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योगी का चेहरा, माफियाराज खात्मे का दांव... मेयर चुनावों में कैसे बीजेपी ने किया क्लीन स्वीप?

उत्तर प्रदेश नगर निकाय चुनाव के नतीजे आ गए हैं. बीजेपी ने नगर निगमों की सभी 17 सीटों पर क्लीन स्विप मारा है. आइए जानते हैं कि यूपी नगर निकाय चुनाव में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत की वजह क्या रही? किसके चेहरे पर वोटिंग हुई और 2024 के लोकसभा चुनाव पर इन नतीजों का क्या प्रभाव पड़ेगा?

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सीएम योगी आदित्यनाथ और दोनों डिप्टी सीएम (फाइल फोटो)
सीएम योगी आदित्यनाथ और दोनों डिप्टी सीएम (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश के नगरीय निकाय चुनाव में बीजेपी ने नया इतिहास रच दिया है. ट्रिपल इंजन का नारा देकर चुनाव लड़ने वाली बीजेपी ने 17 नगर निगम के मेयर पदों पर भगवा लहरा दिया है. कई नगर निगमों के पार्षद पदों पर भी भाजपा ने भारी जीत हासिल करते हुए पूर्ण बहुमत हासिल किया है. यूपी की 'लोकल सरकार' में इस जीत से जहां मिशन लोकसभा के लिए कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ेगा... वहीं आगे की रणनीति को धार देने में भी पार्टी को सफलता मिलेगी.

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2017 के नगरीय निकाय चुनाव के समय यूपी में नगर निगम की 16 सीटें थे, जिनमें से भाजपा ने 14 हासिल की थी. मेरठ, अलीगढ़ पर बसपा ने कब्जा किया था. इस बार शाहजहांपुर नया नगर निगम बना था. बीजेपी की रणनीति पुरानी सीटों पर रणनीति को क़ायम रखते हुए शहाजहांपुर के लिए किसी भी तरह से जीत का फ़ॉर्म्युला निकालना था. पार्टी ने हमेशा की तरह माइक्रो मैनेजमेंट करते हुए योगी सरकार के मंत्रियों और पार्टी के पदाधिकारियों को अलग-अलग नगर निगम और नगर पालिका परिषद की जिम्मेदारी सौंपी.

बीजेपी ने कैसे बनाई थी रणनीति?

शुरू से ही बीजेपी की रणनीति एक-एक सीट के जातीय समीकरण को देखते हुए अलग-अलग तय हुई. पहले जीती 14 सीटों में व्यूह रचना की गयी. कहां कौन विरोधी भारी पड़ सकता है? इसको देखते हुए बैठकों में ये तय किया गया किस तरह की रणनीति होगी. बीजेपी की एक रणनीति दूसरे दलों के प्रभावशाली नेताओं और ख़ास तौर पर जिताऊ प्रत्याशियों को अपने पाले में करना भी था. 

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दूसरे दल के जिताऊ नेताओं को तरजीह

शाहजहांपुर नया नगर निगम बना था. पार्टी के तीन-तीन मंत्रियों पर उस सीट को जितवाने की ज़िम्मेदारी थी. पार्टी ने समाजवादी पार्टी की घोषित प्रत्याशी और चार दशक से सपा के साथ रहे पूर्व सांसद राममूर्ति वर्मा की बहू अर्चना वर्मा को ऐन वक्त पर पार्टी में शामिल करवाकर सबको चौंका दिया. इसी तरह नगर पालिका में भी जगह-जगह दूसरी पार्टियों के नेताओं को बीजेपी में शामिल करवाकर पार्टी ने जीत की रणनीति बनायी.

पसमांदा मुस्लिमों पर भरोसा

बीजेपी ने इस बार मुस्लिम विशेषकर पसमांदा मुस्लिम पर भी दांव खेला. जगह-जगह नगर पालिका और नगर पंचायत में मुस्लिम प्रत्याशी उतारे. ये पार्टी कि छवि और सर्वस्वीकार्यता को बताने में एक क़दम साबित हुआ. साथ ही आने वाले समय में बीजेपी की रणनीति का भी इसने संकेत दिया. शहरों के चुनाव में कई जगह शहरी पढ़े लिखे मुस्लिम युवा भी बीजेपी की तरफ़ जाते दिखे. हालांकि वोट के लिहाज़ से अभी इसका आकलन होना बाक़ी है.

सीएम योगी ने उठाया ये मुद्दा

भाजपा ने शाहजहांपुर में तो जीत हासिल की ही... साथ में अलीगढ़ और मेरठ सीट बसपा से छीन कर नगर निगम में क्लीन स्वीप कर दिया. पार्टी की रणनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चुनाव प्रचार सभाओं का बड़ा रोल रहा. एक रणनीति के तहत इस चुनाव को भी योगी ने सीधे कानून व्यवस्था से जोड़ा. स्थानीय मुद्दों की जगह बीजेपी के प्रचार और यूपी सीएम योगी के भाषणों में बार-बार कानून व्यवस्था का ज़िक्र आया.

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माफियाराज के खात्मे पर चुनाव

योगी की प्रयागराज के सभा में चौपाई के माध्यम से इस संदेश को कहना कि जो जैसा कर्म करेगा, उसे वैसे दल मिलेगा को भी इसी रणनीति से जोड़ कर देखा जा सकता है. अतीक अहमद व अशरफ की पुलिस कस्टडी में हुई हत्या के बाद पार्टी ने इस स्थिति को भी माफियाराज और अपराधियों ख़ात्मे से जोड़ दिया. वैसे ये भी संयोग है कि जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक और सभी मंत्री... कानून व्यवस्था के नाम पर वोट मांग रहे थे तब मुख्य विपक्षी दल के नेता अखिलेश यादव ने चुनाव में बहुत देर से प्रचार शुरू किया.

विपक्ष दल चारों खाने चित्त

वैसे तो यह माना जाता है कि यूपी के शहरी मतदाताओं पर भाजपा की पकड़ पहले से ही मजबूत रही है लेकिन हाल के दिनों में महंगाई, बेरोजगारी जैसे विपक्षी दलों के मुद्दों को बीच भाजपा के रणनीतिकारों ने जिस तरह से यूपी में नगरीय निकाय चुनाव की चौसर सजाई, उसमें विपक्षी दल कांटे के मुकाबले तक में आते नजर नहीं आये.

अब यूपी में ट्रिपल इंजन सरकार

नगरीय निकाय के चुनाव को अगर 2024 की रणनीति व चुनौती की दृष्टि से देखें तो उत्तर प्रदेश में अब ट्रिपल इंजन की सरकार हो गयी है. केन्द्र, राज्य और निकायों में भाजपा का कब्जा हो गया है. जाहिर है ऐसे में जनता की अपेक्षा भी तीन गुना अधिक बढ़ेंगी. हालांकि आज ही बीजेपी कर्नाटक विधानसभा के चुनाव में पराजय का स्वाद चख चुकी है. ऐसे में भाजपा के सामने 80 सीटों वाले उत्तर प्रदेश में जनता की अपेक्षाओं को पूरा करना नई चुनौती होगा.

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2024 पर क्या प्रभाव

फिलहाल नगर निकाय के साथ स्वार और छानबे उपचुनाव में भी बीजेपी ने जीत का परचम लहराया है. यूपी में तुरुप का कार्ड मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हार्ड हिन्दुत्व का चेहरा है. ये कार्ड उन्हें चुनौतियों से कितना पार करायेगा... ये आने वाले समय में तय होगा पर इतना तय है कि अभी उत्तर प्रदेश में नरेन्द्र मोदी और योगी आदित्यनाथ का जादू बरकरार है. आगे आने वाली चुनौतियों को इन्हीं दोनों के सहारे भाजपा को पार पाना होगा.

 

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