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गुड्डू मुस्लिम के साथ STF को एक और खतरनाक बमबाज की तलाश, अतीक अहमद का था खास गुर्गा

उमेशपाल हत्याकांड का आरोपी बमबाज गुड्डू मुस्लिम 62 दिनों से फरार है. तमाम कोशिशों के बाद भी एसटीएफ उसका पता नहीं लगा पा रही है. वहीं अब पुलिस ने उसके शागिर्द आसिफ मल्ली की भी तलाश शुरू दी है. पुलिस का कहना है कि गुड्डू को संरक्षण देने में मल्ली मदद कर रहा है.

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उमेशपाल की इस साल फरवरी में अतीक गैंग के गुर्गों ने कर दी थी हत्या (फाइल फोटो)
उमेशपाल की इस साल फरवरी में अतीक गैंग के गुर्गों ने कर दी थी हत्या (फाइल फोटो)

उमेश पाल हत्याकांड में फरार बमबाज गुड्डू मुस्लिम के अलावा एसटीएफ को एक और बमबाज की जोर-शोर तलाश की जा रही है. इस आरोपी का नाम आशिफ ऊर्फ मल्ली है. जानकारी के मुताबिक यह गुड्डू मुस्लिम का शागिर्द और फाइनेंसियल मददगार है. इसके अलावा पुलिस मुकेश नाम के आरोपी की भी तलाश कर रही है.

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अतीक के गैंड में गुड्डू मुस्लिम के बाद आशिफ ही बम बनाने में एक्सपर्ट है. इसे गुड्डू मुस्लिम ने ही बम बनाना सिखाया था.  पुलिस को मिली जानकारी के मुताबिक मुकेश और मल्ली लगातार गुड्डू मुस्लिम की मदद कर रहे हैं. अतीक की पत्नी और 50 हजार की इनामी शाइस्ता परवीन को संरक्षण देने में भी मल्ली नाम सामने आ रहा है.

प्रयागराज के धूमनगंज का रहने वाला मल्ली अतीक अहमद से बहुत लंबे समय से जुड़ा रहा है. तीन साल पहले प्रयागराज पुलिस ने मल्ली और अरमान को मकान पर कब्जा करने के आरोप में गिरफ्तार किया था. अतीक अहमद के गैंग के टॉप-10 गुर्गों में मल्ली का भी नाम शामिल था.

जांच में यह भी पता चला है कि मल्ली ने उमेश पाल हत्याकांड के बाद मल्ली साबरमती जेल के पास अपना ठिकाना बनाया था. अतीक के  कहने पर वह हरियाणा में किसी माफिया से मिला था. अतीक ने शूटरों की मदद के लिए और उनको पनाह देने के लिए हरियाणा के किसी माफिया से मदद भी ली थी, जिसके लिए मल्ली को भेजा गया था.

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गुड्डू मुस्लिम के तीन नए नाम आए सामने

उमेशपाल हत्याकांड का आरोपी बमबाज गुड्डू मुस्लिम 62 दिनों से फरार है. वह पुलिस ने बचने के लिए हुलिया बदलने के साथ ही अपना असली नाम छुपाकर घूम रहा है. आजतक का पता चला है कि वह हिंदू नाम रखकर हर जगह यूपी एसटीएफ को चकमा दे रहा है. वह बबलू के अलावा सुरेंद्र कुमार और संदीप कुमार के नाम से जगह-जगह ठहर रहा है.

इससे पहले पता चला था कि गुड्डू मुस्लिम ने अपनी दाढ़ी बढ़ा ली है. पुलिस को उसकी आखिरी बार लोकेशन ओडिशा और छत्तीसगढ़ में मिली थी. गुड्डू मुस्लिम 2 अप्रैल से 13 अप्रैल तक ओडिशा के बारगढ़ में छिपा था. वह ओडिशा से कपड़ों से भरा अपना बैग फेंककर भागा है. वह अकेला ही ओडिशा में ठहरा था. उसके पास पैसे भी नहीं बचे हैं. ऐसे में वह पैसों की जुगाड़ करने में लगा है. पुलिस ने यहां से राजा नाम के युवक को हिरासत में लिया है. उसने पूछताछ में बताया कि गुड्डू ने पुलिस से बचने के लिए दाढ़ी बढ़ा ली है. गुड्डू झांसी, नाशिक , पुणे और ओडिशा में भी रुका था. इसके बाद वह छत्तीसगढ़ भाग गया.

गुड्डू मुस्लिम ने रची थी हत्या की साजिश

गुड्डू मुस्लिम को जानने वाले दावा करते है कि उमेश पाल को मारने की अतीक के पास कोई वजह नहीं बची थी. असद को भड़काने और इस पूरे हत्याकांड का मास्टरमाइंड अगर कोई रहा तो वह गुड्डू मुस्लिम था, जिसने उमेशपाल की हत्या को लीड किया और ताबड़तोड़ बम फेंक कर दहशत फैला दी और मौत का खुला खेल खेला.

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सूत्र तो यहां तक दावा करते हैं कि अतीक और उसके भाई अशरफ की जेल में रहते उनका सारा कारोबार गुड्डू मुस्लिम के हाथ में रहता था और इस दौरान उसने कोयला सप्लाई समेत कई धंधों में गुपचुप तौर पर पैसे भी लगाए थे. इस दौरान वह कई ऐसे माफिया के संपर्क में भी रहा, जिसके संबंध अतीक और अशरफ से अच्छे नहीं रहे.

अपने सिंडिकेट का इस्तेमाल कर रहा गुड्डू

यूपी एसटीएफ की पहली टीम के मेंबर और गुड्डू मुस्लिम से पूछताछ कर चुके पूर्व आईपीएस राजेश पांडे ने बताया कि उमेश की हत्या के बाद फरार होने में गुड्डू ने अतीक के नहीं बल्कि अपने सिंडिकेट का इस्तेमाल किया. गुड्डू मुस्लिम का अपना बड़ा सिंडिकेट है. उसने जिस अपराधी के लिए काम किया, उससे कभी संबंध खराब नहीं किया. 

पूर्व आईपीएस राजेश पांडे ने बताया, उसके संपर्क में रहे तमाम लोग आज माननीय हो चुके हैं, ऐसे में गुड्डू मुस्लिम को फरारी काटने के लिए अतीक अहमद सिंडिकेट का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है. उसका अपना सिंडिकेट ही बहुत बड़ा है. उत्तर प्रदेश और राज्य से बाहर के तमाम माफिया उसके सीधे संपर्क में रहे हैं. यही वजह है कि गुड्डू मुस्लिम अब तक फरार है.

ऐसे अतीक के संपर्क में आया था गुड्डू

गोरखपुर में एनडीपीएस में जेल जाने के बाद गुड्डू मुस्लिम अतीक अहमद के संपर्क में आया. गोरखपुर के तत्कालीन एएसपी और मौजूदा समय में यूपी एसटीएफ चीफ अमिताभ यश ने गुड्डू मुस्लिम को जेल भेजा था और सजा भी करवाई थी. लेकिन अतीक अहमद में अपने इलाहाबाद हाई कोर्ट के सिंडिकेट का इस्तेमाल कर गुड्डू मुस्लिम को हाई कोर्ट से रिहा करवाया और तभी से 20 सालों से गुड्डू मुस्लिम अतीक अहमद के लिए काम कर रहा था.

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