लखनऊ. यूपी निकाय चुनाव में एक बार फिर पेच फंस सकता है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने यूपी सरकार से गुरुवार को OBC कमीशन की रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है. जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मनीष कुमार की बेंच ने एक याचिका पर नोटिस जारी करते हुए सरकार से यह रिपोर्ट मांगी है. इस मामले में कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई होगी.
दरअसल, लखीमपुर खीरी के रहने वाले विकास अग्रवाल ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर निघासन नगर पंचायत चुनाव में आरक्षण को लेकर जारी सरकार की अधिसूचना को चुनौती दी है.
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील गौरव मेहरोत्रा ने कोर्ट में कहा कि कमीशन की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं है. मेहरोत्रा ने कहा कि याचिकाकर्ता ने बार-बार जिलाधिकारी कार्यालय में आवेदन किया, लेकिन उन्हें इसकी कॉपी नहीं दी गई.वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता ने रिपोर्ट की प्रति के लिए आवेदन नहीं किया था और इसलिए उन्हें यह नहीं दी गई.
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क्या अटक सकते हैं चुनाव?
उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले महीने निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण को लेकर गठित आयोग की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया था. इसके बाद सरकार की ओर से निकाय चुनाव के लिए आरक्षण सूची जारी की गई थी. माना जा रहा है कि नई सूची के बाद मई के पहले हफ्ते में चुनाव कराए जा सकते हैं. हालांकि, हाईकोर्ट ने अगर इसपर कोई फैसला दे दिया, तो फिर चुनाव में अड़ंगा लग सकता है.
पिछले साल दिसंबर में होना था चुनाव
असल में यूपी की 760 नगर निकायों में नगर निगम के मेयर, नगर पालिका-नगर पंचायत के अध्यक्ष और पार्षद सीटों के लिए पिछले साल दिसंबर में ही चुनाव कराए जाने की प्लानिंग थी. राज्य सरकार ने निकाय चुनाव के लिए सीटों का आरक्षण भी जारी कर दिया था लेकिन आरक्षण को लेकर मामला हाई कोर्ट चला गया. हाई कोर्ट ने बगैर ओबीसी आरक्षण के तत्काल चुनाव कराने का आदेश दिया तो यूपी सरकार इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यूपी सरकार ने रिटायर्ड जज राम औतार सिंह की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय ओबीसी आयोग का गठन किया था, जिसने अपनी सर्वे रिपोर्ट अब सरकार को सौंप दी है. उस रिपोर्ट को कोर्ट ने भी स्वीकार कर लिया है और अब जल्द ही राज्य में निकाय चुनाव होने जा रहे हैं.