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यूपी निकाय चुनाव में सांसदों-विधायकों के परिजनों को नहीं मिलेगा टिकट, BJP का बड़ा ऐलान

यूपी निकाय चुनाव को लेकर बीजेपी ने अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है. उसने चुनाव के लिए प्रत्याशियों की तलाश भी शुरू कर दी है. इस बीच बीजेपी ने फैसला लिया है कि वह निकाय चुनाव में किसी भी मंत्री, सांसद और विधायक के परिजनों को टिकट नहीं देगी. इसके अलावा पार्टी ने इस चुनाव को लेकर प्रभारी मंत्रियों की जिम्मेदारी भी तय कर दी है.

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यूपी में मई में होने वाले निकाय चुनाव को लेकर सीएम योगी के आवास पर हुई बैठक (फाइल फोटो)
यूपी में मई में होने वाले निकाय चुनाव को लेकर सीएम योगी के आवास पर हुई बैठक (फाइल फोटो)

यूपी निकाय चुनाव को लेकर बीजेपी ने बड़ा फैसला लिया. पार्टी ने चुनाव में मौजूदा मंत्री, सांसद और विधायक के परिवारवालों और रिश्तेदारों को टिकट नहीं देगी. सीएम योगी आदित्यनाथ के आवास पर सोमवार को हुई बैठक में यह फैसला लिया गया है. बैठक में सीएम ने प्रभारी मंत्रियों को जिताऊ उम्मीदवार टिकट देने और प्रक्रिया पर नजर रखने को कहा है. बैठक में कहा गया है कि टिकट न मिलने पर उम्मीदवार असंतुष्ट न हों और पार्टी के लिए पूरी शिद्दत से काम करते रहें, इसका भी जिम्मा भी प्रभारी मंत्रियों का होगा.

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इस बार 11 मेयर का कट सकता है टिकट

सूत्रों के मुताबिक पार्टी लखनऊ समेत कई जगहों पर मौजूदा 14 में से 11 मेयर का टिकट काटने की तैयारी है. कुछ जगहों पर सीटों के रिजर्वेशन ने मेयर के लिए गणित बिगाड़ दिया है तो वहीं कुछ जगहों पर मेयर की उम्मीदवार की उम्र और मेयर का रिपोर्ट कार्ड टिकट काटने की वजह बनेगा. पार्टी ने 762 शहरी नगर निकायों और 17 नगर निगमों में जीत का लक्ष्य रखते हुए टिकट बांटने की प्रक्रिया को पारदर्शी और संगठनात्मक रखने का दावा किया है.

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सीएम ने ट्रिपल इंजन सरकार का नारा दिया

सीएम योगी आदित्यनाथ ने चुनाव तारीखों का ऐलान होने के बाद लोगों से बीजेपी को वोट देने की अपील की. उन्होंने पिछले दिनों हिंदुस्तान फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड के एक कार्यक्रम में कहा था कि राज्य में बिना रुकावट विकास के लिए ट्रिपल इंजन सरकार जरूरी है. उन्होंने इस दौरान निकाय चुनाव और 2024 लोकसभा चुनाव में कमल खिलाने की अपील की.

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4 मई और 11 मई को होगी वोटिंग

पिछले दिनों चुनाव आयोग ने यूपी में नगर निकाय चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया. प्रदेश में ये चुनाव दो चरणों में होंगे. चार मई को पहले चरण और 11 मई को दूसरे चरण की वोटिंग होगी. वहीं चुनाव के नतीजे 13 मई को जारी किए जाएंगे. इस बार 4.32 करोड़ वोटर्स मतदान करेंगे.

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जानिए आपके जिले में कब होगी वोटिंग-

पहला चरण-

- सहारनपुर मंडल के शामली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर,

- मुरादाबाद मंडल के बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर और सम्भल

- आगरा मंडल में आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा और मैनपुरी

- झांसी मंडल में झांसी, जालौन और ललितपुर

- प्रयागराज मंडल में कौशाम्बी, प्रयागराज, फतेहपुर और प्रतापगढ़

- लखनऊ मंडल के उन्नाव, हरदोई, लखनऊ, रायबरेली, सीतापुर और लखीमपुर खीरी

- देवीपाटन मंडल के गोंडा, बहराइट, बलरामपुर और श्रावस्ती

- गोरखपुर मंडल के गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज और कुशीनगर

- वाराणसी मंडल के गाजीपुर, वाराणसी, चंदौली और जौनपुर

दूसरा चरण-

- मेरठ मंडल के मेरठ, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, बागपत और बुलंदशहर

- बरेली मंडल के बदायूं, शाहजहांपुर, बरेली और पीलीभीत

- अलीगढ़ मंडल के हाथरस, कासगंज, एटा और अलीगढ़

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- कानपुर मंडल के कानपुर नगर, कानपुर देहात, फर्रुखाबाद, इटावा, कन्नौज और औरैया

- चित्रकूट मंडल के हमीरपुर, चित्रकूट, महोबा और बांदा

- अयोध्या मंडल के सुल्तानपुर, अयोध्या, अंबेडकरनगर, बाराबंकी और अमेठी

- बस्ती मंडल के संतकबीर नगर, बस्ती और सिद्धार्थनगर में वोटिंग होगी

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14,684 पदों पर होगा चुनाव 

यूपी की 762 नगरीय निकाय में से 760 निकायों में चुनाव हो रहे हैं. नगर निकाय के 14,684 पदों के लिए ये चुनाव होंगे. इसमें 17 महापौर और 1420 पार्षद का चुनाव ईवीएम से होगा. जबकि, नगर पालिका परिषद के 199 अध्यक्ष और 5327 सदस्य बैलट पेपर के जरिए चुने जाएंगे. इसके अलावा 544 नगर पंचायत अध्यक्ष, 7178 सदस्यों का चुनाव भी मतपत्रों से होगा.

प्रदेश में आचार संहिता लागू

निकाय चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही प्रदेश में आचार संहिता लागू (Model Code of Conduct) हो गई है. यह नतीजे आने तक लागू रहेगी. इस दौरान सरकारी पैसे का इस्तेमाल विज्ञापन या जन संपर्क के लिए नहीं हो सकता. अगर पहले से ही ऐसे विज्ञापन चल रहे हों तो उन्हें हटा लिया जाएगा. अगर कोई भी प्रत्याशी आचार संहिता का उल्लंघन करता है तो उसके प्रचार करने पर रोक लगाई जा सकती है. उल्लंघन करने पर प्रत्याशी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज किया जा सकता है. इसके अलावा नियम में जेल भेजने का प्रावधान भी है.

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पिछली बार 16 में से 14 मेयर बीजेपी से बने

नगर निकाय चुनाव में सबसे ज्यादा प्रतिष्ठा बीजेपी की दांव पर लगी है. बीजेपी नगर निकाय चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करती रही है और सरकार में रहते हुए उस पर बड़ा दबाव है. बीजेपी ने पिछले नगर निगम चानाव में बेहतर प्रदर्शन किया था, लेकिन नगर पालिका और नगर पंचायत में पिछड़ गई थी. उसे सपा और निर्दलीयों से कड़ी टक्कर मिली थी. नगर पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में बीजेपी से दो गुना ज्यादा निर्दलीय जीते थे. 2017 के चुनाव में बीजेपी के 16 में से 14 नगर निगम में मेयर बने थे, जबकि मेरठ और अलीगढ़ में बसपा के मेयर बने थे. 

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