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महाकुंभ हादसे में मारे गए एक ही परिवार के दो लोगों का शव गोरखपुर पहुंचा तो घर में कोहराम मच गया. इस परिवार ने महाकुंभ भगदड़ में अपनी बहू और नानी को खो दिया. गार्जियन घर में बिना किसी को बताए प्रयागराज से गोरखपुर शवों को ले आए. परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत ही दयनीय है.
दरअसल, गोरखपुर के चौरी-चौरा विधानसभा के भावपुर गांव की लाली देवी अपनी मां और अपने पति के साथ मौनी अमावस्या के शुभ मुहूर्त पर आस्था की डुबकी लगाने प्रयागराज गई हुई थी. वहां पर मौनी अमावस्या के दिन मची भगदड़ में लाली देवी और उनकी मां की भीड़ में दबकर मौत हो गई. जबकि, मौके पर मौजूद लाली के पति घायल हो गए.
गुरुवार दोपहर बाद जब दोनों मृतकों का शव गोरखपुर आया तो गांव में कोहराम मच गया. मृतका के बेटे अविनाश ने 'आजतक' से कहा कि पिताजी ने घर वालों को सूचना भी नहीं दी कि महाकुंभ में उनके साथ ऐसी कोई घटना हो गई है. वो सीधा शवों को लेकर घर आ गए. हमने नम आंखों से दाह संस्कार किया.
वहीं, बहू लाली देवी की मौत पर सास फूट-फूटकर रो रही थी और घर की दयनीय स्थिति के बारे में बता रही थी. सास ने कहा कि मृतका के बच्चे भी बड़े हो गए हैं. अब वह अनाथ हो गए हैं. घर में भोजन कौन बनाएगा, बच्चों का विवाह कौन करेगा, सोच-सोच कर कलेजा फटा जा रहा है.
आपको बता दें कि प्रयागराज महाकुंभ में मौनी अमावस्या के दिन आस्था का सैलाब उमड़ा था . मगर अचानक श्रद्धा का यह महासैलाब मातम में बदल गया. संगम किनारे बैरिकेडिंग टूटते ही भगदड़ मच गई. चीख-पुकार में हजारों लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे और देखते ही देखते भगदड़ ने भयानक रूप ले लिया. हादसे में 30 श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 60 घायल हो गए. अभी भी कई लोग लापता हैं. परिजन उनकी तलाश में लगे हैं.