बीती शाम उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुई कैबिनेट बैठक में रामपुर के जौहर शोध संस्थान को लेकर सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को कैबिनेट में रखा था जिसपर मुहर लगाते हुए मौलाना मोहम्मद अली जौहर प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान को सरकार ने वापस लिया. अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहते और जब आजम खान अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री थे ₹100 के सालाना लीज पर 100 वर्षों के लिए यह सरकारी शोध संस्थान मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को दिया गया था. दरअसल मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट यह संस्थान चला रहा था और समाजवादी पार्टी नेता आजम खान इस ट्रस्ट के आजीवन अध्यक्ष हैं.
योगी आदित्यनाथ के पिछले कार्यकाल में इस मामले पर एसआईटी गठित की गई थी और एसआईटी ने जांच में यह सही पाया था कि जिस जौहर संस्थान को अरबी फारसी जैसी भाषाओं में शोध के लिए आजम खान के ट्रस्ट को दिया गया था उसका इस्तेमाल अंग्रेजी स्कूल चलाने में किया जा रहा था. इसी को आधार बनाते हुए सरकार ने 13000 वर्ग मीटर की जमीन वापस ले ली जिस पर करीब 4300 वर्ग मीटर में आजम खान ने निर्माण करा रखा है.
सजा काट रहे आजम
बता दें कि आजम खान को अदालत ने भड़काऊ भाषण मामले में तीन साल की सजा सुनाई हुई है. दरअसल, यह मामला साल 2019 का है. तब देश में लोकसभा चुनाव हो रहे थे. सपा नेता आजम खान उस वक्त एक चुनावी सभा को संबोधित करने के लिए रामपुर के मिलक विधानसभा क्षेत्र में पहुंचे थे. सभा स्थल पर काफी भीड़ थी. भारी संख्या में लोग आजम खान को सुनने के लिए पहुंचे थे. आरोप है कि उस चुनावी सभा में कथित रूप से आजम खान ने आपत्तिजनक और भड़काऊ टिप्पणियां की थी. जिस पर विपक्षी दलों ने भी हंगामा किया था.