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दार्जिलिंग से बनवाया फर्जी पासपोर्ट, चीन में बैठे साइबर ठगों को देता था भारतीयों का डाटा, UP एसटीएफ ने ऐसे किया गिरफ्तार

यूपी एसटीएफ (STF) की नोएडा यूनिट ने एक तिब्बती नागरिक को भारतीयों का डाटा चीनी साइबर ठगों को उपलब्ध कराने के आरोप में गिरफ्तार किया है. आरोपी 2013 में भारत फर्जी पासपोर्ट के जरिए आया था.

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File Photo
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यूपी एसटीएफ (STF) की नोएडा यूनिट में फर्जी दस्तावेजों के साथ तिब्बत के एक नागरिक को गिरफ्तार किया गया है. एसटीएफ ने इसकी गिरफ्तारी दिल्ली के द्वारका सेक्टर-3 से की है. पिछले कई दिनों से इसके खिलाफ शिकायत मिल रही थी. जिसके बाद एसटीएफ ने जाल बिछाया और गिरफ्तार कर लिया. जानकारी के मुताबिक आरोपी चीन, नेपाल और श्रीलंका में साइबर हैकरों को बैंक खाता उपलब्ध कराता था. अब तक हुई पूछताछ में 26 भारतीय बैंक खातों का पता चला है. एसटीएफ आरोपी की मदद करने वाले एक अन्य साथी और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है. 

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2013 में आया था भारत 

एसटीएफ की तरफ से साझा की गई जानकारी के मुताबिक आरोपी नेपाल और श्रीलंका में बैठे चाइनीस साइबर अपराधियों के संपर्क में था और भारतीय लोगों के खातों को अपने परिचितों को उपलब्ध कराता था. जिसका प्रयोग करते हुए साइबर क्राइम किया जा रहा था. आरोपी के पास से फर्जी पासपोर्ट, पैन कार्ड, आधार कार्ड, एटीएम कार्ड  और कंबोडिया देश का सिम कार्ड व मोबाइल फोन बरामद किया गया है.

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आरोपी का नाम शिंजो ताराचिन्न है. यह भारत 2013 में दार्जिलिंग से चंदा ठाकुर के नाम से फर्जी पासपोर्ट बनवाकर आया था. शिंजो थारचिन्न ने चीन, मलेशिया, थाईलैंड और दुबई जैसे कई देशों की यात्रा की. इस दौरान नेपाल और श्रीलंका में बैठे चाइनीस अपराधियों के संपर्क में आया और भारतीय व्यक्तियों और फर्मों के बैंक खातों को अपने परिचित विदेशी नागरिकों को उपलब्ध करने लगा. पूछताछ में लगभग 26 भारतीय बैंक अकाउंट प्रकाश में आए हैं. जिनके संबंध में गहनता से छानबीन की जा रही है.

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9 महीने पहले गया था जेल 

शिंजो थाराचिन्न ने 2019 में एक भारतीय बैंक अकाउंट चीनी साइबर ठग को उपलब्ध कराया था. उस अकाउंट से लगभग साढ़े चार करोड़ रुपए का ट्रांजैक्शन होने के बाद अकाउंट होल्डर ने दिल्ली के जीटीवी एनक्लेव थाने पर मुकदमा दर्ज कराया था. जिसमें आरोपी शिंजो ताराचिन्न जेल गया था और लगभग 9 माह जेल में रहा था. जेल से छूटने के बाद शिंजो ताराचिन्न की मुलाकात द्वारका के रहने वाले नंदू उर्फ नरेंद्र यादव से हुई, जिसके साथ मिलकर वह नेपाल और श्रीलंका में बैठे चाइनीस हैकरों के लिए काम करने लगा.

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