यूपी के मिल्कीपुर में हुए उप-चुनाव में बीजेपी को जबरदस्त जीत मिली है. इस जीत ने फैजाबाद सीट पर लोकसभा चुनाव (2024) में मिली जख्म पर मरहम लगा दिया है. लोकसभा चुनाव में फैजाबाद सीट से सपा उम्मीदवार अवधेश प्रसाद ने जीत हासिल की थी, जिसका खूब प्रचार-प्रसार किया जा रहा था, वहीं अखिलेश यादव ने उन्हें तरजीह देते हुए लोकसभा में राहुल गांधी के साथ पहली पंक्ति में बैठाया.
न्यूज एजेंसी की खबर के मुताबिक उप चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद पार्टी के कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह नजर आ रहा है. वही जीत के बाद कार्यकर्ताओं ने कहा कि हमने फैजाबाद की हार का बदला लिया है. अयोध्या के BJP प्रभारी सूर्य प्रताप शाही ने इस जीत पर कहा कि 2024 में झटके के बाद हमने जमीन पर काम किया.
खास वर्ग के लोंगों को उम्मीदवार बनाया
चंद्रभानु पासवान ने मिल्कीपुर उपचुनाव में 61,710 वोटों के अंतर से जीत हासिल की, उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी के अजीत प्रसाद को हराया है. इस चुनाव में दोनों पार्टियों ने क्षेत्र की प्रमुख दलित उपजाति पासी को उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया था. पिछले आम चुनाव की हार बीजेपी के लिए हैरान करने वाली थी, जो कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के महज पांच महीने बाद हुई थी.
यूपी बीजेपी के सचिव अभिजात मिश्रा ने बताया कि हम घर-घर गए, समुदाय के सदस्यों को सम्मानित किया और हमारे नेतृत्व की उनके प्रति अटूट प्रतिबद्धता के प्रमाण के रूप में उन्हें संविधान की एक प्रति दी. दलितों और ओबीसी को एहसास हुआ कि उन्हें विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने 2024 में धोखा दिया. उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी की बड़ी जीत अब यह साबित करती है.
मिल्कीपुर चुनाव जितने से बढ़ा उत्साह
बीजेपी के एक अन्य पदाधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शानदार नेतृत्व में केंद्र में लगातार तीसरी बार चुनाव जीतने के बावजूद, ताने अक्सर मिलते रहते थे और अयोध्या की हार हमें अक्सर परेशान कर रही थी. उन्होंने कहा कि पार्टी को विपक्ष के दलित विरोधी प्रचार का मुकाबला करने और यह साबित करने के लिए भी कड़ी मेहनत करनी पड़ी कि सपा की फैजाबाद जीत महज एक भूल थी. उप-चुनाव में मिली जीत की वजह से पार्टी के अंदर और उत्साह बढ़ गया है.
पार्टी के एक नेता ने कहा यह एक प्रतिष्ठा वाला चुनाव था और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगे बढ़कर नेतृत्व किया. दिल्ली चुनाव में भाजपा की जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण में मिल्कीपुर की जीत का भी जिक्र हुआ.
लोगों का बीजेपी पर विश्वास है
चंद्रभानु ने कहा मिल्कीपुर में हमारी जीत का अंतर 2024 में फैजाबाद में सपा की जीत से अधिक है. इससे पता चलता है कि लोगों का भाजपा नेतृत्व में विश्वास है. यूपी के अल्पसंख्यक मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि मुसलमानों ने भी बीजेपी को वोट दिया. उन्होंने कहा कि मैंने मिल्कीपुर में प्रचार किया, जहां लगभग 38,000 मुस्लिम हैं, जिनमें से कई ने डबल इंजन सरकार की नीतियों का समर्थ किया, लेकिन मुझे समाजवादी पार्टी की एक भी बैठक वहां नजर नहीं आई, जहां कांग्रेस नेताओं को मंच साझा करते देखा गया हो. आपने देखा कि कैसे आप और कांग्रेस ने दिल्ली में एक-दूसरे के खिलाफ लड़ाई लड़ी और वहां सपा ने कांग्रेस के मुकाबले आप का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि ये गठबंधन टूट रहा है.
1960 के दशक से दलित-ओबीसी बहुतायत वाली मिल्कीपुर सीट कम्युनिस्टों का गढ़ रही है. वामपंथियों के अलावा, यहां सपा ने पांच बार, भाजपा और उसके पूर्ववर्ती जनसंघ ने तीन बार, कांग्रेस ने दो बार और बसपा ने एक बार जीत हासिल की है.
सपा ने सवाल उठाया
सपा की मिल्कीपुर हार ने BSP को भी अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी पर कटाक्ष करने का मौका दे दिया. पहले, सपा अक्सर अपनी हार के लिए बसपा को जिम्मेदार ठहराती थी, लेकिन बसपा मिल्कीपुर से चुनाव नहीं लड़ती थी. फिर सपा को इतनी बड़ी हार झेलनी पड़ी. वही SP ने अपनी हार के लिए भाजपा द्वारा आधिकारिक मशीनरी में धांधली को जिम्मेदार ठहराया.