लखनऊ में पीजीआई की एसोसिएट प्रोफेसर को डिजिटल अरेस्ट करके उनसे 2 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की गई थी.इस मामले में पुलिस ने अब पांच अपराधियों को गिरफ्तार किया है. प्रोफेसर के मोबाइल पर किसी अज्ञात नंबर से कॉल आया था.
कॉल रिसीव करने पर कॉलर ने खुद को सीबीआई मुंबई का अधिकारी बता कर बात की. उन्हें बताया गया कि आप पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस हुआ है. इसमें अपके खाते का इस्तेमाल किया गया है. इस तरह की बातें बता कर उन्हें प्रभाव में लिया गया.
इसके बाद पीजीआई प्रोफेसर को डिजिटल अरेस्ट कर उनके बैंक खाते की सारी डिटेल प्राप्त कर ली गई थी और 5 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया था. अकाउंट में 2 करोड़ से अधिक रकम थी. सारे पैसे विभिन्न खातों में ट्रांसफर करा लिये गए थे.
ठगी के पैसे ऐसे करवाते थे कैश
आरोपियों ने बताया डिजिटल अरेस्ट करके अलग-अलग खातों में तुरंत ट्रांसफर करके उनको अलग-अलग लड़कों द्वारा Binance App के माध्यम से USTD खरीद कर उसे वापस मंगा लिए थे. इस तरह से हम लोग फ्रॉड के रुपये को USTD में बदलकर उसे कभी भी कैश करवा लेते हैं और इसमें नाम भी कहीं नहीं आता है.
ऐसे बनाते थे लोगों को ठगी का शिकार
आरोपियों ने बताया कि फ्रॉड करते समय अलग-अलग व्यक्तियों से बात करने का काम ऋषिकेश नाम का आरोपी करता है. उसके साथ में गोपाल, प्रवचन, राहुल और गणेश रहते हैं. जिन लोगों को डिजिटल अरेस्ट करना होता है उनकी डिटेल टेलीग्राम एप पर स्कैमर व हैकरों द्वारा बनाए गए विभिन्न अकाउंटों व चैनलों के माध्यम से प्राप्त होती थी.
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ऐसे हुई थी 2 करोड़ रुपये की ठगी
बता दें कि साइबर अपराधी लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए ऐसे-ऐसे कहानी बुन रहे हैं, जिसके खौफ में अच्छे से अच्छा पढ़े-लिखे जानकार लोग फंस जा रहे हैं. पिछले महीने अगस्त में ऐसा ही मामला लखनऊ से सामने आया था. यहां पीजीआई की डॉक्टर से को मनी लॉन्ड्रिंग और नेशनल सिक्योरिटी का डर दिखाकर ठगों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर लिया. फिर उनसे 2 करोड़ रुपये ठग लिये थे.