देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव की तारीखें का ऐलान हो गया है. दो चरणों में होने वाले चुनावों में 4 मई को पहले और 11 मई को दूसरे चरण की वोटिंग होगी, जबकि 13 मई को नतीजे आएंगे. सभी राजनीतिक दलों ने जीत का परचम लहराने के लिए पहले से ही जोर लगा रखा है.
खासकर बात करें मेयर पदों की तो हर दल अधिक से अधिक सीटों पर कब्जा करने की रणनीति बना रहा है. वहीं, बीजेपी पिछली बार से और अच्छा प्रदर्शन करने का दावा व कोशिश कर रही है. साल 2017 में हुए निकाय चुनावों में राज्य की कुल 16 नगर निगम की सीटों में से बीजेपी ने 14 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि दो सीटें मायावती की पार्टी बीएसपी के खाते में गई थीं.
इसके साथ ही पिछली बार 1300 में से 597 पार्षद बीजेपी के थे. वहीं, 198 नगर पालिकाओं में से 70 में और 438 नगर पंचायतों में से 100 में बीजेपी की जीत हुई थी. कांग्रेस एक भी नगर निगम नहीं जीत पाई थी. कांग्रेस सिर्फ 9 नगर पालिका और 17 नगर पंचायत जीत सकी थी.
वाराणसी, मथुरा और गोरखपुर में पहले चरण में मतदान
मगर, इस बार मेयर की 17 सीटों पर चुनाव होना है. इसमें कुछ ऐसी सीटें हैं, जिन पर सभी की नजरें हैं. यहां होने वाला चुनाव काफी दिलचस्प माना जा रहा है. लोकसभा चुनाव से पहले इन सीटों का काफी महत्व है. ये सीटें अयोध्या, काशी, मथुरा, कानपुर, गोरखपुर की हैं. इसमें अयोध्या और कानपुर में दूसरे चरण में और वाराणसी, मथुरा और गोरखपुर में पहले चरण में मतदान होगा.
2017 में अयोध्या मेयर की सीट पर बीजेपी ने किया था कब्जा
2017 में अयोध्या नगर निगम के पहले चुनाव में बीजेपी ने मेयर की सीट पर कब्जा किया था. यहां बीजेपी प्रत्याशी ऋषिकेश उपाध्याय ने जीत का परचम लहराया था. वहीं, काशी से बीजेपी मेयर प्रत्याशी मृदुला जायसवाल ने करीब दो लाख मतों से जीत दर्ज की थी. बात करें कानपुर की तो यहां भी बीजेपी प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी और प्रमिला पांडेय महापौर बनी थीं.
गोरखपुर में सीताराम ने सपा प्रत्याशी को दी थी मात
2017 के निकाय चुनाव में मथुरा को नगर निगम का दर्जा मिला था. यहां से मेयर की सीट पर बीजेपी के डॉ. मुकेश बंधु आर्य ने कब्जा किया था. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्विंदी को 22 हजार से अधिक वोटों से हराया था. इसके साथ ही सीएम योगी आदित्यनाथ के गढ़ यानी कि गोरखपुर में भी बीजेपी के प्रत्याशी ने मेयर की सीट पर कब्जा किया था. यहां सीताराम जयसवाल ने सपा प्रत्याशी को हराकर जीत दर्ज की थी.
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बता दें कि इस बार उत्तर प्रदेश में 17 महापालिकाओं के मेयर, 199 नगर पालिकाओं के अध्यक्ष और 544 नगर पंचायत के अध्यक्ष चुने जाने हैं. महापौर की 17 में से 9 सीटों को आरक्षित किया गया है. इनमें आगरा सीट एससी (महिला), झांसी एससी, शाहजहांपुर और फिरोजाबाद ओबीसी (महिला), सहारनपुर और मेरठ ओबीसी और लखनऊ, कानपुर और गाजियाबाद को महिला के लिए आरक्षित किया गया है. जबकि वाराणसी, प्रयागराज, अलीगढ़, बरेली, मुरादाबाद, गोरखपुर, अयोध्या और मथुरा-वृंदावन अनारिक्षित सीटें हैं.
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इसके साथ ही नगर निगमों और नगर पालिका परिषद के सीमा विस्तार के कारण वोटर्स की संख्या बढ़ गई है. इस बार निकाय चुनाव में 4.32 करोड़ वोटर्स वोट डालेंगे. 2017 में 3.35 करोड़ वोटर्स थे. यानी, पांच साल में 96.36 लाख से ज्यादा वोटर्स बढ़ गए हैं. इन चुनावों में 4.33 लाख से ज्यादा वोटर्स ऐसे हैं जो पहली बार वोट डालेंगे. ये वो वोटर हैं जो 1 जनवरी 2023 को 18 साल के हो गए थे.
समझिए सीमा विस्तार का असर
सीमा विस्तार होने से नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत की संख्या बढ़ गई है. कुल मिलाकर अब 17 नगर निगम, 200 नगर पालिकाएं और 545 नगर पंचायत हैं. हालांकि, इनमें से 760 पर ही चुनाव होने हैं. 2017 के चुनाव में 16 नगर निगम, 198 नगर पालिका और 438 नगर पंचायत थीं. इस बार एक नगर निगम, 2 नगर पालिका और 107 नगर पंचायतें बढ़ गईं. नई नगर पंचायत बनने से कई सारे ग्रामीण इलाके अब नगर में आ गए हैं. इसका नतीजा ये हुए 21.23 लाख से ज्यादा वोटर्स ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में आ गए हैं.