यापारी के बेटे के अपहरण मामले में अमरमणि त्रिपाठी को आरोपी बनाया गया है.
अमरमणि त्रिपाठी को इस मामले में बुधवार को कोर्ट में पेश होना था, लेकिन खराब तबीयत की वजह से वो कोर्ट में पेश नहीं हो पाए. बीते 16 अक्टूबर को MP-MLA कोर्ट के एक जज ने कड़ा रुख अपनाते हुए बस्ती के एसपी को आदेश दिया था कि वह हर हाल में अमरमणि त्रिपाठी को कोर्ट में पेश करें.
अमरमणि के वकील ने दायर किया है हलफनामा
हालांकि बीते बुधवार को उनके वकील ने कोर्ट में हलफनामा दायर करते हुए कहा कि अमरमणि त्रिपाठी के खिलाफ न्यायालय ने जो वारंट जारी किया है, वह गैरकानूनी है क्योंकि जिन धाराओं में अमरमणि को वारंट भेजा गया है, उसमें पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट ही दायर नहीं की है. उन्होंने आगे कहा कि जो आदेश न्यायालय ने पारित किया है उसमें कुछ कानूनी पेच हैं, जिसे न्यायालय द्वारा फिर से देखना चाहिए और यह कहीं ना कहीं लिपिकीय त्रुटि हैं, जिसकी वजह से अमरमणि त्रिपाठी के खिलाफ यह वारंट जारी किया गया है.
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करीब 22 साल पुराना है मामला
अमरमणि को जिस मामले में वारंट जारी हुआ है, वो केस साल 2001 का है. उस समय बस्ती कोतवाली क्षेत्र में बिजनेसमैन धर्मराज गुप्ता के बेटे का अपहरण कर लिया गया था. बाद में व्यापारी के बेटे को तत्कालीन विधायक अमरमणि के लखनऊ स्थित घर से बरामद किया गया था.
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अमरमणि समेत आधा दर्जन लोग बनाए गए आरोपी
इस मामले में अमरमणि समेत आधा दर्जन से ज्यादा लोग आरोपी बनाए गए थे. इसके बाद लगातार बस्ती के एमपी-एमएलए कोर्ट में इस मामले का ट्रायल चल रहा था, जिसमें वारंट जारी होने के बाद भी लगातार पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी न्यायालय में गैरहाजिर चल रहे थे. जिस पर कोर्ट ने बस्ती के पुलिस अधीक्षक को यह आदेश दिया था कि वह अमरमणि को गिरफ्तार कर एक नवंबर को कोर्ट में पेश करें, लेकिन खराब तबीयत की वजह से और मेडिकल कॉलेज में भर्ती होने के वजह से अमरमणि त्रिपाठी आज भी बस्ती के न्यायालय में पेश नहीं हुए.
हालांकि जिस तरह अमरमणि के वकील ने इस मामले में नया एफिडेविट दायर किया है, उससे यही लगता है कि आने वाले समय में अपहरण कांड में नया मोड सामने आ सकता है.