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कर्नाटक में धर्मांतरण कानून रद्द तो यूपी में ताबड़तोड़ एक्शन, 2 साल में 427 FIR

कर्नाटक में कांग्रेस की सिद्धारमैया सरकार ने धर्मांतरण कानून को रद्द करने का फैसला लिया है. दूसरी तरफ यूपी में धर्मांतरण को लेकर योगी सरकार लगातार सख्ती के साथ पेश आ रही है. राज्य में लगातार इस मामले में कार्रवाई की जा रही है. लगातार FIR और गिरफ्तारियां की जा रही हैं. इस संबंध में सरकार ने आंकड़े पेश किए हैं.

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ. (फाइल फोटो)
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ. (फाइल फोटो)

कर्नाटक में धर्मांतरण का कानून रद्द होने के बाद सियासत गरमा गई है. इस बीच, यूपी में लव जिहाद को लेकर योगी सरकार लगातार सख्त रवैया अपना रही है. यही वजह है कि यूपी में 2021 से 30 अप्रैल 2023 तक लव जिहाद से जुड़े 427 मामले दर्ज हुए. इसी तरह, धर्मांतरण कानून को लेकर अब तक 833 से ज्यादा गिरफ्तारी हुई हैं. 185 मामलों में पीड़ितों ने कोर्ट के सामने जबरदस्ती धर्म बदलवाने की बात कुबूल की है.

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नाबालिगों के धर्मांतरण के मामले में अब तक 65 मामले दर्ज हुए हैं. इनमें बरेली जनपद में अब तक सबसे अधिक मामले दर्ज हुए हैं. इससे पहले उत्तर प्रदेश में दिव्यांग बच्चों का धर्मांतरण कराने वाले रैकेट का खुलासा हो चुका है. बता दें कि प्रदेश में 27 नवंबर, 2020 से गैर कानूनी धार्मिक रूपांतरण निषेध कानून लागू है. 

धर्मांतरण में 10 साल की सजा

यूपी में धर्मांतरण कानून के तहत दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को अपराध की गंभीरता के आधार पर 10 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है. कानून में जुर्माने की राशि 15 हजार से 50 हजार तक रखी गई है. नियमों के मुताबिक, अंतर-धार्मिक विवाह करने वाले जोड़ों को शादी करने से दो महीने पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचित करना होता है.

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सिर्फ धर्मांतरण के लिए शादी हुई तो अवैध मानी जाएगी

जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर न्यूनतम 15 हजार रुपये के जुर्माने के साथ एक से पांच साल की कैद का प्रावधान रखा गया है. एससी/एसटी समुदाय के नाबालिगों और महिलाओं के धर्मांतरण पर तीन से 10 साल की सजा का प्रावधान है. जबरन सामूहिक धर्मांतरण के लिए जेल की सजा तीन से 10 साल और जुर्माना 50 हजार है. कानून के मुताबिक, अगर विवाह का एकमात्र उद्देश्य महिला का धर्म परिवर्तन कराना था तो ऐसी शादियों को अवैध करार दिया जाएगा.

'धर्मांतरण पर कार्रवाई के व्यापक असर'

इस संबंध में एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने कहा, धर्मांतरण का कानून यूपी में 27 नवंबर 2020 से लागू है. सरकार जो एक्ट लेकर आई है, उसका सख्ती से पालन कराया जा रहा है. ऐसे मामले जिसमें लोग अपने धर्म और पहचान छिपाकर बालिकाओं को बहला फुसलाकर लव जिहाद के दायरे में लाते हैं और धर्मांतरण करने को बाध्य करते हैं, उनमें कार्रवाई करने के लिए सरकार संकल्पित है. अब तक की गई कार्रवाई के व्यापक असर हैं.

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'लालच या धमकी देकर धर्मांतरण पर एक्शन लेंगे'

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एडीजी लॉ एंड ऑर्डर ने आगे कहा, इसके अलावा कई अलग-अलग तरह के धर्मांतरण के मामले भी सामने आते हैं, जिसमें दिव्यांग बच्चों को शिकार बनाया गया. हाल ही में गाजियाबाद में गेम के जरिए धर्म परिवर्तन का केस सामने आया है. मुख्य अभियुक्तों को दूसरे प्रांत से लाकर कार्रवाई की जा रही है. पूछताछ चल रही है. कानून और संविधान के तहत कोई धर्म पंथ अपनाता है तो कोई बुराई नहीं है, लेकिन कोई लालच, धमकी देकर धर्म परिवर्तन करवाता है तो उस पर पुलिस की कार्रवाई जरूर की जाएगी.

'जीवा हत्याकांड में एसआईटी गठित'

उन्होंने लखनऊ कोर्ट में संजीव माहेश्वरी जीवा हत्या मामल में भी बयान दिया है. एडीजी ने कहा, एक एसआईटी का गठन हो गया है. मुख्य अभियुक्त पकड़ा जा चुका है. पूछताछ की जा रही है. इस मामले में अगर मुख्य अभियुक्त के अलावा कोई शामिल है तो जल्द ही उसको भी गिरफ्तार करेंगे. स्पेशल टीम कमिश्नरेट स्तर पर काम कर रही हैं. आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है.

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'सुरक्षा को लेकर रूपरेखा तैयार की जा रही'

अतीक अहमद हत्याकांड को लेकर उन्होंने कहा, अतीक और अशरफ की जो हत्या हुई उसके लिए सरकार ने 5 सदस्यीय न्यायिक आयोग गठित किया गया है, जो इस मामले की जांच कर रहा है. इस तरह की घटनाएं आगे ना हों, उसके पूरे प्रयास किए जा रहे हैं. संसाधन की कोई कमी ना हो, इसके प्रयास किए जा रहे हैं. सुरक्षा के पैमाने पर क्या चूक हुई है इसको देखा जा रहा है. सुरक्षा को लेकर व्यापक निर्देश जारी किए गए हैं. कोर्ट की सुरक्षा को लेकर भी इंतजाम किए जा रहे हैं.

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क्या हुआ है कर्नाटक में...

कर्नाटक कैबिनेट ने एक दिन पहले ही धर्मांतरण रोधी कानून को रद्द करने का फैसला किया है. इस कानून को राज्य की पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार ने लागू किया था. इस कानून को रद्द करने के लिए सरकार विधानसभा के आगामी सत्र में प्रस्ताव लेकर आएगी. कर्नाटक विधानसभा सत्र तीन जुलाई से शुरू हो रहा है. कानून एवं संसदीय मामलों के मंत्री एचके पाटिल ने कैबिनेट बैठक के बाद कहा कि कैबिनेट में धर्मांतरण विरोधी कानून पर चर्चा हुई. हमने 2022 में बीजेपी सरकार द्वारा लाए गए इस बिल को रद्द करने का फैसला किया है. 

'5 साल की सजा और जुर्माने का था प्रावधान'

कर्नाटक धर्मांतरण विरोधी कानून 2022 को कांग्रेस के विरोध के बावजूद बीजेपी सरकार ने लागू किया था. इस कानून के तहत एक धर्म से दूसरे धर्म में जबरन, किसी के प्रभाव में या बहलाकर धर्म परिवर्तन कराना गैरकानूनी बताया गया है. इसके तहत तीन से पांच साल की कैद और 25000 रुपये जुर्माने का प्रावधान है. इस कानून के तहत धर्म परिवर्तन कराने वाले शख्स पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है. 

'धर्म परिवर्तन को बनाया था गैर जमानती'

सामूहिक तौर पर धर्म परिवर्तन के लिए तीन से दस साल तक की कैद और एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है. यह भी कहा गया कि कोई भी शादी जो धर्म परिवर्तन के इरादे से ही की गई है, उसे फैमिली कोर्ट द्वारा अवैध मान जाएगा. इसे गैरजमानती अपराध बताया गया है.

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